India-US Trade Deal: भारत-अमेरिका की ट्रेड डील से किन देशों को होगा नुकसान, किसे लगेगा 440 वोल्ट का झटका?

India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच हुई नई ट्रेड डील ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार जगत में हलचल मचा दी है. वर्षों से जिस समझौते का इंतजार किया जा रहा था, वह अब हकीकत बन चुका है.

India–US Trade Deal Which Countries Will Be Hit the Hardest
Image Source: ANI/ File

India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच हुई नई ट्रेड डील ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार जगत में हलचल मचा दी है. वर्षों से जिस समझौते का इंतजार किया जा रहा था, वह अब हकीकत बन चुका है. अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों पर टैरिफ घटकर 18 प्रतिशत रह जाना सिर्फ भारत के लिए राहत नहीं है, बल्कि यह उन देशों के लिए चेतावनी भी है, जो अब तक अमेरिका को बड़ा एक्सपोर्ट हब मानकर चल रहे थे. इस डील ने ग्लोबल सप्लाई चेन के समीकरण बदल दिए हैं और कई देशों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति कमजोर होती दिख रही है.

चीन की चुनौती और बढ़ी

इस ट्रेड डील से सबसे बड़ा झटका चीन को लगने की आशंका है. अमेरिका में चीनी उत्पादों पर अब भी 34 से 37 प्रतिशत तक का ऊंचा टैरिफ लागू है. ऐसे में जब भारत सिर्फ 18 प्रतिशत टैरिफ के साथ अमेरिकी बाजार में उतरेगा, तो इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो पार्ट्स, केमिकल्स और मशीनरी जैसे सेक्टर में चीनी सामान कीमत के मोर्चे पर पिछड़ सकते हैं. माना जा रहा है कि अमेरिकी कंपनियां सप्लाई चेन को चीन से हटाकर भारत की ओर शिफ्ट करने पर तेजी से विचार कर सकती हैं.

बांग्लादेश के गारमेंट सेक्टर पर दबाव

बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा टेक्सटाइल और रेडीमेड गारमेंट्स पर टिका है. अमेरिका में बांग्लादेशी गारमेंट्स पर करीब 20 प्रतिशत टैरिफ लगता है, जो अब भारत से ज्यादा हो गया है. फैशन और परिधान उद्योग में मामूली कीमत का अंतर भी बड़े ऑर्डर को प्रभावित करता है. ऐसे में अमेरिकी रिटेलर बांग्लादेश की बजाय भारत से खरीदारी को तरजीह दे सकते हैं, जिससे ढाका की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.

वियतनाम की बढ़त को लग सकता है ब्रेक

पिछले कुछ वर्षों में वियतनाम अमेरिका के लिए चीन के विकल्प के तौर पर उभरा था. हालांकि वहां से आने वाले उत्पादों पर भी करीब 20 प्रतिशत टैरिफ लगता है. भारत-अमेरिका डील के बाद इलेक्ट्रॉनिक्स, फुटवियर और फर्नीचर जैसे क्षेत्रों में वियतनाम की प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त कमजोर पड़ सकती है और भारत वहां अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा सकता है.

पाकिस्तान को क्षेत्रीय स्तर पर नुकसान

पाकिस्तान को अमेरिकी बाजार में अपने उत्पादों पर लगभग 19 प्रतिशत टैरिफ देना पड़ता है. यह अंतर भले ही आंकड़ों में छोटा दिखे, लेकिन व्यापारिक प्रतिस्पर्धा में यह भारत को साफ बढ़त दिलाता है. टेक्सटाइल, कृषि उत्पाद और हल्के इंजीनियरिंग सामानों में भारत की स्थिति और मजबूत हो सकती है, जिससे पाकिस्तान के लिए अमेरिका में टिके रहना और मुश्किल हो जाएगा.

दक्षिण-पूर्व एशिया पर भी असर

थाईलैंड, इंडोनेशिया, मलेशिया और कंबोडिया जैसे देशों को अमेरिका में 19 से 20 प्रतिशत तक टैरिफ का सामना करना पड़ता है. इंजीनियरिंग गुड्स, सीफूड, इलेक्ट्रॉनिक्स और कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के मामले में अब उन्हें भारत से कड़ी प्रतिस्पर्धा झेलनी पड़ सकती है. कम टैरिफ और बड़े पैमाने पर उत्पादन भारत को इन बाजारों में आगे ले जा सकता है.

रूस की ऊर्जा रणनीति पर प्रभाव

यह ट्रेड डील सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग तक सीमित नहीं है. रणनीतिक सहयोग के तहत भारत ने रूस से तेल आयात कम करने और अमेरिका से ऊर्जा खरीद बढ़ाने पर सहमति जताई है. इससे रूस के लिए एक अहम निर्यात बाजार सिकुड़ सकता है और वैश्विक दबाव के बीच उसके राजस्व पर असर पड़ने की संभावना है.

यूरोप और जापान की बढ़त भी हुई सीमित

यूरोपीय यूनियन, जापान और स्विट्जरलैंड जैसे देशों को अमेरिका में करीब 15 प्रतिशत टैरिफ का फायदा जरूर मिलता है, जो भारत से थोड़ा कम है. लेकिन भारत की कम उत्पादन लागत और बड़े पैमाने पर मैन्युफैक्चरिंग क्षमता उनके इस लाभ को काफी हद तक संतुलित कर देती है. खासकर कीमत को लेकर संवेदनशील सेक्टर में भारत अब कहीं ज्यादा मजबूत खिलाड़ी बनकर उभर रहा है.

ये भी पढ़ें: BLA के सामने घुटनों पर आए शहबाज-मुनीर, पाकिस्तानी रक्षा मंत्री के इस बयान ने खोल दी सुरक्षा व्यवस्था की पोल