कश्मीर पर पाकिस्तान की साइड लेना EU को पड़ा भारी, भारत ने लगाई लताड़, जानें क्या कहा

India On Pakistan EU Kashmir Statement: पाकिस्तान और यूरोपीय संघ के संयुक्त बयान में जम्मू-कश्मीर का उल्लेख किए जाने पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं और इस विषय पर बाहरी पक्षों की टिप्पणी पूरी तरह अनुचित है.

Taking Pakistan side on Kashmir cost the European Union dearly India reprimanded it
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India On Pakistan EU Kashmir Statement: पाकिस्तान और यूरोपीय संघ के संयुक्त बयान में जम्मू-कश्मीर का उल्लेख किए जाने पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं और इस विषय पर बाहरी पक्षों की टिप्पणी पूरी तरह अनुचित है.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत अपने आंतरिक मामलों से जुड़े मुद्दों को किसी भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाए जाने को स्वीकार नहीं करता. उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न हिस्सा हैं और जिनका इस विषय से कोई संबंध नहीं है, उन्हें इस पर टिप्पणी करने से बचना चाहिए.

कश्मीर पर तीसरे पक्ष की भूमिका नहीं

विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया केवल पाकिस्तान या यूरोपीय संघ तक सीमित नहीं रही. भारत ने स्पष्ट संकेत दिया कि कश्मीर से जुड़े मामलों में किसी तीसरे पक्ष की भूमिका स्वीकार्य नहीं है. सरकार का कहना है कि यह पूरी तरह भारत का आंतरिक विषय है और इस पर बाहरी हस्तक्षेप का कोई औचित्य नहीं है.

नेपाल सीमा विवाद पर भी भारत का रुख स्पष्ट

नेपाल से जुड़े सीमा विवाद के मुद्दे पर भी विदेश मंत्रालय ने अपना पक्ष रखा. रणधीर जायसवाल ने बताया कि भारत-नेपाल सीमा का लगभग 98 प्रतिशत हिस्सा पहले ही निर्धारित किया जा चुका है. हालांकि कुछ क्षेत्रों में अभी भी समाधान की प्रक्रिया जारी है, जिसका प्रमुख कारण गंडक नदी के मार्ग में बदलाव बताया गया है.

उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच संयुक्त सर्वेक्षण और मैपिंग का काम चल रहा है. सीमा से जुड़े शेष मुद्दों को सुलझाने के लिए स्थापित द्विपक्षीय तंत्र लगातार काम कर रहे हैं.

नेपाल मामले में बाहरी दखल की गुंजाइश नहीं

भारत ने साफ किया कि नेपाल के साथ सीमा संबंधी मुद्दे पूरी तरह द्विपक्षीय हैं और इनके समाधान के लिए किसी तीसरे पक्ष की आवश्यकता नहीं है. विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत और नेपाल आपसी बातचीत और सहयोग के माध्यम से सभी लंबित मामलों का समाधान निकालने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

वेनेजुएला की उपराष्ट्रपति का भारत दौरा

विदेश मंत्रालय ने यह भी जानकारी दी कि वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज 3 से 7 जून तक भारत की यात्रा पर रहेंगी. इस दौरान उनके साथ विदेश, वित्त, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, परिवहन और संचार से जुड़े वरिष्ठ मंत्री भी आएंगे.

कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर होगी चर्चा

दौरे के दौरान भारतीय नेतृत्व और वेनेजुएला के प्रतिनिधिमंडल के बीच ऊर्जा, व्यापार, निवेश, स्वास्थ्य, फार्मास्यूटिकल्स, परिवहन और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होगी. भारत और वेनेजुएला के बीच ऊर्जा क्षेत्र में पहले से मजबूत साझेदारी है और इस यात्रा को द्विपक्षीय संबंधों को नई मजबूती देने की दिशा में अहम माना जा रहा है.

भारत की ताजा प्रतिक्रिया से यह साफ संकेत गया है कि देश अपने आंतरिक मामलों पर किसी भी बाहरी टिप्पणी को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है और क्षेत्रीय मुद्दों पर अपनी स्पष्ट और स्वतंत्र नीति पर कायम है.

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