अगर वक्फ (संशोधन) बिल पर विपक्ष एकजुट हो जाए, तो क्या पास हो पाएगा बिल? समझिए पूरा समीकरण

वक्फ (संशोधन) बिल, 2024 आज (बुधवार) को लोकसभा में पेश किया जाएगा और इसे गुरुवार को राज्यसभा में भी प्रस्तुत किया जाएगा.

If opposition unites on the Waqf Bill will the bill be passed
प्रतीकात्मक तस्वीर | Photo: ANI

वक्फ (संशोधन) बिल, 2024 आज (बुधवार) को लोकसभा में पेश किया जाएगा और इसे गुरुवार को राज्यसभा में भी प्रस्तुत किया जाएगा. अल्पसंख्यक एवं संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि लोकसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी ने आठ घंटे की बहस पर सहमति जताई है. इस कमेटी के अध्यक्ष लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला हैं, और इसमें प्रमुख दलों के नेता शामिल होते हैं.

बीजेपी को इस बिल को पास कराने में ज्यादा मुश्किल नहीं होने की संभावना है, क्योंकि उनके सहयोगी दल इस मुद्दे पर उनके साथ हैं. चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी और नीतीश कुमार की जेडीयू भी इस बिल का समर्थन कर रही हैं. बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि पार्टी को जनता दल (यूनाइटेड), लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) और तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) जैसे प्रमुख सहयोगियों का समर्थन प्राप्त है, जो इस विधेयक को संसद से पास कराने के लिए अहम हैं.

विपक्षी गुट इंडिया गठबंधन इस विधेयक के खिलाफ

वहीं, विपक्षी गुट इंडिया गठबंधन इस विधेयक के खिलाफ एकजुट है. इन दलों ने बिल के विरोध के लिए अपनी रणनीति बनाई है. बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने अपने सांसदों को संसद में उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए व्हिप जारी किया है.

जेडीयू और टीडीपी का रुख 

जेडीयू और एलजेपी (रामविलास) जैसे दलों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वे इस विधेयक के पारित होने में कोई बाधा नहीं डालेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष का यह आरोप गलत है कि यह विधेयक अल्पसंख्यकों के अधिकारों को छीनने वाला है. जेडीयू के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि उनकी पार्टी मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और वक्फ बोर्ड के प्रतिनिधियों से मिल चुकी है और उन्हें आश्वासन दिया है कि उनकी चिंताओं को सरकार तक पहुंचाया जाएगा. एलजेपी (रामविलास पासवान) के एक विधायक ने भी समर्थन की पुष्टि की है और पार्टी गरीब मुसलमानों के हितों पर ध्यान केंद्रित करेगी. केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने लोकसभा में अपने सभी सांसदों को सदन में उपस्थित रहने के लिए व्हिप जारी किया है.

चंद्रबाबू नायडू की तेलुगु देशम पार्टी ने भी इस विधेयक का समर्थन करने का निर्णय लिया है. टीडीपी प्रवक्ता प्रेम कुमार जैन ने कहा कि उनकी पार्टी इस विधेयक का समर्थन करेगी और चंद्रबाबू नायडू पहले ही कह चुके हैं कि वे मुस्लिम समुदाय के हितों के लिए काम करेंगे.

शिवसेना का रुख 

शिवसेना ने भी अपने सभी सांसदों को 2 और 3 अप्रैल को सदन में उपस्थित रहने और सरकार के रुख का समर्थन करने के लिए व्हिप जारी किया है.

बिल के विरोध में कौन-कौन हैं? 

विपक्षी गठबंधन ने बिल के विरोध के लिए अपनी रणनीति तय की है. विपक्षी दलों की बैठक में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, केसी वेणुगोपाल, समाजवादी पार्टी के रामगोपाल यादव, एनसीपी की सुप्रिया सुले, तृणमूल कांग्रेस के कल्याण बनर्जी और आम आदमी पार्टी के संजय सिंह भी शामिल हुए. इसके अलावा डीएमके के टीआर बालू, तिरुचि शिवा, आरजेडी के मनोज कुमार झा, सीपीआई-एम के जॉन ब्रिटास और वाइको भी उपस्थित थे. खड़गे ने कहा कि सभी विपक्षी दल एकजुट हैं और मोदी सरकार के असंवैधानिक और विभाजनकारी एजेंडे को हराने के लिए संसद में मिलकर काम करेंगे.

कांग्रेस नेता वेणुगोपाल ने कहा कि इस विधेयक का विरोध करना जरूरी है क्योंकि यह संविधान का उल्लंघन है. उन्होंने कहा कि संविधान में विश्वास रखने वाले लोग इसका विरोध करेंगे.

क्या बीजेपी के पास पर्याप्त संख्या है? 

लोकसभा में विधेयक को पास करने के लिए बीजेपी को 272 वोट चाहिए. 542 सांसदों में से 240 बीजेपी के हैं, 12 जेडी(यू), 16 टीडीपी, 5 एलजेपी (रामविलास पासवान), 2 राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी), और 7 शिवसेना के सांसद हैं. अगर एनडीए के सभी दल बीजेपी का समर्थन करते हैं, तो विधेयक आसानी से पास हो जाएगा.

राज्यसभा में एनडीए के 125 सांसद हैं, जिनमें से 98 बीजेपी, 4 जेडी(यू), 2 टीडीपी, 3 राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, 1 शिवसेना और 1 आरएलडी के सांसद हैं. राज्यसभा में विधेयक को पारित करने के लिए 119 सांसदों के समर्थन की जरूरत है. एनडीए को उम्मीद है कि उसे असम गण परिषद और तमिल मनिला कांग्रेस जैसी पार्टियों और छह मनोनीत सदस्यों का समर्थन मिलेगा.

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