पाकिस्‍तान को भी साथ में मिली आजादी, फिर आज इतना आगे कैसे निकल गया भारत, कैसे भिखारी बना आतंकिस्तान?

15 अगस्त 1947 - यह तारीख भारतीय उपमहाद्वीप के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक मानी जाती है. इसी दिन भारत को ब्रिटिश शासन से आजादी मिली.

How did India go so far ahead of Pakistan
प्रतिकात्मक तस्वीर/ Sociel Media

नई दिल्ली/इस्लामाबाद: 15 अगस्त 1947 - यह तारीख भारतीय उपमहाद्वीप के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक मानी जाती है. इसी दिन भारत को ब्रिटिश शासन से आजादी मिली. परंतु स्वतंत्रता की यह सुबह विभाजन की काली रात के साथ आई थी. भारत के साथ-साथ पाकिस्तान नामक एक नया राष्ट्र भी अस्तित्व में आया, जो धार्मिक आधार पर बना.

हालांकि दोनों देशों ने एक ही दिन स्वतंत्रता प्राप्त की, परंतु समय के साथ दोनों की दिशा और दशा में गहरा अंतर दिखाई देने लगा. जहां भारत ने वैश्विक मंच पर खुद को एक प्रगतिशील, लोकतांत्रिक और आर्थिक दृष्टि से शक्तिशाली देश के रूप में स्थापित किया, वहीं पाकिस्तान अब भी आर्थिक और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा है.

आजादी की शुरुआत: समान बिंदु, अलग रास्ते

1947 में आजादी मिलने के बाद भारत और पाकिस्तान दोनों लगभग एक जैसी सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों से गुजर रहे थे. विभाजन से उपजे दंगों, शरणार्थियों की भारी आवाजाही, सीमित संसाधन और पिछड़ी अर्थव्यवस्था ये सब चुनौतियाँ दोनों देशों के सामने थीं.

शुरुआत में पाकिस्तान का स्वतंत्रता दिवस भी 15 अगस्त को ही मनाया गया. हालांकि बाद में, संभवतः प्रशासनिक कारणों या धार्मिक दृष्टिकोण से, पाकिस्तान ने इसे बदलकर 14 अगस्त कर दिया.

औपनिवेशिक लूट की विरासत

अंग्रेजों के शासन से पहले भारत विश्व की समृद्ध सभ्यताओं में से एक था. आर्थिक इतिहासकार एंगस मैडिसन के अनुसार, 1700 के आसपास वैश्विक GDP में भारत की हिस्सेदारी करीब 24.4% थी. लेकिन 200 वर्षों की ब्रिटिश लूट और शोषण ने भारत की आर्थिक रीढ़ तोड़ दी.

ऑक्सफैम की एक रिपोर्ट के मुताबिक, केवल 1765 से 1900 के बीच ब्रिटिश साम्राज्य ने भारत से 64.82 ट्रिलियन डॉलर मूल्य की संपत्ति निकाली. जब 1947 में वे भारत छोड़कर गए, तब भारत का वैश्विक GDP में हिस्सा केवल 4.2% रह गया था.

शुरुआत में पाकिस्तान की तेज रफ्तार

आजादी के बाद, विकास की दौड़ में शुरुआत में पाकिस्तान ने भारत की तुलना में तेज रफ्तार दिखाई. 1950 से लेकर 1980 के दशक तक पाकिस्तान की औसत आर्थिक वृद्धि दर भारत से अधिक थी लगभग 6%, जबकि भारत की औसतन वृद्धि दर 3-4% के बीच रही.

इसका मुख्य कारण था अमेरिका और पश्चिमी देशों से मिला वित्तीय और सैन्य समर्थन, विशेष रूप से शीतयुद्ध के दौरान. इसके अतिरिक्त, पश्चिम एशिया में काम करने वाले पाकिस्तानी प्रवासी भी बड़ी मात्रा में देश में धन भेजते रहे, जिससे देश की विदेशी मुद्रा स्थिति मजबूत रही.

इसके अलावा पाकिस्तान ने अपने पूर्वी हिस्से जिसे अब बांग्लादेश के नाम से जाना जाता है से भी व्यापार और संसाधनों का लाभ उठाया. यह लाभ 1971 तक रहा, जब भारत-पाक युद्ध के बाद बांग्लादेश का निर्माण हुआ.

भारत में बदलाव: उदारीकरण की शुरुआत

1991 में भारत ने अपने आर्थिक इतिहास में एक बड़ा मोड़ लिया. उस समय के प्रधानमंत्री नरसिंह राव और वित्त मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में भारत में आर्थिक उदारीकरण, निजीकरण, और वैश्वीकरण की नीतियाँ लागू की गईं.

इन सुधारों का असर यह हुआ कि भारत की अर्थव्यवस्था ने नई गति पकड़ी. 2000 के दशक में भारत की GDP वृद्धि दर औसतन 7-8% तक पहुँच गई, जो कि दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक बन गई. भारत में निवेश, सेवा क्षेत्र, IT उद्योग और बुनियादी ढांचे का विकास तेजी से हुआ.

पाकिस्तान का पतन: कट्टरपंथ और आर्थिक अस्थिरता

जहां भारत ने आर्थिक सुधारों से प्रगति की राह चुनी, वहीं पाकिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता और सैन्य शासन ने लोकतंत्र को कमजोर कर दिया. कई बार सेना ने चुनी हुई सरकारों को हटाकर तानाशाही स्थापित की, जिससे न केवल राजनीतिक व्यवस्था बल्कि अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हुई.

इसके अलावा पाकिस्तान में इस्लामिक कट्टरपंथ को राजनीतिक उद्देश्यों के लिए बढ़ावा दिया गया, जिससे देश में आतंकी गतिविधियों में वृद्धि हुई और वैश्विक स्तर पर उसकी छवि धूमिल हुई. इसके परिणामस्वरूप अंतरराष्ट्रीय निवेशक पाकिस्तान से दूरी बनाने लगे.

विश्व बैंक और IMF की रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत 2028 तक जर्मनी को पीछे छोड़कर तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है. वहीं पाकिस्तान का भारी विदेशी कर्ज, IMF पर निर्भरता, और गिरता रुपया देश की आर्थिक स्थिति को लगातार डगमगाता रहा है.

भारत की जनसंख्या को बना दिया संसाधन

भारत की विशाल जनसंख्या को उसके लिए बोझ नहीं बल्कि संसाधन बना दिया गया. शिक्षा, तकनीक, और डिजिटल भारत अभियान के तहत युवाओं को सशक्त किया गया. देश में स्टार्टअप संस्कृति, डिजिटल भुगतान प्रणाली और अंतरिक्ष अनुसंधान में भी जबरदस्त प्रगति हुई.

इसके विपरीत पाकिस्तान अपनी जनसंख्या वृद्धि को संसाधन में तब्दील नहीं कर पाया. शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी क्षेत्रों में निवेश की कमी ने स्थिति को और खराब किया.

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