नई दिल्ली: दुनिया की प्रमुख टेक कंपनियों में शुमार गूगल ने एक बार फिर छंटनी की प्रक्रिया को अंजाम देते हुए 100 से ज्यादा कर्मचारियों को नौकरी से हटा दिया है. यह छंटनी मुख्य रूप से डिजाइन से जुड़े विभागों में की गई है, जहां यूजर इंटरफेस (UI) और यूजर एक्सपीरियंस (UX) डिज़ाइन से जुड़े पदों पर असर पड़ा है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह कदम गूगल की रणनीतिक रूप से बदलती प्राथमिकताओं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को तेजी से अपनाने की नीति के तहत उठाया गया है. कंपनी का मानना है कि डिज़ाइन प्रोसेस को ऑटोमेट करने और नई तकनीकों के अनुकूल बनने के लिए पुराने रोल्स को खत्म करना जरूरी हो गया है.
क्यों की गई ये छंटनी?
गूगल अब जेनरेटिव एआई (Generative AI) पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित कर रही है. कंपनी ने अपने सर्च इंजन और अन्य कोर प्रोडक्ट्स में AI तकनीक को तेजी से एकीकृत करना शुरू कर दिया है. इससे पारंपरिक डिज़ाइन भूमिकाएं, जो पहले मैन्युअल रूप से काम करती थीं, अब ऑटोमेशन की वजह से अप्रासंगिक होती जा रही हैं.
AI के बढ़ते प्रभाव के चलते गूगल अब उन कर्मचारियों को प्राथमिकता दे रही है, जिनके पास नए जमाने के स्किल सेट्स हैं, जैसे मशीन लर्निंग, डेटा इंजीनियरिंग, और एआई मॉडल इंटिग्रेशन.
सुंदर पिचाई की 'AI-फर्स्ट' रणनीति
गूगल के CEO सुंदर पिचाई पहले ही साफ कर चुके हैं कि कंपनी अब एक 'AI-फर्स्ट' कंपनी बन रही है. इसका मतलब है कि आने वाले समय में गूगल के लगभग सभी उत्पाद और सेवाएं कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से संचालित होंगी.
पिचाई ने हाल ही में एक बैठक में कहा था कि कंपनी को अब "मॉडर्न गूगल" के लिए नए प्रकार की कार्यशैली और दक्षताओं की आवश्यकता है. इसी के तहत गैर-जरूरी खर्चों को कम करना और कार्यकुशलता (efficiency) बढ़ाना उनकी प्राथमिकता में है.
पहले भी की गई है नौकरी में कटौती
गूगल पिछले कुछ वर्षों में कई चरणों में कर्मचारियों की संख्या में कमी करता आ रहा है:
AI प्रतिस्पर्धा भी है बड़ी वजह
गूगल की यह रणनीति सिर्फ आंतरिक बदलावों तक सीमित नहीं है. बाहरी प्रतिस्पर्धा, खासतौर पर OpenAI जैसे उभरते एआई स्टार्टअप्स, और Microsoft जैसे दिग्गजों से मिल रही चुनौती ने गूगल को अपने कोर बिजनेस, खासकर सर्च इंजिन को नए सिरे से मजबूत करने की दिशा में कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है.
गूगल को डर है कि अगर उसने तेज़ी से बदलाव नहीं किए, तो नए AI-आधारित प्रोडक्ट्स उसके पारंपरिक बिजनेस मॉडल को कमजोर कर सकते हैं.
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