Monsoon Disaster: असम से हिमाचल तक बारिश बनी आफत, बाढ़-भूस्खलन ने बढ़ाई मुश्किलें, अब तक कई लोगों की मौत

Monsoon Disaster: मानसून की बारिश जहां खेतों और जलाशयों के लिए राहत लेकर आती है, वहीं इस बार देश के कई राज्यों में यही बारिश विनाश का कारण बन गई है.

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Monsoon Disaster: मानसून की बारिश जहां खेतों और जलाशयों के लिए राहत लेकर आती है, वहीं इस बार देश के कई राज्यों में यही बारिश विनाश का कारण बन गई है. पूर्वोत्तर से लेकर उत्तर भारत तक लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने बाढ़, भूस्खलन और बादल फटने जैसी घटनाओं को जन्म दिया है. हजारों परिवार बेघर हो गए हैं, सड़क और रेल संपर्क बाधित हैं और कई धार्मिक यात्राओं पर भी रोक लगा दी गई है. सबसे अधिक तबाही असम में देखने को मिल रही है, जहां लाखों लोग बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं. वहीं हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश भी भारी बारिश के गंभीर असर से जूझ रहे हैं.

असम में बाढ़ ने बिगाड़े हालात, लाखों लोग प्रभावित

असम में लगातार हो रही बारिश और उफनती नदियों ने हालात बेहद चिंताजनक बना दिए हैं. असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के अनुसार, पिछले 24 घंटों में 21 लोगों की मौत के बाद बाढ़ से मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर 31 हो गई है. राज्य के 16 जिलों में 5.64 लाख से अधिक लोग बाढ़ की चपेट में हैं और बड़ी संख्या में लोगों को अपने घर छोड़कर राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी है.

सबसे अधिक प्रभावित शिवसागर जिला है, जहां 3.59 लाख से ज्यादा लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं. इसके अलावा चराइदेव, जोरहाट और गोलाघाट जिलों में भी हालात बेहद खराब बने हुए हैं. 44 राजस्व मंडलों के 872 गांव जलमग्न हो चुके हैं. राहत और बचाव कार्यों के लिए प्रशासन ने 71 राहत शिविर और 202 राहत वितरण केंद्र स्थापित किए हैं, जहां हजारों विस्थापित लोगों को भोजन, चिकित्सा और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं. मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने प्रभावित जिलों का दौरा कर राहत कार्यों की समीक्षा करने का निर्णय लिया है.

ब्रह्मपुत्र समेत कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर

असम में बाढ़ की सबसे बड़ी वजह प्रमुख नदियों का उफान पर होना है. ब्रह्मपुत्र, दिखो, देसांग और धनसिरी जैसी नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे आसपास के गांवों में पानी तेजी से फैल गया है.

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) और अग्निशमन विभाग की टीमें लगातार राहत एवं बचाव अभियान चला रही हैं. दूसरी ओर बाढ़ का असर परिवहन व्यवस्था पर भी साफ दिखाई दे रहा है. कई स्थानों पर रेलवे ट्रैक पानी में डूब जाने के कारण अनेक ट्रेनों को रद्द, आंशिक रूप से रद्द या वैकल्पिक मार्गों से संचालित करना पड़ा है.

हिमाचल प्रदेश में बादल फटने से मची तबाही

हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश ने पहाड़ी इलाकों में जनजीवन को प्रभावित कर दिया है. कांगड़ा जिले की बोह घाटी में बादल फटने और उसके बाद आई फ्लैश फ्लड ने कई मकानों, गौशालाओं और खेती की जमीन को भारी नुकसान पहुंचाया है. राहत की बात यह रही कि प्रशासन ने समय रहते लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया, जिससे किसी की जान नहीं गई. हालांकि इस प्राकृतिक आपदा में कई मवेशियों की मौत हो गई और एक महिला घायल हुई है. प्रभावित क्षेत्रों में मलबा हटाने और सामान्य स्थिति बहाल करने का काम लगातार जारी है.

स्कूल बंद, सड़कें और बिजली व्यवस्था प्रभावित

भारतीय मौसम विभाग द्वारा जारी रेड अलर्ट को देखते हुए कांगड़ा, मंडी और सिरमौर जिलों के सभी स्कूल और कॉलेज एहतियातन बंद कर दिए गए हैं. वहीं किन्नौर जिले में भूस्खलन के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग-5 पर यातायात पूरी तरह बाधित हो गया है. बारिश के कारण प्रदेश में 36 सड़कें बंद हो गई हैं, जबकि 43 पेयजल योजनाएं और पांच बिजली ट्रांसफार्मर भी प्रभावित हुए हैं. प्रशासन लगातार क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे को बहाल करने में जुटा हुआ है.

जम्मू-कश्मीर में बारिश और भूस्खलन से बढ़ी मुश्किलें

जम्मू-कश्मीर में भी लगातार हो रही बारिश लोगों के लिए बड़ी चुनौती बन गई है. पुंछ, राजौरी और डोडा जिलों में बादल फटने, भूस्खलन और अन्य बारिश जनित घटनाओं के कारण रविवार से अब तक 23 लोगों की मौत हो चुकी है. इसके अलावा सात लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश के लिए बचाव अभियान जारी है. खराब मौसम के कारण प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है और संवेदनशील इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का काम तेजी से किया जा रहा है.

अमरनाथ और वैष्णो देवी समेत कई यात्राएं स्थगित

लगातार खराब मौसम और पहाड़ी इलाकों में बढ़ते खतरे को देखते हुए प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है. इसी कारण अमरनाथ यात्रा, माता वैष्णो देवी यात्रा, शिव खोरी यात्रा और मचैल माता यात्रा लगातार तीसरे दिन भी स्थगित रखी गई हैं. प्रशासन का कहना है कि मौसम सामान्य होने और रास्तों की सुरक्षा सुनिश्चित होने के बाद ही यात्राओं को दोबारा शुरू करने पर फैसला लिया जाएगा.

पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों में भी भारी बारिश का असर

असम के अलावा पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों में भी मानसून ने गंभीर स्थिति पैदा कर दी है. नागालैंड के मोन जिले में भारी बारिश और भूस्खलन के कारण मृतकों की संख्या बढ़कर नौ हो गई है, जबकि चार लोग अब भी लापता हैं. राज्य के 10 जिलों के 93 गांव इस आपदा से प्रभावित हुए हैं और कई इलाकों में राहत कार्य जारी है.

अरुणाचल प्रदेश में भी लगातार बारिश के चलते पांच जिलों में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं. मौजूदा मानसून सीजन के दौरान राज्य में लगभग 1.49 लाख लोग किसी न किसी रूप में प्रभावित हुए हैं. प्रशासन लगातार जलभराव वाले इलाकों की निगरानी कर रहा है और प्रभावित परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचाने का प्रयास कर रहा है.

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