“हर चीज बन रही हथियार, भारत बनेगा भरोसे का केंद्र”, अरावली समिट में बोले विदेश मंत्री जयशंकर

S  Jaishankar Latest News: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में आयोजित ‘अरावली समिट’ में विदेश मंत्री एस. जयशंकर का भाषण सिर्फ एक संबोधन नहीं था, यह आने वाले दशकों की भारत की रणनीतिक दिशा और उसकी वैश्विक भूमिका का रोडमैप था.

India will become a center of trust Foreign Minister Jaishankar in the Aravali Summit
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S Jaishankar Latest News: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में आयोजित ‘अरावली समिट’ में विदेश मंत्री एस. जयशंकर का भाषण सिर्फ एक संबोधन नहीं था, यह आने वाले दशकों की भारत की रणनीतिक दिशा और उसकी वैश्विक भूमिका का रोडमैप था.

उन्होंने स्पष्ट किया कि 2047 की ओर बढ़ते भारत को अपने लिए स्वतंत्र सोच, शब्दावली और दृष्टिकोण गढ़ना होगा, और दुनिया में हो रहे सत्ता समीकरण के बदलावों को भांपते हुए अपनी रणनीति को समय से पहले मज़बूत करना होगा.

“हर चीज को हथियार बनाया जा रहा है” 

जयशंकर ने दुनिया में ‘हथियारीकरण’ (weaponisation) के बढ़ते चलन पर गहरी चिंता जताई. उनका इशारा स्पष्ट था, अब केवल युद्ध नहीं, बल्कि डेटा, व्यापार, तकनीक, सप्लाई चेन जैसी तमाम चीज़ों को भी भूराजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है. उन्होंने कहा, “यह वह समय है जब राष्ट्रों को सिर्फ रक्षा नहीं, बल्कि रणनीतिक लचीलापन और कूटनीतिक चतुराई भी विकसित करनी होगी.”

भारत बने ‘गो-टू’ राष्ट्र, जयशंकर का स्पष्ट विज़न

अपने संबोधन में जयशंकर ने एक ठोस लक्ष्य रखा, भारत को इस पूरे उपमहाद्वीप में किसी भी संकट की स्थिति में पहला और भरोसेमंद विकल्प बनना चाहिए. उन्होंने कहा, “अगर श्रीलंका को सहायता चाहिए, नेपाल में राजनीतिक संकट हो, या बांग्लादेश में स्थायित्व की जरूरत हो, भारत को ही पहला दरवाजा खटखटाया जाना चाहिए.” यह बयान ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति की फिर से पुष्टि भी है, और भारत की विस्तारित जिम्मेदारी का संकेत भी.

सहयोग भी, सीमाएं भी

विदेश मंत्री ने यह भी साफ किया कि भारत किसी भी देश के साथ व्यापारिक समझौते करेगा, लेकिन अपने मूल हितों की कीमत पर नहीं. उन्होंने कृषि और डेयरी सेक्टर को भारत की 'रेड लाइन' बताते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में विदेशी उत्पादों की बिना शर्त एंट्री स्वीकार नहीं की जा सकती. यह सीधा संदेश उन वैश्विक शक्तियों को है जो भारत से एकतरफा फायदे की उम्मीद रखते हैं.

“विभाजन से जो खोया, अब वो वापस लेना है”

जयशंकर ने इतिहास का भी उल्लेख किया और कहा कि भारत को 1947 के विभाजन से जो रणनीतिक घाटा हुआ, अब वह भरना होगा. यह एक भूराजनीतिक आह्वान था, दुनिया में अपनी खोई हुई भूमिका और प्रभाव को फिर से हासिल करने का संकल्प.

2047 की यात्रा के लिए भारत की सबसे बड़ी ताकतें

2047 के लिए भारत की रणनीति की बात करते हुए जयशंकर ने कहा दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी और एक विशाल घरेलिक बाजार हमारी है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि डिजिटल दुनिया में भारत की तेजी से बढ़ती ताकत है.  उन्होंने कहा, “2047 के भारत को अपनी कहानी खुद लिखनी होगी, अपने शब्दों में, अपने संदर्भों के साथ.”

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