शादी जैसे बड़े खर्च के समय अक्सर लोग सोच में पड़ जाते हैं कि अचानक जरूरत पड़ने पर बड़ी रकम कहां से आएगी. ऐसे में निजी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए ईपीएफओ यानी कर्मचारी भविष्य निधि संगठन एक मजबूत आर्थिक सहारा बनकर सामने आता है. हालांकि पीएफ में जमा पैसा आपका ही होता है, लेकिन इसे निकालने के लिए कुछ नियम निर्धारित किए गए हैं. हाल ही में इन्हीं नियमों में बदलाव कर प्रक्रिया को और सरल बना दिया गया है.
नए नियमों के तहत अब सदस्य अपने या अपने परिवार के किसी भी सदस्य—जैसे भाई, बहन, बेटे, बेटी—की शादी के लिए पीएफ खाते से पूरी राशि (कर्मचारी और नियोक्ता दोनों का हिस्सा) तक निकाल सकते हैं. पहले यह सीमित था, लेकिन अब 100% राशि निकासी की अनुमति मिलने से कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है.
अब पाँच बार तक निकाल सकते हैं पैसा
पहले शादी के लिए पीएफ से पैसा निकालने की अनुमति सिर्फ तीन बार थी, लेकिन अब यह बढ़ाकर पाँच बार कर दी गई है. इसका मतलब यह है कि जीवन में कई बार होने वाले बड़े पारिवारिक आयोजनों के लिए अब कर्मचारियों पर आर्थिक दबाव कम पड़ेगा और उन्हें बिना झिझक फंड का इस्तेमाल करने का विकल्प मिलेगा.
कम हो गई सर्विस की शर्त, दस्तावेजों की झंझट भी खत्म
पहले शादी के लिए पीएफ निकालने के लिए कम से कम 7 साल की नौकरी पूरी होना जरूरी था, लेकिन अब यह शर्त घटाकर सिर्फ 12 महीने कर दी गई है. यानी नौकरी का मात्र एक साल पूरा करने पर भी आप यह सुविधा प्राप्त कर सकते हैं. इसके अलावा पूर्व की तरह अब शादी का कार्ड या किसी भी तरह का प्रमाण पत्र जमा करने की आवश्यकता नहीं है. सिर्फ एक साधारण घोषणा पत्र (Declaration Form) देना होगा, जिससे प्रक्रिया बेहद आसान और तेज हो गई है.
नए नियमों से बढ़ी सुविधाएं
ईपीएफओ की इस नई व्यवस्था में सबसे बड़ा बदलाव यही है कि कर्मचारी अधिकतम राशि, यानी पूरा पीएफ फंड निकाल सकते हैं. निकासी की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ सर्विस ईयर की शर्तों को कम करना कर्मचारियों के हित में एक बड़ा कदम है. शादी जैसे भावनात्मक और वित्तीय रूप से महत्वपूर्ण अवसरों पर इस बदलाव से कर्मचारियों को काफी राहत मिलने की उम्मीद है.
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