हमास ने मान ली ट्रंप की बात, हथियार छोड़ने को हुए राजी; लेकिन इज़रायल के सामने रख दी ये शर्त

Hamas Arms Surrender: इज़रायल और हमास के बीच महीनों से जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए अमेरिका ने एक विस्तृत 20-सूत्रीय पहल तैयार की थी. इस योजना के तहत मानवीय आधार पर बंधकों की रिहाई, युद्धविराम, और गाज़ा में एक स्थायी राजनीतिक व्यवस्था की शुरुआत जैसे कदम शामिल थे.

Hamas accepted Trump words agreed to give up weapons but put this condition before Israel
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Hamas Arms Surrender: इज़रायल और हमास के बीच महीनों से जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए अमेरिका ने एक विस्तृत 20-सूत्रीय पहल तैयार की थी. इस योजना के तहत मानवीय आधार पर बंधकों की रिहाई, युद्धविराम, और गाज़ा में एक स्थायी राजनीतिक व्यवस्था की शुरुआत जैसे कदम शामिल थे. शुरुआत में इसका कुछ असर भी दिखाई दिया—हमास के कब्जे में मौजूद कई जीवित बंधकों को रिहा किया गया. 

लेकिन तनाव तब बढ़ गया, जब इज़रायल ने आरोप लगाया कि संगठन मृत इज़रायली नागरिकों के शवों के अवशेष वापस नहीं कर रहा है. इस विवाद ने संघर्ष को फिर भड़का दिया और स्थिति तनावपूर्ण हो गई. अब, घटनाओं ने नया मोड़ लिया है. हमास ने संकेत दिया है कि वह अपने हथियार छोड़ने पर विचार कर सकता है लेकिन इसके लिए उन्होंने एक महत्वपूर्ण और कठोर शर्त रखी है.

गाज़ा से इज़रायली सेना हटे, तभी संभव होगा निरस्त्रीकरण

फिलिस्तीनी संगठन हमास का कहना है कि वह तभी हथियार डालने को तैयार है, जब इज़रायल अपनी सेना को पूरी तरह गाज़ा से वापस बुला ले. संगठन के प्रमुखों ने स्पष्ट किया कि हथियारों का अस्तित्व उनके अनुसार "इज़रायली सैन्य कार्रवाई और कब्जे की प्रतिक्रिया" है. इसलिए, जब तक यह स्थिति बनी रहेगी, हथियार छोड़ने का प्रश्न नहीं उठता.

गाज़ा में हमास के शीर्ष नेता और वार्ताकार खलील अल-हय्या ने कहा कि यदि कब्जा समाप्त होता है, तो संगठन अपने हथियार एक फिलिस्तीनी प्रशासन को सौंपने पर सहमत हो सकता है, एक ऐसे स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य को, जिसकी स्थापना लंबे समय से मांग में है.

उन्होंने यह भी कहा कि वे केवल ऐसी अंतरराष्ट्रीय निगरानी को स्वीकार करेंगे जिसका उद्देश्य युद्धविराम का पालन सुनिश्चित करना हो, न कि हमास को निरस्त्र करना. उनका कहना था कि संयुक्त राष्ट्र की एक तटस्थ सीमा सुरक्षा फोर्स को स्वीकार किया जा सकता है, पर किसी ऐसी ताकत को नहीं, जिसका कार्य हमास के हथियार छीनना हो.

अमेरिकी 20-सूत्रीय योजना क्या कहती है?

अमेरिका की ओर से तैयार किए गए व्यापक प्रस्ताव में कई प्रमुख बिंदु शामिल हैं, जिनमें हमास का पूर्ण निरस्त्रीकरण, हथियार छोड़ने वाले सदस्यों को गाज़ा छोड़ने की अनुमति, एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल की नियुक्ति, और "बोर्ड ऑफ पीस" नाम की अंतरिम प्रशासनिक सरकार की स्थापना.

इस योजना का उद्देश्य गाज़ा में एक स्थायी और शांतिपूर्ण राजनीतिक ढांचे को स्थापित करना था. लेकिन हमास ने इस प्रस्ताव को एक बार फिर खारिज कर दिया है, जैसा वह पहले भी कर चुका है.

कतर और मिस्र का रुख, युद्धविराम का रास्ता इज़रायली सेना की वापसी से ही साफ

संघर्ष समाप्त करने में मध्यस्थता कर रहे कतर और मिस्र ने भी साफ कहा है कि युद्धविराम को पूरी तरह लागू करने के लिए दो शर्तें अनिवार्य हैं, गाज़ा से इज़रायली सेना की पूर्ण वापसी और एक अंतरराष्ट्रीय निगरानी बल की तैनाती. इन देशों ने यह भी आरोप लगाया कि बार-बार होने वाले युद्धविराम उल्लंघन के लिए इज़रायल जिम्मेदार है, इसलिए उसे हिंसा रोकने के लिए कदम उठाने चाहिए.

समाधान की राह अभी भी कठिन

हालांकि हमास ने पहली बार सार्वजनिक रूप से हथियार छोड़ने की संभावना जताई है, लेकिन जिस राजनीतिक और सैन्य बदलाव की वह मांग कर रहा है, वह इज़रायल के वर्तमान रुख से मेल नहीं खाता. इज़रायल बार-बार कह चुका है कि युद्ध का उद्देश्य "हमास का पूर्ण विनाश" है, इसलिए उसके लिए हमास को हथियार सौंपकर एक फिलिस्तीनी राज्य को सौंपने का प्रस्ताव स्वीकार करना मुश्किल है.

दूसरी ओर, हमास का मानना है कि जब तक सैन्य कब्जा खत्म नहीं होता, हथियार डालना आत्मसमर्पण जैसा कदम होगा. इन सबके बीच अमेरिका की शांति योजना बीच में अटक गई है, और भविष्य का रास्ता अभी भी अनिश्चित है. यही वजह है कि संघर्ष की आग भले धीमी हो, पर पूरी तरह बुझने के कोई साफ संकेत नजर नहीं आ रहे.

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