अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे भारतीय नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी है. विदेश मंत्रालय के अनुसार, साल 2025 से अब तक अमेरिका ने कुल 4,840 भारतीय नागरिकों को भारत वापस भेजा है. इनमें बड़ी संख्या उन लोगों की है जो बिना वैध दस्तावेजों के अमेरिका में रह रहे थे.
2026 में अब तक 1,273 भारतीय लौटे
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि 1 जनवरी 2026 से जुलाई के अंत तक अमेरिका से 1,273 भारतीय नागरिकों को वापस भेजा गया है. वहीं, पूरे साल 2025 में 3,567 भारतीयों को निर्वासित किया गया था. इस तरह दोनों वर्षों को मिलाकर अब तक 4,840 भारतीय भारत लौट चुके हैं.
पहचान की पुष्टि के बाद ही होती है वापसी
रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत सरकार ऐसे मामलों में कई देशों के साथ मिलकर काम करती है. जब किसी व्यक्ति को भारत भेजने का मामला सामने आता है, तो सबसे पहले उसकी नागरिकता की जांच की जाती है.
उन्होंने बताया कि जब यह पूरी तरह साफ हो जाता है कि संबंधित व्यक्ति भारतीय नागरिक है, तभी उसकी भारत वापसी की प्रक्रिया पूरी की जाती है.
अवैध प्रवासियों पर सख्त कार्रवाई
अमेरिका में अवैध प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई लगातार तेज की गई है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने बिना वैध दस्तावेजों के रह रहे लोगों के खिलाफ सख्त अभियान चलाया है. इसी अभियान के तहत बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों को भी वापस भेजा गया है.
भारत ने उठाया सम्मानजनक व्यवहार का मुद्दा
भारत सरकार ने अमेरिका से वापस भेजे जा रहे भारतीय नागरिकों के साथ होने वाले व्यवहार पर भी चिंता जताई है. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पहले भी कहा था कि इस मुद्दे पर अमेरिकी अधिकारियों से बातचीत की गई है ताकि सभी लोगों के साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित किया जा सके.
भारत ने खास तौर पर यह आग्रह किया था कि महिलाओं और बच्चों को वापसी के दौरान हथकड़ी या जंजीरों में न रखा जाए.
कुछ मामलों के बाद बढ़ी थी चिंता
वापसी के दौरान कुछ भारतीय नागरिकों के साथ कथित खराब व्यवहार की खबरों के बाद यह मुद्दा और गंभीर हो गया था. एक बुजुर्ग महिला के साथ कथित दुर्व्यवहार और कुछ उड़ानों में महिलाओं व बच्चों को बंधन में रखे जाने की खबरों पर भारत ने अमेरिका के सामने औपचारिक रूप से अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी.
भारत का कहना है कि किसी भी नागरिक की वापसी कानून के अनुसार हो सकती है, लेकिन पूरी प्रक्रिया के दौरान उसके सम्मान और मानवाधिकारों का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए.
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