Middle East War: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को कई दिन हो चुके हैं और हालात अब भी बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं. लगातार हमलों और जवाबी कार्रवाई के कारण क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ गई है. ऐसे समय में कई देशों का मानना है कि भारत कूटनीतिक प्रयासों के जरिए इस तनाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.
हाल के दिनों में खाड़ी क्षेत्र के कुछ देशों ने कहा है कि भारत के दोनों पक्षों के साथ अच्छे संबंध हैं और वह शांति की दिशा में अहम भूमिका निभा सकता है. अब ईरान की ओर से भी भारत के रुख की सराहना की गई है.
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हाल ही में दूरभाष पर बातचीत हुई. इस बातचीत के बाद जारी बयान में कहा गया कि भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर संतुलित और रचनात्मक रुख अपनाया है और क्षेत्र में तनाव कम करने की कोशिश की है.
क्षेत्र में स्थिरता चाहता है ईरान
ईरानी राष्ट्रपति ने बातचीत के दौरान कहा कि उनका देश क्षेत्र में अस्थिरता नहीं चाहता. हाल के हमलों में बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने के बावजूद ईरान अपने मित्र देशों के साथ सहयोग बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है.
उन्होंने कहा कि ईरान बहुपक्षीय मंचों के माध्यम से सहयोग को मजबूत करना चाहता है और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है.
भारत और ईरान के मजबूत संबंध
भारत और ईरान के बीच लंबे समय से मित्रतापूर्ण संबंध रहे हैं. हालिया संकट के दौरान भी दोनों देशों के बीच लगातार संवाद बना हुआ है. ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर दोनों देश संपर्क में हैं.
कूटनीतिक बातचीत जारी
सूत्रों के अनुसार भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री सेयद अब्बास अरागची के बीच भी हाल के दिनों में बातचीत हुई है. इन वार्ताओं में क्षेत्र की स्थिति और समुद्री मार्गों की सुरक्षा जैसे विषयों पर चर्चा की गई.
भारत लंबे समय से संवाद और कूटनीति के जरिए विवादों के समाधान का समर्थन करता रहा है. इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत को संतुलित और शांतिपूर्ण भूमिका निभाने वाला देश माना जाता है.
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