संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान को आतंकवाद और सिंधु जल संधि के मुद्दे पर कड़ा जवाब दिया है. भारत ने साफ कहा कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को नहीं रोकता, तब तक भरोसे और सहयोग की उम्मीद नहीं की जा सकती.
सिंधु जल संधि पर भारत का साफ संदेश
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पर्वथनेनी हरीश ने कहा कि सिंधु जल संधि को लेकर भारत का रुख बिल्कुल साफ है. उन्होंने कहा कि अगर कोई देश लगातार आतंकवाद को बढ़ावा देता है और उसे अपनी नीति का हिस्सा बनाता है, तो उसके साथ भरोसे के आधार पर सहयोग करना मुश्किल हो जाता है.
भारत के इस बयान को पाकिस्तान के लिए सख्त संदेश माना जा रहा है.
पाकिस्तान पर आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप
यूएनएससी की बैठक के दौरान भारत ने कहा कि पाकिस्तान लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद का इस्तेमाल कर रहा है. भारत ने कहा कि आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते.
#IndiaAtUN
— India at UN, NY (@IndiaUNNewYork) July 22, 2026
Statement by PR @AmbHarishP at the High-Level Open Debate of the @UN Security Council on Natural Resources Governance: the Foundation of Peace, Security and Prosperity.
Full statement - https://t.co/VsLX7LqWFI@MEAIndia @IndianDiplomacy @PIB_India @PMOIndia pic.twitter.com/4D1q7NeJtq
भारतीय प्रतिनिधि ने पाकिस्तान से कहा कि वह पहले आतंकवाद पर कार्रवाई करे, तभी दोनों देशों के बीच भरोसे का माहौल बन सकता है.
जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा
भारत ने बैठक में दोहराया कि जम्मू-कश्मीर हमेशा से भारत का अभिन्न हिस्सा था, है और आगे भी रहेगा.
राजदूत पर्वथनेनी हरीश ने कहा कि यह भारत का संवैधानिक और कानूनी सच है, जिसे पाकिस्तान जानबूझकर नजरअंदाज करता है.
उन्होंने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर से जुड़ा असली मुद्दा पाकिस्तान का भारत की जमीन पर अवैध कब्जा है, जिसे खत्म किया जाना चाहिए.
सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान को घेरा
भारत ने कहा कि पाकिस्तान दुनिया के सामने सिंधु जल संधि को लेकर गलत तस्वीर पेश कर रहा है.
भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि पाकिस्तान को भारत पर आरोप लगाने के बजाय अपने देश की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए. इससे उसके लोगों का भी भला होगा और क्षेत्र में शांति का माहौल बनेगा.
भारत का संदेश साफ है कि अगर पाकिस्तान आतंकवाद पर रोक लगाने के लिए ठोस कदम उठाता है, तभी दोनों देशों के बीच भरोसा और सहयोग आगे बढ़ सकता है. भारत ने एक बार फिर दोहराया कि आतंकवाद के खिलाफ उसकी नीति में कोई बदलाव नहीं आया है.
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