Crude Oil Price: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब दुनिया भर के तेल बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव और लाल सागर में तेल टैंकरों पर हो रहे हमलों की वजह से कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. हालात ऐसे हैं कि ब्रेंट क्रूड अब 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है.
कितनी बढ़ गई तेल की कीमत?
गुरुवार को ब्रेंट क्रूड में करीब 2% की तेजी देखने को मिली और इसकी कीमत 96 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई. यह पिछले करीब छह हफ्तों का सबसे ऊंचा स्तर है.
वहीं, अमेरिकी WTI क्रूड भी करीब 1.6% चढ़कर 88.24 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है. भारतीय वायदा बाजार में कच्चे तेल का भाव करीब 8,548 रुपये प्रति बैरल पहुंच गया है.
क्यों बढ़ रहे हैं कच्चे तेल के दाम?
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी की सबसे बड़ी वजह मिडिल ईस्ट का तनाव है. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव से होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते तेल सप्लाई पर असर पड़ने की चिंता बढ़ गई है.
इसके अलावा, यमन के हूती विद्रोही लाल सागर में तेल ले जा रहे जहाजों को निशाना बना रहे हैं. इससे दुनिया में तेल की सप्लाई प्रभावित होने का डर है और इसी कारण कीमतें लगातार ऊपर जा रही हैं.
बाजार के जानकारों का मानना है कि अगर यही हाल रहा, तो आने वाले समय में कच्चे तेल का दाम 120 डॉलर प्रति बैरल तक भी पहुंच सकता है.
भारत पर क्या असर होगा?
भारत अपनी जरूरत का करीब 88% कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है. इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का सीधा असर भारत पर पड़ता है.
अगर लंबे समय तक कच्चे तेल की कीमत 95 से 120 डॉलर प्रति बैरल के बीच बनी रहती है, तो पेट्रोल और डीजल के दाम 5 से 8 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ सकते हैं.
महंगाई भी बढ़ सकती है
पेट्रोल और डीजल महंगे होने से सामान ढोने का खर्च भी बढ़ जाएगा. इसका असर फल, सब्जियां, दूध, राशन और रोजमर्रा की दूसरी चीजों की कीमतों पर पड़ सकता है.
यानी अगर कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंची बनी रहती हैं, तो आने वाले दिनों में लोगों की जेब पर बोझ बढ़ सकता है और देश में महंगाई भी तेज हो सकती है.
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