भारत की रक्षा तैयारियों को एक और बड़ा बल मिलने जा रहा है. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित की जा रही स्वदेशी हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल अस्त्र Mk-2 अब पहले से कहीं अधिक घातक और दूर तक मार करने वाली बनने वाली है. इस मिसाइल की नई रेंज 200 किलोमीटर से अधिक तय की जा रही है, जो मौजूदा Mk-1 संस्करण की 100-160 किलोमीटर क्षमता से काफी आगे होगी.
अस्त्र Mk-2 की सबसे बड़ी खासियत है कि यह दुश्मन के एयर डिफेंस क्षेत्र में प्रवेश किए बिना ही लक्ष्य को नष्ट कर सकती है. यानी भारतीय पायलट अब स्टैंडऑफ डिस्टेंस से हमला कर सकेंगे. यह रणनीति युद्ध में पायलटों की सुरक्षा को बढ़ाते हुए मिशन की सफलता सुनिश्चित करेगी.
चीन-पाक की मिसाइलों से ज्यादा घातक
इस मिसाइल को चीन की PL-15 और पाकिस्तान की PL-15E मिसाइलों को जवाब देने के उद्देश्य से विकसित किया जा रहा है. जहां PL-15E की रेंज लगभग 145 किमी तक सीमित है, वहीं अस्त्र Mk-2 इसे पछाड़ते हुए 200 किलोमीटर की दूरी से भी दुश्मन के विमान को निशाना बना सकेगी. इससे भारत को एयर डॉमिनेंस की दिशा में निर्णायक बढ़त मिलेगी.
डुअल पल्स मोटर से मिलेगी असाधारण गति और नियंत्रण
अस्त्र Mk-2 में इस्तेमाल की जा रही डुअल पल्स सॉलिड रॉकेट मोटर तकनीक इसे और भी उन्नत बनाती है. यह दो चरणों में कार्य करती है – पहला चरण मिसाइल को तेज रफ्तार प्रदान करता है, जबकि दूसरा चरण अंतिम क्षणों में दुश्मन को सटीकता से भेदने के लिए अतिरिक्त ऊर्जा देता है. यह वही तकनीक है जो अमेरिकी AMRAAM मिसाइल में देखी गई थी.
स्वदेशी तकनीक से लैस, आत्मनिर्भरता को देगा बढ़ावा
यह मिसाइल न केवल मारक क्षमता के लिहाज से आधुनिक है, बल्कि पूरी तरह स्वदेशी तकनीकों से भी लैस है. इसमें देसी फायर-कंट्रोल सीकर, फाइबर-ऑप्टिक जाइरोस्कोप और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर रेसिस्टेंस सिस्टम लगाए जा रहे हैं. ये सभी तत्व इसे हाई-टेक इलेक्ट्रॉनिक जामिंग से भी सुरक्षित बनाते हैं.
भारतीय वायुसेना ने मांगा 700 मिसाइलों का ऑर्डर
रिपोर्टों के मुताबिक, भारतीय वायुसेना ने सुखोई-30MKI और तेजस जैसे अपने अग्रिम पंक्ति के लड़ाकू विमानों के लिए अस्त्र Mk-2 के लगभग 700 यूनिट का ऑर्डर देने की योजना बनाई है. इससे न सिर्फ ऑपरेशनल क्षमता बढ़ेगी, बल्कि आयात पर निर्भरता घटेगी.
यह भी पढ़ें: दिवाली से पहले दिल्ली-NCR में AQI 400 पार, सांस लेना भी हुआ मुश्किल