ब्रह्मोस से लैस, 2200 KM की रफ्तार... आज स्वदेशी फाइटर जेट 'तेजस MK1A' का पहला प्रदर्शन, देखें ताकत

भारत की सैन्य क्षमताओं में एक और स्वदेशी उपलब्धि जुड़ने जा रही है. देश में बनी अत्याधुनिक तकनीकों से लैस लड़ाकू विमान तेजस MK1A अब पहली बार उड़ान भरने को तैयार है.

Today the first demonstration of indigenous fighter jet Tejas MK1A
प्रतिकात्मक तस्वीर/ ANI

भारत की सैन्य क्षमताओं में एक और स्वदेशी उपलब्धि जुड़ने जा रही है. देश में बनी अत्याधुनिक तकनीकों से लैस लड़ाकू विमान तेजस MK1A अब पहली बार उड़ान भरने को तैयार है. यह ऐतिहासिक पल शुक्रवार को महाराष्ट्र के नासिक में देखने को मिलेगा, जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में तेजस आसमान में गर्जना करेगा. यह केवल एक परीक्षण उड़ान नहीं होगी, बल्कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में बड़ा और मजबूत कदम होगा.

‘तेजस’ महज एक विमान नहीं, बल्कि भारत की इंजीनियरिंग, अनुसंधान और नवाचार की उड़ान है. इसे हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने विकसित किया है और भारतीय वायुसेना इसे अपने बेड़े में शामिल करने जा रही है. इसकी तैनाती की संभावित जगह बीकानेर का नाल एयरबेस मानी जा रही है, जहां से यह पाकिस्तान की सीमा पर भारत की हवाई सुरक्षा को और मजबूत बनाएगा.

तेजस MK1A: पुराने मिग-21 का आधुनिक उत्तराधिकारी

तेजस MK1A को भारत के पुराने पड़ चुके मिग-21 बेड़े की जगह लेने के लिए तैयार किया गया है. लेकिन यह सिर्फ रिप्लेसमेंट नहीं है, बल्कि उससे कई गुना अधिक शक्तिशाली और तकनीकी रूप से उन्नत है. इसमें अल्ट्रा-मॉडर्न एवियोनिक्स, स्मार्ट रडार सिस्टम, और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर क्षमता जैसी सुविधाएं शामिल हैं. इसकी अधिकतम गति 2,200 किमी/घंटा है, जो इसे कुछ ही मिनटों में दुश्मन के इलाके में पहुंचा सकती है.

ब्रह्मोस और स्ट्राइक क्षमता से लैस ‘सुपर जेट’

तेजस MK1A में एयर-टू-एयर और एयर-टू-ग्राउंड हमलों के लिए आधुनिक हथियार प्रणाली लगाई गई है. इसमें ब्रह्मोस मिसाइल लगाने की क्षमता भी है, जो इसे किसी भी मिशन के लिए पूरी तरह सक्षम बनाती है. यह विमान हर मौसम में ऑपरेशन को अंजाम दे सकता है और दुनिया के सबसे हल्के लेकिन मारक क्षमता वाले लड़ाकू विमानों में गिना जाता है.

65% स्वदेशी सामग्री, तकनीकी आत्मनिर्भरता की मिसाल

इस फाइटर जेट की सबसे खास बात है कि इसमें लगभग 65% स्वदेशी तकनीक और उपकरणों का उपयोग किया गया है. HAL के मुताबिक, इसके रडार, ढांचा और अन्य कई अहम हिस्से भारत में ही तैयार किए गए हैं. यह केवल एक विमान नहीं, बल्कि भारतीय रक्षा उद्योग की बढ़ती क्षमता और आत्मनिर्भरता की जीती-जागती मिसाल है.

भारतीय वायुसेना के साथ बड़ा सौदा

भारतीय वायुसेना और HAL के बीच 62,370 करोड़ रुपये का करार हुआ है, जिसके तहत वायुसेना को कुल 97 तेजस लड़ाकू विमान मिलेंगे. इनमें 68 सिंगल-सीटर और 29 ट्विन-सीटर ट्रेनर वर्जन शामिल हैं. इससे वायुसेना की ताकत में भारी इजाफा होगा और मिग-21 की सेवानिवृत्ति के बाद बना खालीपन भी भर जाएगा.

अमेरिकी इंजन से मिलेगी और रफ्तार

तेजस को ताकत देने वाले GE-404 जेट इंजन अमेरिका की कंपनी GE द्वारा दिए जा रहे हैं. अब तक भारत को चार इंजन मिल चुके हैं और वित्त वर्ष के अंत तक यह संख्या 12 हो जाएगी. इससे तेजस का उत्पादन और वायुसेना को समय पर डिलीवरी की प्रक्रिया तेज होगी.

पाकिस्तान की नींद उड़ाने को तैयार

तेजस MK1A की तैनाती से पाकिस्तान की सीमा पर भारत की हवाई चौकसी और मारक क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी. इसकी तेज गति, घातक हथियार और लो प्रोफाइल डिज़ाइन पाकिस्तान के लिए नई चुनौती बनकर उभर सकते हैं. रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि हर तेजस स्क्वॉड्रन ‘उड़ती हुई आत्मनिर्भरता’ का प्रतीक होगी.

नासिक से खुलेगा नया एयरोस्पेस अध्याय

तेजस MK1A जब शुक्रवार को नासिक के आसमान में अपनी पहली उड़ान भरेगा, तो यह दृश्य केवल एक तकनीकी परीक्षण नहीं होगा — यह भारत की रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में नए युग की शुरुआत होगी. यह विमान न सिर्फ देश की हिफाजत करेगा, बल्कि भारत की तकनीकी क्षमताओं का वैश्विक स्तर पर दम भी दिखाएगा.

यह भी पढ़ें: क्या पीएम मोदी ने फोन पर ट्रंप से की थी बात? अमेरिकी राष्ट्रपति के दावे पर विदेश मंत्रालय का जवाब