भारतीय वायुसेना मिलेगा 'ASTRA MK-3' मिसाइल, 5500 KMPH की रफ्तार से 350 KM तक मचाएगा तबाही, जानें ताकत

भारत की रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित ASTRA श्रृंखला की अगली कड़ी, ASTRA MK-3 जिसे आधिकारिक रूप से ‘गांडीव’ नाम से जाना जा रहा है, भारतीय वायु शक्ति के लिए एक महत्वपूर्ण उन्नयन साबित होने जा रही है.

Indian Air Force will get Astra MK-3 Air-to-Air missile
प्रतिकात्मक तस्वीर/ ANI

भारत की रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित ASTRA श्रृंखला की अगली कड़ी, ASTRA MK-3 जिसे आधिकारिक रूप से ‘गांडीव’ नाम से जाना जा रहा है, भारतीय वायु शक्ति के लिए एक महत्वपूर्ण उन्नयन साबित होने जा रही है. यह मिसाइल बियॉन्ड-विज़ुअल-रेंज (BVRAAM) श्रेणी में आती है और इसे लंबी दूरी पर हवाई लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से नष्ट करने के उद्देश्य से डिजाइन किया गया है. सरकार और DRDO के रोडमैप के अनुसार इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन 2028 से शुरू होने और शुरुआती 2030 के दशक में भारतीय वायुसेना-दल में शामिल किए जाने की योजना है.

गांडीव की मारक क्षमता उसे लंबी-दूरी वाले एयर-टू-एयर मिसाइलों की ऊपरी श्रेणी में रखती है. उच्च ऊंचाई पर इसकी अधिकतम लक्ष्य मारक सीमा लगभग 340–350 किलोमीटर बताई जा रही है; कम ऊंचाई (लगभग 8 किलोमीटर) पर यह सीमा लगभग 190 किलोमीटर तक आ जाती है. इन आंकड़ों के कारण यह मिसाइल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लंबी-दूरी के लिए विकसित मिसाइलों के समकक्ष मानी जा रही है.

5,500 किमी/घंटा की तेज़ रफ्तार

गांडीव में Solid Fuel Ducted Ramjet (SFDR) प्रकार का इंजन उपयोग किया गया है, जो मिसाइल को लंबे समय तक तेज गति बनाए रखने और उच्च संक्रमणिक प्रदर्शन (sustained high-speed cruise) के लिए सक्षम बनाता है. DRDO की तकनीकी व्याख्या के अनुसार यह प्रणोदन प्रणाली मिसाइल को Mach 4.5 के आसपास की गति तक ले जाने में सक्षम है, यानि लगभग 5,500 किमी/घंटा के स्तर की सुव्यवस्थित तेज़ रफ्तार. थ्रॉटलेबल रैमजेट होने के कारण उड़ान के दौरान थ्रस्ट को नियंत्रित करना संभव होता है, जो नो-एस्केप-ज़ोन (No-Escape Zone) को बड़ा करता है और लक्ष्य के बचने की संभावना कम कर देता है.

लक्ष्य-चयन और सीकर तकनीक

गांडीव को किसी भी ऊँचाई से लॉन्च किया जा सकता है, समुद्र तल से लेकर 20 किलोमीटर की ऊँचाई तक और यह लगभग 20 डिग्री एंगल-ऑफ-अटैक के साथ उच्च मैन्युवरेबिलिटी दिखा सकती है. मिसाइल के संवेदी-भाग में आधुनिक AESA (Active Electronically Scanned Array) सीकर का उपयोग बताया जा रहा है; इसके साथ ही रेडियो-फ्रीक्वेंसी और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल क्षमता में सुधार के लिए GaAs से GaN तकनीक की ओर प्रगति का जिक्र होता है. यह प्रकार की सीकर टेक्नोलॉजी जामिंग प्रतिरोधकता (ECCM) और तेज-लॉक की बेहतर संभावना देती है, जिससे जामिंग या इलेक्ट्रॉनिक बाधाओं के बावजूद लक्ष्य पर स्थिर पकड़ बनाई जा सकती है.

ASTRA MK-3 का प्राथमिक उद्देश्य दुश्मन के प्रमुख हवाई प्लेटफार्मों जैसे फाइटर-जेट, बॉम्बर, एयर-रीफ़्यूलर, AWACS और एयर-कमांड प्लेटफॉर्म को लंबी दूरी से प्रभावी तरीके से निष्क्रिय करना है. उच्च-श्रेणी की ट्रैकिंग-और-हिट क्षमता इसे स्टील्थ-तारगेट्स के खिलाफ भी प्रयोगयोग्य बनाती है और इसी कारण इसे भविष्य के उच्च-प्रदर्शन प्लेटफार्मों पर तैनाती के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

संरचना, आयाम और वजन

विकासकर्ता विवरण के अनुसार ASTRA MK-3 का तराजू-आधारित वजन लगभग 160 किलोग्राम है; लंबाई औसतन 3.8 मीटर और व्यास करीब 178 मिलीमीटर बताया जाता है. यह आकार और द्रव्यमान उसे आधुनिक फाइटर-जेटों पर कैरी करने के लिहाज़ से उपयुक्त बनाता है, साथ ही लंबी-रेंज मिशनों के लिए आवश्यक प्रणोदन और नियंत्रक प्रणालियों के स्थान-आवश्यकताओं का संतुलन भी सुनिश्चित करता है.

इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और जाम-रोधी क्षमताएँ

गांडीव में ECCM (Electronic Counter-Counter Measures) क्षमताएँ जोड़ी गई हैं, जिससे यह शत्रु के जामिंग और इलेक्ट्रॉनिक हस्तक्षेप के प्रयासों के बावजूद लक्ष्य खोज और ट्रैकिंग को बनाए रख सके. AESA-सीकर, सॉफ्टवेयर-आधारित फ़िल्टरिंग और प्रतिक्रियाशील चैनल-प्रबंधन जैसी तकनीकों के मेल से मिसाइल को जामिंग-रोधी और उत्तरदायी बनाया गया है. ये सुविधाएँ विशेषकर तब उपयोगी होती हैं जब लक्ष्य पर कई परतों वाले इलेक्ट्रॉनिक रक्षा तंत्र मौज़ूद हों, जैसे कि आधुनिक एयर कमांड प्लेटफार्म और बड़े-कुशलता वाले रडार-समर्थित विमानों में देखा जाता है.

परीक्षण, एकीकरण और तैनाती

बताया गया है कि ASTRA MK-3 ने विभिन्न प्रकार के ग्राउंड-टेस्ट, सुपरसोनिक फ्लाइट-वैलिडेशन, लाइव-फायर परीक्षण और व्यवहारिक उड़ान-स्थितियों में अनुक्रमिक परीक्षण पारित किए हैं. कुछ परीक्षणों में कैप्टिव कैरिज (जहाँ मिसाइल को विमान पर ले जाया जाता है लेकिन छोड़ा नहीं जाता) और सीमित उड़ान-परिस्थितियों में व्यवहारिक सत्यापन शामिल रहे हैं. वर्तमान में Su-30MKI पर कैप्टिव-कैरिज परीक्षण चल रहे हैं और आगे के इंटीग्रेशन के लिए Rafale तथा देश के विकासाधीन 5वीं-पीढ़ी योजनाओं जैसे AMCA प्लेटफॉर्म पर भी एकीकरण के प्रयासों की योजना बताई जा रही है.

नियोजित समय-रेखा के अनुसार बड़े पैमाने पर उत्पादन 2028 के आसपास शुरू होने की संभावनाएँ हैं, जबकि परिचालन तैनाती प्रारंभिक चरण 2030-के दशक के आरम्भ में प्रस्तावित है. इन तिथियों का आश्रय विकास, परीक्षण सफलताओं और परिचालन एकीकरण पर निर्भर करेगा.

रणनीतिक और परिचालन प्रभाव

ASTRA MK-3 के शामिल होने से भारतीय वायु-बल को लंबी दूरी पर दबदबा स्थापित करने की नई क्षमता मिलेगी. लंबी-रेंज BVRAAM होने के कारण यह दुश्मन के अहम हवाई संसाधनों को रन-वे-से पहले ही या सुरक्षित ज़ोन से अधिक दूर पर नष्ट करने की क्षमता दे सकती है. कुछ प्रमुख प्रभाव इस प्रकार हो सकते हैं:

सीनियर-लिंक दबाव कम होना: दुश्मन के एयर-कमांड और एयर-रिकनेक्शन प्लेटफार्मों को सुरक्षित दूरी से निशाना बनाने की क्षमता विरोधी मिशनों के समन्वय को बाधित कर सकती है.

फोर्स-प्रोटेक्शन में वृद्धि: एयर-रीफ़्यूलर और AWACS जैसे संवेदनशील बहुउद्देश्यीय विमानों की सुरक्षा बेहतर होगी, क्योंकि दुश्मन उन्हें सुरक्षित रेंज में आने से पहले ही खतरनाक स्थिति में पाया जा सकेगा.

डिट्रैक्ट और डिटेरेंस प्रभाव: लंबी-रेंज हिट-क्षमता विरोधी योजना-निर्माताओं पर मनोवैज्ञानिक और रणनीतिक दबाव डालती है; यह संभावित हमलों को करने से पहले कई सोचने पर मजबूर कर सकती है.

स्टील्थ-विरोधी क्षमता: उच्च गति और उन्नत सीकर की वजह से स्टील्थ-विशेष विमानों के खिलाफ भी यह प्रणाली उपयोगी हो सकती है, हालाँकि वास्तविक प्रभाव प्लेटफॉर्म-आधारित रडार-प्रोफ़ाइल और सीकर क्षमता पर निर्भर करेगा.

तुलना और वैश्विक संदर्भ

ASTRA MK-3 को लंबी-दूरी एयर-टू-एयर मिसाइलों की श्रेणी में देखा जा रहा है, जो चीन और अन्य देशों के विकसित किए गए लंबे-रेंज A2A सिस्टमों के समान रणनीतिक भूमिका निभा सकती है. वैश्विक स्तर पर लंबी-रेंज मिसाइलें हवाई श्रेष्ठता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और ASTRA MK-3 के जुड़ने से भारत को क्षेत्रीय वायु-क्षेत्र में उच्च प्रभाव बनाए रखने में मदद मिलेगी.

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