भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक तल्ख़ी एक बार फिर बढ़ गई है. इस बार वजह बनी है पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ की वह टिप्पणी जिसमें उन्होंने अफगान तालिबान को भारत समर्थित "प्रॉक्सी" करार दिया. पाकिस्तान के इस आरोप को भारत ने सिरे से खारिज करते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है.
गुरुवार, 16 अक्टूबर 2025 को भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में पाकिस्तान के बयान को “बेतुका, निराधार और पूरी तरह से गलत” करार दिया. उन्होंने दो टूक कहा कि पाकिस्तान की आदत रही है कि वह अपनी आंतरिक विफलताओं के लिए बाहरी ताक़तों को जिम्मेदार ठहराता है. रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट कहा, आतंकवाद को शरण देना और उसे अपनी रणनीति के तौर पर इस्तेमाल करना पाकिस्तान की पुरानी नीति है. यह देश क्षेत्रीय अस्थिरता के लिए ज़िम्मेदार रहा है.
अफगानिस्तान के प्रति भारत की नीति
भारत ने यह भी दोहराया कि वह अफगानिस्तान की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और स्वतंत्रता का पूर्ण समर्थन करता है. प्रवक्ता के अनुसार, भारत स्थिति पर कड़ी नजर बनाए हुए है और दोनों देशों के बीच जारी तनावपूर्ण हालात पर निगरानी रख रहा है. उन्होंने यह भी जोड़ा कि हर बार समस्या का समाधान दूसरों को दोष देकर नहीं किया जा सकता. पाकिस्तान को आत्मचिंतन करना चाहिए कि वह अपने देश को कट्टरपंथ और आतंक के गर्त में क्यों झोंकता आ रहा है.
पाकिस्तान पर आतंकवाद फैलाने के आरोप
विदेश मंत्रालय ने एक बार फिर पाकिस्तान पर आतंकवाद को पनाह देने का आरोप दोहराया. उन्होंने कहा कि दशकों से पाकिस्तान की धरती से भारत समेत उसके पड़ोसी देशों पर हमले होते रहे हैं. अब जबकि वही आतंकी संगठन पाकिस्तान को ही निशाना बना रहे हैं, तब इस्लामाबाद झूठे आरोप लगाकर अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रहा है.
ख्वाजा आसिफ का आरोप और उसका राजनीतिक अर्थ
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने जियो टीवी को दिए एक इंटरव्यू में दावा किया था कि "अफगान तालिबान अब भारत के इशारों पर काम कर रहा है और पाकिस्तान के खिलाफ प्रॉक्सी वॉर लड़ रहा है." उन्होंने यहां तक कह दिया कि काबुल अब दिल्ली के इशारे पर फैसले ले रहा है. भारत ने इस बयान को गैर-जिम्मेदाराना और अस्वीकार्य करार देते हुए कहा कि यह सिर्फ ध्यान भटकाने की कोशिश है.
भारत और अफगानिस्तान के रिश्तों में फिर से मजबूती
पाकिस्तान की भड़काऊ भाषा के उलट, भारत ने हाल के महीनों में अफगानिस्तान के साथ अपने संबंधों को मानवीय आधार पर फिर से मज़बूत करने की दिशा में कदम उठाए हैं. भारत ने अब तक तालिबान शासन को औपचारिक मान्यता नहीं दी है, लेकिन शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं के ज़रिए अफगान जनता के साथ सहयोग जारी रखा है. रणधीर जायसवाल ने बताया कि भारत का "टेक्निकल मिशन" अब काबुल स्थित दूतावास में स्थानांतरित किया जा रहा है और यह प्रक्रिया जल्द पूरी हो जाएगी.
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