Drone Hunters: ऑपरेशन सिंदूर और ईरान-अमेरिका संघर्ष से सबक लेते हुए भारतीय वायुसेना अब ड्रोन खतरों से निपटने की तैयारी तेज कर रही है. वायुसेना अपने अटैक हेलीकॉप्टरों को ऐसे सिस्टम से लैस कर रही है, जिससे वे दुश्मन के ड्रोन को हवा में ही मार गिरा सकें.
पहले इन हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल एलओसी और एलएसी जैसे इलाकों में दुश्मन की चौकियों पर हमला करने के लिए किया जाता था. आतंकवाद विरोधी अभियानों में भी इनकी भूमिका रही है. अब इन्हें ड्रोन के खिलाफ इस्तेमाल करने की तैयारी की जा रही है.
क्यों बढ़ी ड्रोन से खतरे की चिंता?
अटैक हेलीकॉप्टरों में अनगाइडेड रॉकेट लगे होते हैं, जो बहुत तेज गति से फायर करते हैं. पिछले कई सालों में मिसाइल तकनीक के कारण इन रॉकेटों का इस्तेमाल कम हो गया था, लेकिन ड्रोन युद्ध ने हालात बदल दिए हैं.
रूस-यूक्रेन युद्ध में ड्रोन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हुआ है. वहीं पश्चिम एशिया में भी ड्रोन हमलों ने यह दिखाया कि छोटे और सस्ते ड्रोन भी बड़े सैन्य सिस्टम के लिए चुनौती बन सकते हैं.
ऑपरेशन सिंदूर में भी हुआ था ड्रोन हमला
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने भारत के कई सीमावर्ती इलाकों में लगातार ड्रोन भेजे थे. जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान और गुजरात तक ड्रोन गतिविधियां देखी गई थीं. उस समय भारतीय सुरक्षा बलों ने एंटी-एयरक्राफ्ट गन और मिसाइल सिस्टम का इस्तेमाल किया था. लेकिन छोटे ड्रोन को गिराने के लिए महंगी मिसाइल का इस्तेमाल करना हमेशा व्यावहारिक नहीं माना जाता.
हेलीकॉप्टरों में किए गए नए बदलाव
वायुसेना ने अपने अटैक हेलीकॉप्टरों के रॉकेट सिस्टम में बदलाव शुरू कर दिया है. अब इन रॉकेटों में लेजर गाइडेड किट लगाई जा रही है, जिससे वे ज्यादा सटीक निशाना लगा सकें.
रॉकेट के वॉरहेड में भी बदलाव किया गया है ताकि वह खास तौर पर ड्रोन को निशाना बना सके. इनकी मारक क्षमता लगभग 10 किलोमीटर तक बताई जा रही है. यानी हेलीकॉप्टर दूर से ही ड्रोन को हवा में मार गिरा सकता है.
अमेरिका ने भी अपनाई ऐसी तकनीक
हाल के महीनों में एक वीडियो सामने आया था, जिसमें एक अटैक हेलीकॉप्टर ने उड़ते हुए ड्रोन को निशाना बनाया. माना जा रहा है कि अमेरिका ने भी अपने कुछ अटैक हेलीकॉप्टरों को ड्रोन रोधी तकनीक से लैस किया है. भारतीय वायुसेना भी इसी दिशा में अपनी क्षमता बढ़ा रही है ताकि भविष्य में ड्रोन हमलों का तेजी से जवाब दिया जा सके.
क्या है रोटर-क्लैप एक्सरसाइज?
भारतीय वायुसेना ने हाल ही में राजस्थान के पोखरण फायरिंग रेंज में रोटर-क्लैप नाम का विशेष अभ्यास किया. इसमें केवल हेलीकॉप्टर यूनिट्स ने हिस्सा लिया. इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य काउंटर-UAS (Unmanned Aerial System) यानी ड्रोन खतरों से निपटने की तैयारी करना था.
इसमें छोटे क्वाडकॉप्टर ड्रोन से लेकर आत्मघाती ड्रोन तक को रोकने की ट्रेनिंग दी गई. यह पहली बार था जब वायुसेना ने हेलीकॉप्टरों पर केंद्रित इस तरह के अभ्यास की जानकारी सार्वजनिक की. तस्वीरें और वीडियो भी साझा किए गए.
भविष्य की तैयारी
ड्रोन युद्ध तेजी से बदलती सैन्य चुनौती बन चुका है. इसी वजह से भारतीय वायुसेना अब हेलीकॉप्टरों, रॉकेट सिस्टम और नई तकनीक के जरिए अपनी काउंटर-ड्रोन क्षमता मजबूत कर रही है. आने वाले समय में यह तकनीक सीमाओं की सुरक्षा और हवाई रक्षा में अहम भूमिका निभा सकती है.
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