Haiwaan Movie Review: अक्षय कुमार और सैफ अली खान को एक साथ पर्दे पर देखना अपने आप में खास है, लेकिन ‘हैवान’ में दोनों जिस अंदाज में नजर आते हैं, वह उनकी अब तक की इमेज से काफी अलग है. डायरेक्टर प्रियदर्शन ने इस बार कॉमेडी से दूर एक डार्क और इंटेंस साइकोलॉजिकल थ्रिलर का सहारा लिया है, जहां कहानी से ज्यादा जरूरी है कि पर्दे पर चल रहे खेल को समझा जाए. फिल्म शुरुआत से ही दर्शकों के सामने कई सवाल खड़े करती है और उनके जवाब धीरे-धीरे सामने आते हैं. करीब 2 घंटे 44 मिनट लंबी यह फिल्म सस्पेंस, सर्वाइवल, इमोशन और एक्शन को साथ लेकर चलती है. फिल्म को 4 स्टार की रेटिंग दी गई है.
क्या है ‘हैवान’ की कहानी?
‘हैवान’ की कहानी दो ऐसे किरदारों के इर्द-गिर्द घूमती है, जिनके बीच का टकराव धीरे-धीरे एक खतरनाक मानसिक खेल में बदल जाता है. श्याम अपनी आंखों के बिना दुनिया को समझने की कोशिश करता है, जबकि परशुराम का किरदार रहस्य और अनिश्चितता से भरा हुआ है. दोनों के बीच बढ़ता संघर्ष फिल्म को सिर्फ आम थ्रिलर नहीं रहने देता, बल्कि इसे दिमाग, इंस्टिंक्ट और सर्वाइवल की कहानी बना देता है. फिल्म की खास बात यह है कि मेकर्स कहानी के बड़े खुलासे जल्दबाजी में नहीं करते. इसलिए इसके प्लॉट के बारे में ज्यादा जानकारी देना फिल्म के सस्पेंस को खराब कर सकता है.
अक्षय कुमार ने छोड़ी अपनी पुरानी इमेज
परशुराम के किरदार में अक्षय कुमार को एक अलग अवतार में देखना दिलचस्प है. उनका किरदार जरूरत से ज्यादा गुस्सा या आक्रामकता दिखाने के बजाय अपने हाव-भाव और बॉडी लैंग्वेज से प्रभाव पैदा करता है. अक्षय ने किरदार की खामोशी और उसके भीतर छिपे रहस्य को अच्छी तरह पकड़ने की कोशिश की है. उनकी परफॉर्मेंस में सबसे खास बात उनका कंट्रोल नजर आता है, जिससे दर्शक लगातार यह सोचने पर मजबूर रहता है कि आखिर इस किरदार के दिमाग में चल क्या रहा है.
सैफ अली खान की एक्टिंग बनी फिल्म की ताकत
श्याम के किरदार में सैफ अली खान ने काफी नैचुरल परफॉर्मेंस दी है. उनकी आवाज, सुनने की क्षमता और आसपास मौजूद छोटी-छोटी चीजों को महसूस करने का अंदाज किरदार को विश्वसनीय बनाता है. श्याम की कमजोरी उसकी सबसे बड़ी सीमा नहीं बनती, बल्कि वही उसकी ताकत में बदलती दिखाई देती है. सैफ ने इस किरदार को बिना ओवरड्रामैटिक किए सहज तरीके से निभाया है और यही उनकी परफॉर्मेंस को खास बनाता है.
सपोर्टिंग कास्ट ने भी छोड़ी छाप
पहल चौधरी के किरदार को लेकर फिल्म ज्यादा खुलासा नहीं करती और यही इसके सस्पेंस का हिस्सा है. उनका ट्रैक कहानी में भावनात्मक गहराई जोड़ता है. वहीं सैयामी खेर, श्रिया पिलगांवकर, बोमन ईरानी और शारिब हाशमी जैसे कलाकार अपने-अपने किरदारों में कहानी को मजबूती देते हैं. असरानी की मौजूदगी भी फिल्म के इमोशनल हिस्से को असरदार बनाने में मदद करती है. मोहनलाल की स्पेशल अपीयरेंस फिल्म के मलयालम कनेक्शन को और दिलचस्प बनाती है.
प्रियदर्शन ने बदला अपना अंदाज
‘हैवान’ में प्रियदर्शन अपने पुराने और पहचाने जाने वाले अंदाज से काफी अलग दिखाई देते हैं. फिल्म का टोन डार्क और सीरियस है, जहां कई मौकों पर डायलॉग से ज्यादा माहौल कहानी को आगे बढ़ाता है. निर्देशक ने सस्पेंस को धीरे-धीरे तैयार किया है और दर्शक को हर अगले मोड़ के लिए उत्सुक बनाए रखा है. 2 घंटे 44 मिनट का रनटाइम जरूर थोड़ा लंबा महसूस हो सकता है, लेकिन फिल्म का मुख्य कॉन्फ्लिक्ट लगातार कहानी के केंद्र में बना रहता है.
BGM ने बढ़ाई थ्रिलर की टेंशन
फिल्म के माहौल को बनाने में प्रीतम का बैकग्राउंड म्यूजिक अहम भूमिका निभाता है. तनाव वाले सीक्वेंस में BGM सस्पेंस को और मजबूत करता है, जबकि ‘मेरे हीरो हैं’ जैसे गाने फिल्म के भावनात्मक हिस्सों को सपोर्ट करते हैं. ‘रंगियारा’ ट्रैवल सीक्वेंस को अलग मूड देता है. अच्छी बात यह है कि म्यूजिक कहानी से अलग होकर नहीं चलता, बल्कि उसके मूड को आगे बढ़ाने का काम करता है.
‘ओप्पम’ से कनेक्शन, लेकिन ट्रीटमेंट अलग
‘हैवान’ की कहानी की जड़ें मलयालम फिल्म ‘ओप्पम’ से जुड़ी हैं, लेकिन प्रियदर्शन ने इसके ट्रीटमेंट में बदलाव करते हुए इसे हिंदी दर्शकों के हिसाब से ज्यादा कमर्शियल बनाने की कोशिश की है. कहानी में एक्शन, इमोशन और थ्रिल का संतुलन दिखाई देता है. अक्षय कुमार और सैफ अली खान की जोड़ी फिल्म को अलग आकर्षण देती है, वहीं मोहनलाल की मौजूदगी इसके मूल कनेक्शन को खास बनाती है.
Verdict: पैसा वसूल!
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