India-EU FTA: भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) केवल दो पक्षों के बीच हस्ताक्षर भर नहीं है. यह समझौता भारतीय अर्थव्यवस्था, खासकर इलेक्ट्रॉनिक्स और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए ऐतिहासिक मोड़ साबित होने जा रहा है.
इंडिया सेलुलर एंड इलेक्ट्रानिक्स एसोसिएशन (ICEA) के चेयरमैन पंकज मोहिंद्रू के मुताबिक यह समझौता आने वाले दशक में भारतीय मैन्युफैक्चरिंग के सुनहरे भविष्य की नींव रखेगा.
यूरोपीय बाजार में बढ़ेगी भारत की पकड़
सबसे बड़ी खासियत यह है कि यूरोप भेजे जाने वाले अधिकांश भारतीय उत्पादों पर इंपोर्ट ड्यूटी यानी सीमा शुल्क शून्य होने की संभावना है. इसका मतलब है कि भारतीय उत्पाद यूरोप में और भी प्रतिस्पर्धी दामों पर बिक सकेंगे.
पंकज मोहिंद्रू के अनुसार, वर्तमान में भारत का यूरोपियन इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात लगभग 12 अरब डॉलर है. लेकिन इस समझौते के बाद भारत लंबी छलांग लगाने के लिए तैयार है. उनका लक्ष्य है कि साल 2031 तक निर्यात को 50 अरब डॉलर और 2035 तक 100 अरब डॉलर के पार ले जाया जाए.
इस समझौते से न केवल इलेक्ट्रॉनिक्स, बल्कि टेक्सटाइल, अपैरल, ज्वेलरी और जेम्स जैसे सेक्टरों में भी निर्यात को बढ़ावा मिलेगा. इसका सीधा असर रोजगार सृजन और नई कारोबारी संभावनाओं पर पड़ेगा.
टैक्स की जंग में भारत को मिला ‘सुरक्षा कवच’
आज की वैश्विक अर्थव्यवस्था में कई देशों ने एक-दूसरे पर कड़े टैक्स और प्रतिबंध लागू किए हैं. ऐसे समय में भारत ने इस FTA के माध्यम से खुद को एक सुरक्षित घेरे में रखा है.
पंकज मोहिंद्रू के अनुसार, भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक अर्थव्यवस्था में उथल-पुथल के बीच भारत ने अपनी जगह मजबूत कर ली है. इसका मतलब यह है कि भविष्य में व्यापारिक नियम चाहे कितने भी सख्त हों, भारत और यूरोप के बीच व्यापार बिना किसी रुकावट के जारी रहेगा.
MSME और युवाओं के लिए अवसर
इस समझौते का लाभ केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा. पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) के रणजीत मेहता के मुताबिक, यह समझौता भारत के माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSME) के लिए किसी वरदान से कम नहीं है.
भारत के छोटे और मध्यम उद्योग अब 23 ट्रिलियन डॉलर वाली यूरोपियन अर्थव्यवस्था से सीधे जुड़ पाएंगे. इसका मतलब है कि न केवल बड़ी कंपनियां, बल्कि छोटे व्यवसाय भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में पैर जमाने का मौका पाएंगे.
रोजगार और आर्थिक विकास पर असर
जैसे-जैसे भारतीय उत्पाद यूरोप के बड़े बाजार में पहुंचेंगे, देश में नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे. टेक्सटाइल, अपैरल, ज्वेलरी और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में नौकरियों की संख्या बढ़ने की संभावना है.
भारत और यूरोप की कुल आबादी दो अरब से अधिक है, जो दुनिया की अर्थव्यवस्था का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा बनाती है. इसका मतलब है कि जैसे-जैसे व्यापार बढ़ेगा, भारतीय सामान और सेवाओं की मांग में जबरदस्त उछाल आएगा.
ये भी पढ़ें- क्या भारत ने पाकिस्तान के परमाणु ठिकानों पर किया था हमला? IAF ने शेयर किया 'ऑपरेशन सिंदूर' का वीडियो