नेपाल की मदद के लिए आगे आया भारत, बड़े राहत पैकेज की तैयारी, 2015 में भी निभाया था साथ

India Nepal Relations: नेपाल में भारी बाढ़ और भूस्खलन से हुई तबाही के बीच भारत अपने पड़ोसी देश की मदद के लिए बड़ा राहत पैकेज देने पर विचार कर रहा है. अभी भारत की ओर से राहत सामग्री, बचाव दल और तकनीकी विशेषज्ञ नेपाल भेजे जा रहे हैं.

India steps forward to help Nepal flood a major relief package is in the works
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India Nepal Relations: नेपाल में भारी बाढ़ और भूस्खलन से हुई तबाही के बीच भारत अपने पड़ोसी देश की मदद के लिए बड़ा राहत पैकेज देने पर विचार कर रहा है. अभी भारत की ओर से राहत सामग्री, बचाव दल और तकनीकी विशेषज्ञ नेपाल भेजे जा रहे हैं. वित्तीय मदद को लेकर अंतिम फैसला नुकसान का पूरा आकलन होने के बाद होने की संभावना है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरे से लौटने के बाद इस मुद्दे पर फैसला लिया जा सकता है. आपदा के बाद पीएम मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से फोन पर बात की थी और भारत की ओर से हर संभव मदद का भरोसा दिया था.

भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक, रविवार तक नेपाल के आपदा प्रभावित इलाकों से 149 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है. सरकार की ओर से इन लोगों के नामों की सूची भी जारी की गई है.

नेपाल पहुंची 68.5 टन राहत सामग्री

भारतीय वायुसेना के विमान लगातार राहत सामग्री लेकर काठमांडू पहुंच रहे हैं. अब तक चार उड़ानों के जरिए करीब 68.5 टन राहत सामग्री नेपाल भेजी जा चुकी है. इसमें तंबू, कंबल, स्लीपिंग बैग, तिरपाल, स्वच्छता किट, सोलर लैंप, दवाइयां, खाने के पैकेट, जनरेटर, पानी साफ करने वाली गोलियां और पानी निकालने वाले पंप शामिल हैं.

भारत ने केवल राहत सामान ही नहीं भेजा है, बल्कि कई विशेषज्ञ दल भी नेपाल भेजे हैं. डॉक्टरों और पैरामेडिकल कर्मचारियों की टीम के अलावा सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश और बचाव में मदद करने वाली टीम भी नेपाल पहुंची है. डीएनए जांच के लिए फोरेंसिक विशेषज्ञों को भी भेजा गया है.

आपदा के कारण त्रिशूली जिले में 11 जलविद्युत परियोजनाओं के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है. इन परियोजनाओं में काम करने वाले कई कर्मचारियों के सुरंगों में फंसे होने की आशंका जताई जा रही है.

बेली ब्रिज का सामान भी भेजा

भारत ने नेपाल में सड़क और संपर्क व्यवस्था को दोबारा शुरू करने के लिए बेली ब्रिज बनाने का सामान भी भेजा है. एक पुल पहले ही नेपाल भेजा जा चुका है. इसके अलावा दूसरे पुलों के उपकरण और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम भी रविवार को नेपाल पहुंची.

विदेश मंत्रालय के अनुसार, फिलहाल भारत का मुख्य ध्यान राहत, चिकित्सा सहायता और बचाव अभियान पर है. अलग से वित्तीय पैकेज की अभी औपचारिक घोषणा नहीं हुई है.

नुकसान कितना हुआ है, दोबारा निर्माण के लिए कितनी मदद चाहिए और नेपाल सरकार की जरूरत क्या है, इसका आकलन होने के बाद भारत आगे की सहायता पर फैसला कर सकता है. जरूरत पड़ने पर भारत पुनर्वास और जरूरी बुनियादी ढांचे को दोबारा तैयार करने के लिए बड़ा पैकेज भी दे सकता है.

2015 में भी भारत ने चलाया था बड़ा राहत अभियान

नेपाल में आई इस आपदा के बीच 2015 के भूकंप की याद भी ताजा हो गई है. उस समय भारत ने बड़े स्तर पर राहत और बचाव अभियान चलाया था और बाद में नेपाल के पुनर्निर्माण में भी मदद की थी.

भारत ने तब नेपाल की मदद के लिए ‘ऑपरेशन मैत्री’ शुरू किया था. भूकंप के बाद राहत और पुनर्निर्माण के लिए भारत की ओर से करीब एक अरब डॉलर की मदद दी गई थी. इसके अलावा नेपाल की अलग-अलग विकास परियोजनाओं के लिए भी करीब एक अरब डॉलर की सहायता का ऐलान किया गया था.

अधिकारियों का कहना है कि इस बार भी भारत पड़ोसी देश की जरूरत के हिसाब से मदद जारी रखेगा और हालात का आकलन होने के बाद आगे के कदम तय किए जाएंगे.

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