अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष अब और खतरनाक मोड़ लेता दिख रहा है. जंग का दायरा बढ़ते हुए 18वें दिन में प्रवेश कर चुका है, जहां एक तरफ सैन्य कार्रवाई तेज हो रही है तो दूसरी ओर तीखी बयानबाजी भी जारी है. इस बीच खाड़ी देशों में बढ़ते हमलों ने वैश्विक चिंता को और गहरा कर दिया है.
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर कई देशों से अपील की है कि वे मिलकर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को दोबारा खोलने में सहयोग करें. यह जलमार्ग वैश्विक तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम माना जाता है. हालांकि, अमेरिका के सहयोगी देशों की ओर से इस प्रस्ताव पर फिलहाल ठोस समर्थन सामने नहीं आया है.
ईरानी मीडिया के अनुसार राजधानी तेहरान में कई धमाकों की आवाजें सुनी गईं, जिससे संकेत मिल रहा है कि संघर्ष और तेज हो रहा है. वहीं एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि खाड़ी क्षेत्र में हुए हमलों में अमेरिका के करीब 200 सैनिक घायल हुए हैं.
दुबई एयरपोर्ट के पास ड्रोन हमले
संयुक्त अरब अमीरात में हालात अचानक बिगड़ गए जब दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास ड्रोन हमलों की खबर सामने आई. इन हमलों के कारण कई उड़ानों में देरी हुई, जबकि कुछ फ्लाइट्स को दूसरे एयरपोर्ट की ओर डायवर्ट करना पड़ा.
बताया जा रहा है कि ईरान मुख्य रूप से खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है. इसी कड़ी में यूएई के फुजैराह और शाह ऑयल डिपो पर भी हमले किए गए. हालात की गंभीरता को देखते हुए यूएई प्रशासन ने अस्थायी तौर पर एयरपोर्ट संचालन प्रभावित किया और पूरे एयरस्पेस को बंद करने का फैसला लिया.
दुबई, जो दुनिया के प्रमुख इंटरनेशनल बिजनेस हब्स में गिना जाता है, इस संघर्ष के चलते आर्थिक दबाव का सामना कर रहा है.
फुजैराह ऑयल एरिया में आग
रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरानी ड्रोन हमले के बाद फुजैराह ऑयल इंडस्ट्रीज एरिया में भीषण आग लग गई. वहीं अबू धाबी प्रशासन ने भी पुष्टि की है कि शाह ऑयल एंड गैस फील्ड में ड्रोन अटैक हुआ, जिससे वहां भी आग भड़क उठी.
हालांकि इन हमलों में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन इन घटनाओं ने तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है. फुजैराह पोर्ट यूएई का एक महत्वपूर्ण एक्सपोर्ट रूट है, जो स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को बायपास करता है. ऐसे में इस रूट पर असर पड़ने से वैश्विक तेल व्यापार पर दबाव बढ़ सकता है.
पहले से ही स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के बंद होने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा जा रहा है.
1300 से ज्यादा मौतों का दावा
संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अमीर सईद इरावानी ने दावा किया है कि अमेरिका और इजरायल के हमलों में अब तक 1300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. उन्होंने आरोप लगाया कि हमलों में नागरिक इलाकों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया.
दूसरी ओर, अमेरिकी संस्था HRANA के अनुसार मृतकों की संख्या 1858 तक हो सकती है, जिसमें आम नागरिक और सैन्यकर्मी दोनों शामिल हैं.
वहीं लेबनान में भी हालात बिगड़ते जा रहे हैं. वहां के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, इजरायली हमलों में अब तक कम से कम 773 लोगों की जान जा चुकी है.
ईरान का अमेरिका पर तंज
ईरान की सेना के संयुक्त कमांड मुख्यालय के प्रवक्ता इब्राहीम जुल्फागरी ने अमेरिकी बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि युद्ध का फैसला सोशल मीडिया या बयानबाजी से नहीं, बल्कि युद्ध के मैदान में होता है.
उन्होंने अमेरिकी अभियान का मजाक उड़ाते हुए कहा कि इसे “एपिक फ्यूरी” नहीं बल्कि “एपिक फियर” कहा जाना चाहिए. जुल्फागरी के अनुसार ईरान की सेना पूरी तरह तैयार है और किसी भी हमले का जवाब ताकत के साथ दिया जाएगा.
युद्ध के चलते ट्रंप का चीन दौरा टला
जारी संघर्ष का असर कूटनीतिक गतिविधियों पर भी पड़ा है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपना प्रस्तावित चीन दौरा टालने का फैसला किया है.
यह यात्रा शी जिनपिंग के साथ 31 मार्च से 2 अप्रैल के बीच होनी थी. ट्रंप ने कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए उनका अमेरिका में रहना जरूरी है ताकि वे युद्ध की स्थिति पर नजर रख सकें.
लेबनान में इजरायली हमले तेज
इस बीच इजरायल की वायुसेना ने दक्षिणी लेबनान के कई इलाकों में हवाई हमले किए हैं. तैयबे समेत कई कस्बों में बमबारी और भारी तोपखाने का इस्तेमाल किया गया.
स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार मजादेल, जिबकीन, यातर और कफरा को भी निशाना बनाया गया.
इसके अलावा क़ाना में एक रिहायशी घर पर भी हमला किया गया. फिलहाल इन हमलों में किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं.
ये भी पढ़ें- जिस अस्पताल के मरीजों से मिले थे अफगानी क्रिकेटर, पाकिस्तान ने उसी पर की एयर स्ट्राइक, 400 लोगों की मौत