समुद्र में बढ़ी भारत की ताकत! नौसेना में शामिल हुआ स्वदेशी युद्धपोत INS Malvan, जानें खासियत

INS Malwan: भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ाने के लिए एक और स्वदेशी युद्धपोत शामिल किया गया है. कर्नाटक के कारवार में INS मालवन को नौसेना में शामिल किया गया. यह माहे श्रेणी का दूसरा एंटी-सबमरीन शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW-SWC) है. इस युद्धपोत को भारत में ही डिजाइन और तैयार किया गया है.

India maritime strength boosted Indigenous warship INS Malvan inducted into the Navy here are its key features
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INS Malwan: भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ाने के लिए एक और स्वदेशी युद्धपोत शामिल किया गया है. कर्नाटक के कारवार में INS मालवन को नौसेना में शामिल किया गया. यह माहे श्रेणी का दूसरा एंटी-सबमरीन शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW-SWC) है. इस युद्धपोत को भारत में ही डिजाइन और तैयार किया गया है.

पुराने INS मालवन के नाम पर रखा गया नाम

इस नए युद्धपोत का नाम भारतीय नौसेना के पुराने INS मालवन के नाम पर रखा गया है. पुराना जहाज करीब 19 साल तक सेवा देने के बाद साल 2003 में रिटायर हुआ था. इस मौके पर वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह मुख्य अतिथि रहे. समारोह में नौसेना के कई वरिष्ठ अधिकारी और कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे.

जहाज के प्रतीक में 'बाघ नख'

INS मालवन के प्रतीक चिह्न में 'बाघ नख' बनाया गया है. यह बहादुरी, तेजी और सही समय पर दुश्मन पर हमला करने की ताकत का प्रतीक माना जाता है. प्रतीक के चारों ओर बनी समुद्री लहरें देश की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा के लिए नौसेना की लगातार निगरानी को दिखाती हैं. जहाज का आदर्श वाक्य "साइलेंट क्लॉज" है, यानी यह जरूरत पड़ने पर बिना शोर किए सटीक कार्रवाई करने में सक्षम है.

80% से ज्यादा स्वदेशी तकनीक

INS मालवन में 80 प्रतिशत से ज्यादा स्वदेशी उपकरण और तकनीक का इस्तेमाल किया गया है. यह युद्धपोत 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है. यह भारत की जहाज निर्माण क्षमता और रक्षा क्षेत्र में बढ़ती आत्मनिर्भरता की भी मिसाल है.

वायुसेना प्रमुख ने क्या कहा?

एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था के लिए समुद्री व्यापार का सुरक्षित रहना बहुत जरूरी है. उन्होंने कहा कि आज के समय में समुद्री रास्तों की सुरक्षा पहले से ज्यादा अहम हो गई है.

उन्होंने रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल की सराहना की. साथ ही सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत पर भी जोर दिया. उनका कहना था कि भविष्य की चुनौतियों का सामना तीनों सेनाएं मिलकर बेहतर तरीके से कर सकती हैं.

नौसेना को मिलेगा बड़ा फायदा

INS मालवन के शामिल होने से भारतीय नौसेना की पनडुब्बी रोधी क्षमता और मजबूत होगी. यह युद्धपोत बड़े युद्धपोतों, पनडुब्बियों और नौसैनिक विमानों के साथ मिलकर काम कर सकता है. इससे समुद्री सुरक्षा मजबूत होगी और भारत अपने समुद्री क्षेत्रों व समुद्री हितों की बेहतर सुरक्षा कर सकेगा.

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