Harshit Rana Story: भारतीय क्रिकेट में अपनी पहचान बनाने वाले तेज गेंदबाज हर्षित राणा की कहानी केवल विकेटों की नहीं है. यह कहानी संघर्ष, आंसू और पिता के अटूट विश्वास की भी है. आज, जब हर्षित भारत के लिए आत्मविश्वास से भरे हुए मैच जीत रहे हैं, कभी वे हर हार के बाद अपने पिता के सामने टूट जाते थे. 2024 में भारतीय टीम के लिए डेब्यू करने वाले हर्षित ने हाल ही में अपने शुरुआती वर्षों की चुनौतियों और कठिनाइयों के बारे में खुलकर बात की.
MensXP के साथ बातचीत में हर्षित ने बताया कि चयन न होने का दर्द उन्हें अंदर से पूरी तरह तोड़ देता था. उन्होंने साझा किया कि वह ट्रायल्स में जाते, लेकिन उनका नाम चयन सूची में नहीं आता था. “वापस आकर हर दिन अपने पापा के सामने रोता था,” उन्होंने कहा. लगभग दस वर्षों तक यही स्थिति चलती रही, जब क्रिकेट में कोई सफलता नहीं मिली. कई बार ऐसा लगा कि अब खेल छोड़ देना ही बेहतर होगा, लेकिन उनके पिता ने उन्हें कभी हार मानने नहीं दी.
प्रारंभिक संघर्ष और पिता का समर्थन
आज हर्षित राणा किसी भी नाकामी से डरते नहीं. आलोचना या सोशल मीडिया ट्रोलिंग उन्हें प्रभावित नहीं कर पाती. उन्होंने माना कि शुरुआती संघर्ष ने उन्हें मानसिक रूप से अत्यंत मजबूत बनाया. उन्होंने कहा, “अब मुझे पता है कि असफलता को कैसे संभालना है. मैंने वो दौर देखा है जब कुछ भी मेरे पक्ष में नहीं था. अब जो भी सामने आए, मैं उसका सामना कर सकता हूं.”
न्यूजीलैंड के खिलाफ बड़ी उपलब्धि
हाल ही में हर्षित राणा ने न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज के अंतिम मैच में शानदार प्रदर्शन किया. इंदौर में खेले गए इस मुकाबले में उन्होंने तीन महत्वपूर्ण विकेट लिए. इस उपलब्धि के साथ हर्षित वह तेज गेंदबाज बन गए हैं जिन्होंने शुरुआती 14 वनडे पारियों में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले तीसरे भारतीय गेंदबाज का रिकॉर्ड बनाया.
14 वनडे पारियों में हर्षित के नाम 26 विकेट दर्ज हो चुके हैं. केवल अजीत अगरकर (32 विकेट) और इरफान पठान (27 विकेट) ही उनसे आगे हैं. इसके अलावा, हर्षित ने प्रसिद्ध गेंदबाजों जैसे कृष्णा, रविचंद्रन अश्विन और जसप्रीत बुमराह को भी पीछे छोड़ दिया है.
विराट कोहली और रोहित शर्मा के साथ नेट्स का अनुभव
हर्षित ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि नेट्स में विराट कोहली और रोहित शर्मा उनके लिए हमेशा चुनौती बने रहते हैं. उन्होंने कहा, “विराट और रोहित जब नेट्स में बल्लेबाजी करते हैं, तो हल्की गेंदबाजी की कोई गुंजाइश नहीं होती. वे मुझे चुनौती देते हैं और तब मैं भी अपनी पूरी ताकत से गेंदबाजी करता हूं.” यह अनुभव हर्षित के लिए तकनीकी और मानसिक दोनों स्तर पर सीखने का अवसर रहा है.
पिता का सपना और बेटे की सफलता
आज हर्षित राणा भारत की चैंपियंस ट्रॉफी और एशिया कप जीतने वाली टीम का हिस्सा रह चुके हैं और उन्हें टी20 विश्व कप 2026 की भारतीय टीम में भी शामिल किया गया है. उनकी सफलता केवल उनके प्रयास की ही नहीं, बल्कि उनके पिता के निरंतर समर्थन और विश्वास का परिणाम भी है. हर बार जब हर्षित नाकाम होते, उनके पिता उनके आंसू पोंछते और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते रहे.
हर्षित राणा की कहानी यह संदेश देती है कि कठिन संघर्ष, धैर्य और परिवार का समर्थन किसी भी खिलाड़ी को महानता तक पहुंचा सकता है. यह सिर्फ क्रिकेट की नहीं, बल्कि जीवन की प्रेरक कहानी है.
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