नई दिल्ली: भारतीय सेना अपनी ड्रोन क्षमता को लगातार मजबूत कर रही है. इसी कड़ी में सेना ने 225 FPV (First-Person View) ड्रोन की खरीद के लिए एयरोड्रोन रोबोटिक्स प्राइवेट लिमिटेड को ऑर्डर दिया है. यह खरीद सीधे तौर पर फील्ड जरूरतों और वास्तविक ऑपरेशनल परिस्थितियों में तकनीक की उपयोगिता से जुड़ी है. इन ड्रोन का कठोर परीक्षण किया गया, जिसमें 17,500 फीट तक की ऊंचाई पर भी इनकी क्षमता परखी गई. ट्रायल के दौरान उड़ान, रफ्तार, सटीकता और अलग-अलग ऑपरेशनल मानकों पर प्रदर्शन का आकलन किया गया.
युद्ध के मैदान में ड्रोन की बढ़ती भूमिका
आधुनिक युद्ध में छोटे और FPV ड्रोन तेजी से महत्वपूर्ण हो रहे हैं. इनका इस्तेमाल निगरानी से लेकर लक्ष्य पर सटीक हमला करने और दुर्गम इलाकों में ऑपरेशन को आसान बनाने के लिए किया जा सकता है. एयरोड्रोन रोबोटिक्स के लिए सेना का यह ऑर्डर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कंपनी के साथ जुड़ाव अब केवल ट्रायल और डेमो तक सीमित नहीं रहा. कंपनी मिलिट्री ड्रोन के साथ ऑपरेटर ट्रेनिंग, मेंटेनेंस और तकनीकी सहायता जैसी सेवाएं भी उपलब्ध कराती है.
जरूरत के हिसाब से बदले जा सकते हैं सिस्टम
कंपनी के अनुसार, उसके मिलिट्री ड्रोन में इन-हाउस विकसित सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जाता है. इससे अलग-अलग ऑपरेशनल जरूरतों के मुताबिक सिस्टम में बदलाव करना आसान होता है. 225 ड्रोन की खरीद इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि यह हाई-एल्टीट्यूड में सफल परीक्षण के बाद हुई है. इससे संकेत मिलता है कि भारतीय सेना कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में स्वदेशी ड्रोन तकनीक की उपयोगिता बढ़ाने पर जोर दे रही है.
‘ईगल इन द आर्म’ से बढ़ी ड्रोन क्षमता
भारतीय सेना ने 2025 से FPV ड्रोन और अन्य मानवरहित प्रणालियों पर अपना फोकस बढ़ाया है. रूस-यूक्रेन संघर्ष और भारत-पाकिस्तान संघर्ष से सामने आए युद्ध के नए तौर-तरीकों ने भी ड्रोन की उपयोगिता को रेखांकित किया है. सेना अब ड्रोन क्षमताओं को केवल उच्च स्तर के कमांड और मुख्यालयों तक सीमित रखने के बजाय जमीनी स्तर पर भी मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है. इसी रणनीति को ‘ईगल इन द आर्म’ के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है.
बटालियन स्तर पर तैयार हो रही ड्रोन ताकत
भारतीय सेना की करीब 400 इन्फैंट्री बटालियनों में ड्रोन ऑपरेशन के लिए समर्पित ‘अशनी’ प्लाटून तैयार किए गए हैं. इनमें लगभग 20 से 25 विशेष रूप से प्रशिक्षित सैनिक शामिल होते हैं, जिन्हें अलग-अलग तरह के ड्रोन संचालित करने की ट्रेनिंग दी गई है. ये प्लाटून FPV अटैक ड्रोन, लॉइटरिंग म्यूनिशन और लॉजिस्टिक्स ड्रोन जैसे सिस्टम के इस्तेमाल में सक्षम हैं. ऐसे में 225 नए FPV ड्रोन की खरीद को सेना की जमीनी ड्रोन क्षमता को और विस्तार देने वाले कदम के तौर पर देखा जा रहा है.
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