Clouds Thunder During Monsoon: मानसून का मौसम जितना सुहावना होता है, उतना ही खतरनाक भी साबित हो सकता है. तेज बारिश के साथ आसमान में चमकने वाली बिजली और गड़गड़ाहट हर साल सैकड़ों लोगों की जान ले लेती है. कई बार लोग इसे केवल प्राकृतिक घटना मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन इसके पीछे छिपा विज्ञान बेहद रोचक और साथ ही डराने वाला है. आकाशीय बिजली सिर्फ एक चमक नहीं, बल्कि करोड़ों वोल्ट की ऊर्जा से भरा शक्तिशाली विद्युत विसर्जन है, जो कुछ ही सेकंड में भारी तबाही मचा सकता है.
बेंजामिन फ्रेंकलिन ने बताया बिजली का वैज्ञानिक रहस्य
सदियों पहले लोग आकाशीय बिजली को ईश्वर का प्रकोप या दैवीय शक्ति मानते थे. इस भ्रम को सबसे पहले वर्ष 1752 में अमेरिकी वैज्ञानिक बेंजामिन फ्रेंकलिन ने अपने प्रसिद्ध प्रयोगों के माध्यम से दूर किया. उन्होंने साबित किया कि आसमान में चमकने वाली बिजली किसी अलौकिक शक्ति का परिणाम नहीं, बल्कि बादलों में बनने वाला विशाल इलेक्ट्रिक डिस्चार्ज है. फ्रेंकलिन की इस खोज ने मौसम विज्ञान और विद्युत विज्ञान के क्षेत्र में एक नई दिशा दी.
कैसे तैयार होती है करोड़ों वोल्ट की बिजली?
आकाशीय बिजली बनने की प्रक्रिया बादलों के भीतर मौजूद पानी की सूक्ष्म बूंदों और बर्फ के कणों से शुरू होती है. तेज हवाओं के कारण जब ये कण लगातार एक-दूसरे से टकराते और रगड़ खाते हैं, तो उनमें विद्युत आवेश पैदा होने लगता है. हल्के पॉजिटिव चार्ज वाले कण बादलों के ऊपरी हिस्से में जमा हो जाते हैं, जबकि भारी नेगेटिव चार्ज वाले कण नीचे इकट्ठा हो जाते हैं. जब इन विपरीत आवेशों के बीच अंतर बहुत अधिक बढ़ जाता है, तब अचानक एक शक्तिशाली विद्युत धारा प्रवाहित होती है और यही आकाशीय बिजली के रूप में दिखाई देती है.
गरजते बादलों के पीछे छिपा है यह वैज्ञानिक कारण
बिजली चमकने के साथ ही बादलों की तेज गड़गड़ाहट सुनाई देती है. दरअसल, जब बिजली का अत्यधिक शक्तिशाली प्रवाह हवा से होकर गुजरता है, तो आसपास की हवा कुछ ही क्षणों में हजारों डिग्री तक गर्म हो जाती है. इस कारण हवा तेजी से फैलती है और फिर अचानक सिकुड़ती है. इसी तेज विस्तार और संकुचन से पैदा होने वाली दबाव तरंगें गड़गड़ाहट की आवाज बनाती हैं, जिसे हम थंडर के नाम से जानते हैं.
पहले चमक और बाद में क्यों सुनाई देती है आवाज?
अक्सर लोग सोचते हैं कि बिजली पहले चमकती है और फिर गरजती है, जबकि वास्तविकता यह है कि दोनों घटनाएं एक ही समय पर होती हैं. फर्क सिर्फ उनकी गति का है. प्रकाश की गति लगभग 3 लाख किलोमीटर प्रति सेकंड होती है, इसलिए बिजली की चमक हमारी आंखों तक तुरंत पहुंच जाती है. दूसरी ओर, हवा में ध्वनि की गति लगभग 332 मीटर प्रति सेकंड होती है, इसलिए गड़गड़ाहट की आवाज कुछ सेकंड बाद सुनाई देती है. यही कारण है कि हमें पहले चमक दिखाई देती है और उसके बाद गरज सुनाई देती है.
आकाशीय बिजली की ताकत और तापमान
आकाशीय बिजली की शक्ति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें लगभग 10 करोड़ वोल्ट तक का विद्युत विभव हो सकता है, जो सामान्य घरेलू बिजली से लाखों गुना अधिक होता है. यही नहीं, जब यह धरती की ओर गिरती है तो इसके आसपास का तापमान लगभग 30,000 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, जो सूर्य की सतह के तापमान से भी कई गुना अधिक है. यही वजह है कि इसके संपर्क में आने वाला पेड़, इमारत या इंसान पलभर में गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो सकता है.
मानसून में सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव
विशेषज्ञों का कहना है कि गरज-चमक के दौरान खुले मैदान, ऊंचे पेड़ों, बिजली के खंभों और जलाशयों के आसपास जाने से बचना चाहिए. यदि आसमान में बिजली चमक रही हो, तो सुरक्षित इमारत या वाहन के भीतर शरण लेना सबसे बेहतर विकल्प माना जाता है. मौसम विभाग की चेतावनियों पर ध्यान देना और खराब मौसम के दौरान अनावश्यक रूप से बाहर न निकलना आकाशीय बिजली जैसी जानलेवा प्राकृतिक घटनाओं से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है.
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