India-EU Trade Deal: 19 साल का इंतजार खत्म! 'मदर ऑफ ऑल डील' पर जल्द लगेगी मुहर, क्या-क्या होगा सस्ता?

भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच लंबे समय से चल रही ट्रेड डील अब अपने आखिरी पड़ाव पर पहुंच गई है.

India-EU Trade Deal Mother of all deals set to be sealed soon products cheaper
प्रतिकात्मक तस्वीर/ AI

India-EU Trade Deal: भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच लंबे समय से चल रही ट्रेड डील अब अपने आखिरी पड़ाव पर पहुंच गई है. करीब 19 साल की बातचीत के बाद दोनों पक्ष ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को अंतिम रूप देने के करीब हैं. इस डील को वैश्विक कारोबार की दुनिया में ‘मदर ऑफ ऑल डील’ कहा जा रहा है. यूरोपीय आयोग ने भारत-ईयू ट्रेड डील को मंजूरी के लिए अपनी काउंसिल के पास भेज दिया है. काउंसिल की हरी झंडी मिलते ही यह समझौता लागू होने की दिशा में आगे बढ़ जाएगा.

भारत और भूटान के लिए यूरोपीय संघ के नामित राजदूत जीन-एरिक पके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि यह सिर्फ एक सामान्य व्यापार समझौता नहीं है, बल्कि दोनों बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग को नई ऊंचाई देने वाला कदम है. उन्होंने कहा कि डील का पूरा ड्राफ्ट सार्वजनिक किया जा चुका है और अब काउंसिल की मंजूरी का इंतजार है.

भारत और ईयू के बीच इस समझौते पर बातचीत 2007 में शुरू हुई थी. 2013 में बातचीत में रुकावट आ गई थी, जिसके बाद 2022 में इसे फिर शुरू किया गया. जनवरी 2026 में दोनों पक्ष ट्रेड डील पर सहमत हुए और अब औपचारिक मंजूरी का इंतजार है.

96 फीसदी सामान पर घटेगा टैरिफ

इस ट्रेड डील के बाद यूरोपीय संघ से भारत आने वाले करीब 96 फीसदी सामान पर टैरिफ या तो पूरी तरह खत्म किया जाएगा या उसमें बड़ी कटौती होगी. इससे यूरोपीय उत्पादों पर लगने वाले शुल्क में हर साल करीब 4 अरब यूरो यानी 36 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की बचत होने का अनुमान है. आयात शुल्क कम होने का फायदा कंपनियों के साथ-साथ आम ग्राहकों को भी मिल सकता है.

क्या-क्या हो सकता है सस्ता?

डील लागू होने के बाद यूरोप से आने वाले कई प्रीमियम सामान भारतीय बाजार में कम कीमत पर मिल सकते हैं.

कारें और ऑटो पार्ट्स: जर्मनी, फ्रांस और इटली से आने वाली लग्जरी कारों, ऑटो पार्ट्स और दूसरे प्रीमियम वाहन उत्पादों की कीमत कम हो सकती है.

इलेक्ट्रॉनिक्स और मशीनरी: यूरोप से आने वाली आधुनिक मशीनरी, मेडिकल उपकरण और हाई-एंड इलेक्ट्रॉनिक सामान पर शुल्क घटने से इनकी कीमत में कमी आ सकती है.

प्रीमियम फूड और ड्रिंक्स: स्विस चॉकलेट, इटालियन ऑलिव ऑयल, प्रीमियम चीज और यूरोप के दूसरे फूड प्रोडक्ट्स पर टैक्स कम होने से इनके दाम नीचे आ सकते हैं.

केमिकल्स और औद्योगिक सामान: उद्योगों में इस्तेमाल होने वाले यूरोपीय केमिकल्स और ट्रांसपोर्ट से जुड़े उपकरण भी सस्ते हो सकते हैं. इससे भारत में कई सामान के उत्पादन की लागत कम करने में मदद मिल सकती है.

भारतीय निर्यात को भी मिलेगा फायदा

भारत और ईयू की डील का फायदा सिर्फ यूरोप से सामान मंगाने में ही नहीं होगा. इससे भारतीय कंपनियों के लिए यूरोपीय संघ के 27 देशों का बड़ा बाजार भी खुल सकता है. अनुमान है कि 2031 तक दोनों पक्षों के बीच व्यापार 51 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है.

भारतीय गारमेंट सेक्टर को भी बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है. यूरोप में भारतीय कपड़ों पर लगने वाली करीब 10 फीसदी ड्यूटी खत्म होने से भारतीय कपड़े वियतनाम और बांग्लादेश के मुकाबले ज्यादा प्रतिस्पर्धी हो सकते हैं. इससे रोजगार के नए अवसर भी बन सकते हैं.

इसके अलावा हीरे-जवाहरात, चमड़ा और दूसरे भारतीय उत्पादों को यूरोपीय बाजार में बेहतर पहुंच मिल सकती है. भारतीय जेनेरिक दवाओं के लिए यूरोपीय मानकों के साथ तालमेल बढ़ने से दवा निर्यात में भी तेजी आने की उम्मीद है.

भारत-ईयू कारोबार कितना बड़ा है?

भारत इस समय वस्तुओं के व्यापार के मामले में यूरोपीय संघ का 9वां सबसे बड़ा व्यापारिक साझीदार है. साल 2025 में दोनों के बीच द्विपक्षीय वस्तु व्यापार करीब 118 अरब यूरो के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था. वहीं, वस्तुओं और सेवाओं को मिलाकर दोनों पक्षों का कुल व्यापार पहले ही 180 अरब यूरो से ज्यादा हो चुका है.

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