Asim Munir vs Adil Raja: पाकिस्तान की राजनीति और सेना के बीच बढ़ते तनाव के बीच अब एक नया विवाद सामने आया है. लंदन में रह रहे पूर्व सैन्य अधिकारी और राजनीतिक टिप्पणीकार आदिल राजा को लेकर इस्लामाबाद सरकार बेहद सक्रिय हो गई है. रिपोर्टों के अनुसार पाकिस्तान की सत्ताधारी व्यवस्था अब उन्हें हर हाल में ब्रिटेन से वापस लाने की तैयारी में जुटी है. गृह मंत्री मोहसिन नकवी इस मिशन की अगुआई कर रहे हैं और इसी कारण वे हाल के दिनों में लगातार लंदन और इस्लामाबाद के बीच यात्राएं कर रहे हैं.
ब्रिटिश अखबार द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की सरकार ने कीर स्टार्मर प्रशासन से औपचारिक अनुरोध कर आदिल राजा को पाकिस्तान के हवाले करने के लिए कहा है. यह भी दावा किया जा रहा है कि एक्स्ट्राडिशन के बदले पाकिस्तान ब्रिटेन की वह हर शर्त मानने को तैयार है, जिसकी लंदन मांग करेगा.
आदिल राजा कौन हैं और पाकिस्तान उन्हें क्यों टारगेट कर रहा है?
आदिल राजा पाकिस्तान सेना में मेजर रैंक तक सेवा दे चुके हैं. सेना के साथ मतभेद और कई विवादों के बाद वे सेवा से अलग हो गए और बाद में ब्रिटेन चले गए. उनके पास ब्रिटिश नागरिकता भी है. विदेश में रहते हुए आदिल सोशल मीडिया और यूट्यूब चैनलों के जरिए पाकिस्तान की सेना और राजनीतिक नेतृत्व पर लगातार आरोप लगाते रहे हैं.
उनकी आलोचना का लक्ष्य विशेष रूप से वर्तमान सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर रहे हैं. पाकिस्तान की सरकार ने उनकी सामग्री को "झूठा और भड़काऊ" बताकर देश में उनके यूट्यूब चैनल को ब्लॉक कर दिया है. वहीं इस्लामाबाद में उनके खिलाफ सैन्य अदालत में मुकदमा भी चलाया जा रहा है.
ऑपरेशन 'सिंदूर' को लेकर आदिल का बड़ा दावा
आदिल राजा की लोकप्रियता तब और बढ़ गई जब उन्होंने एक वीडियो में दावा किया कि कश्मीर के पहलगाम क्षेत्र में नागरिकों की हत्या के पीछे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों की भूमिका थी. उनके अनुसार यह कार्रवाई कथित रूप से सेना प्रमुख आसिम मुनीर के आदेश पर हुई, जिसके बाद भारत ने जवाबी कार्रवाई में "ऑपरेशन सिंदूर" चलाया.
इस आरोप पाकिस्तान के सैन्य प्रतिष्ठान को कटघरे में खड़ा कर दिया, हालांकि इसकी कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं है. फिर भी इस बयान ने पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय छवि पर सवाल खड़े किए, और सेना अब इसे अपनी "रेड लाइन" माना जा रहा है.
सोशल मीडिया पर सेना और सरकार को कठघरे में खड़ा करना बना बड़ी वजह
इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद पाकिस्तान में सेना और जनरल मुनीर की आलोचना लगभग नाममात्र रह गई थी. लेकिन आदिल राजा सोशल मीडिया के जरिए खुलकर सेना के खिलाफ बात करते रहे हैं. उनकी सामग्री अंग्रेज़ी में होने के कारण वैश्विक स्तर पर भी चर्चा में रहती है, और यही बात पाकिस्तान के सत्ता प्रतिष्ठान को सबसे ज्यादा परेशान कर रही है.
विशेषज्ञों का मानना है कि आदिल की वीडियोज़ ने पाकिस्तान की पहले से ही बहसों में उलझी हुई अंतरराष्ट्रीय इमेज को और नुकसान पहुंचाया है. इसी कारण अब सरकार और सेना दोनों उन्हें "खतरनाक नैरेटिव क्रिएटर" मानते हुए वापस लाने के लिए आक्रामक रवैया अपना चुकी है.
सोशल मीडिया आलोचकों पर सख्त कार्रवाई
सूचना मंत्री अताउल्ला तरार ने हाल में यह बयान दिया कि सोशल मीडिया पर “भ्रामक सामग्री” या “संवेदनशील मुद्दों पर गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणियों” के खिलाफ अब कठोर कदम उठाए जाएंगे. उनके बयान को आदिल राजा प्रकरण से जोड़कर देखा जा रहा है.
तरार का कहना है कि देश में अराजकता फैलाने या राज्य की संस्थाओं को बदनाम करने की कोशिश को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. इस बयान ने साफ कर दिया है कि सरकार आदिल जैसे आलोचकों के खिलाफ सीधा एक्शन लेने के मूड में है.
क्या ब्रिटेन आदिल राजा को पाकिस्तान के हवाले करेगा?
यह सवाल अभी भी अनुत्तरित है. चूंकि आदिल ब्रिटिश नागरिक भी हैं, इसलिए एक्स्ट्राडिशन की राह आसान नहीं होगी. ब्रिटेन आमतौर पर तभी किसी नागरिक को सौंपता है जब मांगा गया देश एक पारदर्शी, निष्पक्ष और मानवीय न्याय प्रक्रिया की गारंटी दे.
पाकिस्तान की सैन्य अदालतों में चलने वाली सुनवाई, बंद कमरों की कार्यवाही और मानवाधिकार समूहों के आरोप इस प्रक्रिया को और जटिल बना सकते हैं. हालांकि पाकिस्तान की तेजी से बढ़ती कोशिशें संकेत देती हैं कि यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं बल्कि राजनीतिक प्राथमिकता भी बन चुका है.
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