रूस की युद्ध मशीनरी की मदद करना बंद कर दे भारत... एक बार फिर पुतिन से दोस्ती पर बौखलाए ट्रंप के करीबी नवारो

रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच भारत की ऊर्जा नीति और रक्षा सौदों को लेकर अमेरिका में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है. व्हाइट हाउस के पूर्व वरिष्ठ सलाहकार पीटर नवारो ने भारत पर एक बार फिर निशाना साधते हुए कई गंभीर आरोप लगाए हैं.

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रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच भारत की ऊर्जा नीति और रक्षा सौदों को लेकर अमेरिका में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है. व्हाइट हाउस के पूर्व वरिष्ठ सलाहकार पीटर नवारो ने भारत पर एक बार फिर निशाना साधते हुए कई गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि भारत अमेरिकी डॉलर का उपयोग करके सस्ते रूसी तेल की खरीद कर रहा है और इससे राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की "वॉर मशीन" को सीधा आर्थिक समर्थन मिल रहा है.


पीटर नवारो ने एक के बाद एक कई सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए भारत की व्यापारिक नीतियों, ऊर्जा आयात और रूस से संबंधों पर सवाल उठाए. उन्होंने लिखा, ये केवल व्यापार असंतुलन की बात नहीं है, बल्कि यह उस जीवन रेखा को तोड़ने की जरूरत है जो भारत ने पुतिन की युद्ध मशीन को दे रखी है. नवारो ने आरोप लगाया कि अमेरिका के उपभोक्ता भारतीय उत्पादों को खरीदते हैं, लेकिन भारत अमेरिका के सामान पर ऊंचे टैरिफ और गैर-शुल्कीय बाधाएं लगाकर उन्हें रोकता है. इसके साथ ही, भारत द्वारा अमेरिकी डॉलर में रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदने की प्रक्रिया को उन्होंने ‘रणनीतिक अवसरवाद’ करार दिया.

रूस से तेल आयात में भारी इजाफा

नवारो के अनुसार, रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने से पहले भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूसी तेल की हिस्सेदारी 1% से भी कम थी, लेकिन अब यह बढ़कर 30% से ऊपर पहुंच गई है. यानी करीब 15 लाख बैरल प्रति दिन. उन्होंने कहा कि यह इजाफा भारत की घरेलू मांग की वजह से नहीं, बल्कि "मुनाफाखोर लॉबी" की रणनीति का परिणाम है.  उनके अनुसार, भारत आज प्रतिदिन 10 लाख बैरल से ज्यादा रिफाइन्ड पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात करता है — जिनमें अधिकांश हिस्सा रूस से आयातित कच्चे तेल का होता है. नवारो का दावा है कि इससे होने वाली कमाई भारत के कुछ राजनीतिक रूप से जुड़े उद्योगपतियों और रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था के बीच बंट जाती है.

“भारत बना क्रेमलिन का ऑयल लॉन्डरोमैट”

नवारो ने भारत को 'ऑयल मनी लॉन्डरोमैट' की संज्ञा दी. यानी एक ऐसा केंद्र जहाँ रूस का कच्चा तेल रिफाइन होकर अन्य देशों को निर्यात किया जा रहा है, जिससे प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से रूस को लाभ हो रहा है. उन्होंने तंज कसते हुए लिखा, दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र अब क्रेमलिन के लिए कच्चे तेल की धुलाई का अड्डा बन गया है.

रक्षा सौदों पर भी आपत्ति

तेल के साथ-साथ नवारो ने भारत के रूस से हथियार खरीदने पर भी नाराज़गी जताई. उन्होंने कहा कि भारत एक तरफ रूस से हथियार ले रहा है, और दूसरी तरफ अमेरिका से अत्याधुनिक सैन्य तकनीक की मांग कर रहा है — जिसे उन्होंने “रणनीतिक मुफ्तखोरी” कहा.

एक दिन पहले रखी थी शर्त

ब्लूमबर्ग को दिए एक इंटरव्यू में पीटर नवारो ने सुझाव दिया था कि भारत से 25% अतिरिक्त शुल्क हटाना आसान है, बशर्ते भारत रूसी तेल की खरीद बंद कर दे. उनका कहना था कि अगर भारत रूस से तेल लेना बंद कर देता है, तो उसे अमेरिका से व्यापारिक छूट “अगले ही दिन” मिल सकती है.

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