Diwali Crackers In Delhi: दिल्ली में दिवाली आते ही एक बार फिर "प्रदूषण बनाम परंपरा" की बहस तेज हो गई है. इस बार राजधानी की कमान संभाल रही मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक ऐसा फैसला लिया है, जो न सिर्फ धार्मिक भावनाओं को सम्मान देता है, बल्कि पर्यावरण संतुलन को भी ध्यान में रखता है.
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घोषणा की है कि दिल्ली सरकार सुप्रीम कोर्ट से 'ग्रीन पटाखों' के सीमित उपयोग की इजाजत मांगेगी. उन्होंने कहा, "दीपावली भारतीय संस्कृति का सबसे पवित्र पर्व है. हमारी सरकार करोड़ों नागरिकों की आस्था का सम्मान करते हुए, पर्यावरण और कानून दोनों के बीच संतुलन बनाना चाहती है."
क्या होते हैं 'ग्रीन पटाखे'?
रेखा गुप्ता के अनुसार, सरकार केवल उन्हीं पटाखों की अनुमति मांगेगी, जो वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR-NEERI) द्वारा प्रमाणित हों. ये पटाखे पारंपरिक पटाखों की तुलना में 30–40% कम प्रदूषण फैलाते हैं, कम धुआं और शोर करते हैं और पर्यावरण के लिए अपेक्षाकृत सुरक्षित विकल्प माने जाते हैं
क्यों जरूरी हुआ ये कदम?
अक्टूबर से नवंबर के बीच हर साल दिल्ली की हवा गंभीर स्तर तक प्रदूषित हो जाती है. इसके लिए पराली जलाना, वाहनों का धुआं और दिवाली पर चलने वाले पटाखे बड़ी वजह माने जाते हैं. हालांकि सुप्रीम कोर्ट पहले भी दिल्ली में पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा चुका है, लेकिन इस बार सरकार संवेदनशील संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है, परंपरा को जिंदा रखते हुए पर्यावरण सुरक्षा सुनिश्चित करना.
जनता की भागीदारी भी जरूरी
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि सरकार इस पहल को जन-आंदोलन बनाना चाहती है. इसके लिए स्कूलों, आरडब्ल्यूए (RWA) और बाजार संघों को शामिल कर पर्यावरण-संवेदनशील उत्सव मनाने के लिए जागरूकता अभियान चलाया जाएगा.
सुप्रीम कोर्ट के सामने होगा सरकार का पक्ष
रेखा गुप्ता ने जानकारी दी कि सरकार जल्द ही सुप्रीम कोर्ट में लिखित याचिका दाखिल करेगी और सीमित अवधि में, प्रमाणित ग्रीन पटाखों की अनुमति मांगेगी. उन्होंने उम्मीद जताई कि न्यायालय इस विषय पर जनभावनाओं और पर्यावरणीय ज़रूरतों दोनों को ध्यान में रखेगा.
यह भी पढ़ें- ChatGPT से भूलकर भी न पूछें ये सवाल, वरना आ सकती है बड़ी मुसीबत, जानें पूरी जानकारी