Largest Missile Manufacturer: ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच बढ़ते तनाव में मिसाइलों की ताकत एक बार फिर दुनिया के सामने साफ नजर आ रही है. खबरों के मुताबिक, इस संघर्ष में लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिनकी रेंज हजारों किलोमीटर तक बताई जा रही है. आमतौर पर हथियारों की बिक्री में अमेरिका का नाम सबसे आगे लिया जाता है, लेकिन जब बात मिसाइल बनाने की आती है तो रूस अभी भी दुनिया में अग्रणी माना जाता है.
रूस को मिसाइल तकनीक और उत्पादन के मामले में सबसे मजबूत देशों में गिना जाता है. इसके पास दुनिया का सबसे बड़ा इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) बेड़ा मौजूद है. साथ ही, हाइपरसोनिक तकनीक में भी रूस ने बड़ी बढ़त बनाई हुई है. यही वजह है कि रूस को मिसाइल निर्माण में ‘सुपरपावर’ कहा जाता है.
परमाणु हथियार ले जाने की क्षमता के मामले में भी रूस काफी आगे है. उसके पास 5,500 से ज्यादा मिसाइलें हैं, जिनमें परमाणु, क्रूज और सामरिक उपयोग की विभिन्न प्रकार की मिसाइलें शामिल हैं. यह विविधता और संख्या दोनों ही उसे बाकी देशों से अलग बनाती हैं.
रूस की प्रमुख ताकतवर मिसाइलें
1. सरमत (Sarmat):
यह रूस की सबसे खतरनाक इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों में से एक है. इसे ‘सैटन-2’ के नाम से भी जाना जाता है. इसकी खासियत है कि यह बहुत लंबी दूरी तक वार कर सकती है और आधुनिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम को भी चकमा देने की क्षमता रखती है.
2. क्रूज मिसाइल:
रूस की क्रूज मिसाइलों को बेहद उन्नत और रणनीतिक माना जाता है. इनकी सटीक रेंज सार्वजनिक नहीं है, लेकिन इन्हें इस तरह डिजाइन किया गया है कि इन्हें रोकना बेहद मुश्किल होता है. रूसी नेतृत्व दावा कर चुका है कि कुछ मिसाइलें बहुत लंबी दूरी तक मार कर सकती हैं.
3. पानी के अंदर से हमला करने वाली मिसाइल:
रूस ऐसी मिसाइल तकनीक पर भी काम कर चुका है जो पानी के अंदर से लक्ष्य को भेद सकती है. यह सिस्टम दुश्मन के लिए बड़ा खतरा माना जाता है क्योंकि इसका पता लगाना मुश्किल होता है.
4. हाइपरसोनिक मिसाइल (किंझल):
रूस की ‘किंझल’ मिसाइल हवा से दागी जाती है और इसकी गति बेहद तेज होती है. यह 2,000 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक लक्ष्य को भेद सकती है. इसकी स्पीड के कारण इसे इंटरसेप्ट करना लगभग असंभव माना जाता है.
5. एवनगार्ड (Avangard):
यह एक अत्याधुनिक हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल है, जो लगभग 25,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भर सकता है. इसकी तेज गति और अनोखी उड़ान क्षमता इसे बेहद घातक बनाती है.
रूस के बाद कौन है आगे?
मिसाइल निर्माण और तकनीक के मामले में रूस के बाद अमेरिका दूसरे स्थान पर आता है. अमेरिका के पास दुनिया की कई उन्नत मिसाइल प्रणालियां हैं, जिनमें पेट्रियॉट एयर डिफेंस सिस्टम, टॉमहॉक क्रूज मिसाइल और मिनटमैन-III ICBM शामिल हैं.
अमेरिका के पास हजारों की संख्या में मिसाइलें मौजूद हैं, जिनमें बैलिस्टिक, क्रूज और एयर-लॉन्च सिस्टम शामिल हैं. कई रिपोर्ट्स के अनुसार, इसकी कुल संख्या भविष्य में और बढ़ सकती है.
चीन की स्थिति क्या है?
रूस और अमेरिका के बाद चीन तीसरे नंबर पर आता है. चीन ने भी मिसाइल तकनीक में तेजी से प्रगति की है. उसके पास DF-21, DF-26 और DF-17 जैसी आधुनिक मिसाइलें हैं, जिनमें हाइपरसोनिक क्षमता भी शामिल है.
चीन का मिसाइल भंडार लगातार बढ़ रहा है, जिससे वह वैश्विक स्तर पर एक बड़ी सैन्य ताकत बनकर उभरा है.
अन्य देश भी पीछे नहीं
भारत, फ्रांस, ईरान और उत्तर कोरिया जैसे देश भी मिसाइल तकनीक में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं.
ये भी पढ़ें- आसमान पर होगा भारत का दबदबा, 114 मल्टी-रोल फाइटर जेट से बढ़ेगी वायुसेना की ताकत, चीन-पाकिस्तान पस्त!