UPI Transaction Charges: बीते कुछ महीनों से यूपीआई इस्तेमाल करने वाले करोड़ों लोगों के मन में एक ही सवाल घूम रहा था, क्या आने वाले समय में यूपीआई ट्रांजेक्शन पर चार्ज देना पड़ेगा? यह चिंता तब और बढ़ गई थी जब आरबीआई गवर्नर की ओर से यह बयान आया था कि कोई भी सेवा पूरी तरह “फ्री” नहीं होती और किसी न किसी स्तर पर उसकी लागत किसी को वहन करनी पड़ती है. इसी वजह से लोगों को लगने लगा था कि कहीं भविष्य में यूपीआई पर भी टैक्स या अतिरिक्त शुल्क न लगा दिया जाए.
अब इस पूरे मामले पर सरकार ने स्थिति साफ कर दी है. केंद्रीय बजट के जरिए यह स्पष्ट किया गया है कि यूपीआई ट्रांजेक्शन पर कोई नया टैक्स या लेवी लगाने की योजना नहीं है और आम यूजर्स के लिए यह सुविधा आगे भी मुफ्त बनी रहेगी.
बजट में यूपीआई को लेकर क्या कहा गया
वित्तीय सेवा सचिव एम. नागराजू ने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में यूपीआई को सपोर्ट देने के लिए 2,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. इस बजटीय मदद का सीधा मतलब यही है कि यूपीआई के जरिए होने वाले ट्रांजेक्शन आम लोगों के लिए फ्री बने रहेंगे.
उन्होंने यह भी बताया कि सरकार डिजिटल पेमेंट सिस्टम को बढ़ावा देने के लिए लगातार आर्थिक सहायता देती रही है. इससे पहले 2025-26 के संशोधित अनुमान में यूपीआई और रुपे डेबिट कार्ड से जुड़े इंसेंटिव के लिए 2,196 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी बजट में यह साफ किया कि लोकप्रिय डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म यूपीआई और रुपे कार्ड को आगे बढ़ाने के लिए सब्सिडी जारी रहेगी. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आम उपभोक्ताओं और छोटे व्यापारियों पर किसी तरह का अतिरिक्त वित्तीय बोझ न पड़े.
क्या भविष्य में यूपीआई पर चार्ज लग सकता है?
सरकार की ओर से दिए गए मौजूदा संकेतों के अनुसार फिलहाल यूपीआई ट्रांजेक्शन पर कोई चार्ज लगाने की योजना नहीं है. बजट में सब्सिडी का प्रावधान इस बात का संकेत है कि सरकार यूपीआई को एक सार्वजनिक डिजिटल सुविधा के तौर पर देख रही है, जिसे ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना प्राथमिकता है.
इसका फायदा यह है कि छोटे दुकानदार, स्ट्रीट वेंडर और आम ग्राहक बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल कर सकते हैं, जिससे कैशलेस इकॉनमी को बढ़ावा मिलता है.
साइबर फ्रॉड को लेकर क्या कहा गया
यूपीआई से जुड़े साइबर फ्रॉड पर पूछे गए सवाल के जवाब में वित्तीय सेवा सचिव ने कहा कि बैंकों की तकनीकी या सिस्टम से जुड़ी गड़बड़ियों के कारण होने वाले साइबर फ्रॉड की हिस्सेदारी तीन प्रतिशत से भी कम है. उनके मुताबिक ज्यादातर मामलों में यूजर्स की लापरवाही या ठगी के नए-नए तरीकों की वजह से धोखाधड़ी होती है.
उन्होंने लोगों को सतर्क रहने की सलाह देते हुए कहा कि अनजान लिंक पर क्लिक न करें, ओटीपी या पिन किसी से साझा न करें और संदिग्ध कॉल या मैसेज से दूरी बनाए रखें.
विकसित भारत के लक्ष्य के लिए बैंकों की भूमिका
बजट में बैंकों को “विकसित भारत” के लक्ष्य के अनुरूप मजबूत बनाने के लिए एक उच्च अधिकार प्राप्त समिति के गठन का भी प्रस्ताव रखा गया है. इस पर नागराजू ने कहा कि फिलहाल समिति के कामकाज की शर्तें और नियम तैयार किए जा रहे हैं.
इसके बाद औपचारिक रूप से समिति का गठन किया जाएगा. इस पहल का मकसद यह तय करना है कि भविष्य में भारतीय बैंकिंग सिस्टम को कैसे और अधिक मजबूत, तकनीकी रूप से सक्षम और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया जाए.
बैंकों की मौजूदा स्थिति
वित्तीय सेवा सचिव के मुताबिक इस समय बैंकों की वित्तीय स्थिति पहले से काफी बेहतर है. बैंकों में एनपीए (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स) का स्तर कम हुआ है और मुनाफे में भी सुधार देखा गया है.
उन्होंने यह भी कहा कि भारत जैसे बड़े देश के लिए तीन से चार मजबूत और बड़े बैंकों का होना जरूरी है, ताकि अर्थव्यवस्था की जरूरतों को पूरा किया जा सके और बड़े स्तर पर वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा सके.
सरकारी बैंकों में एफडीआई बढ़ाने पर विचार
सरकार सरकारी बैंकों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की सीमा बढ़ाने पर भी विचार कर रही है. फिलहाल सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में एफडीआई की सीमा 20 प्रतिशत है. इसे बढ़ाकर 49 प्रतिशत करने को लेकर मंत्रालयों के बीच बातचीत चल रही है. नागराजू ने बताया कि इस कदम का उद्देश्य सरकारी बैंकों के पूंजी आधार को मजबूत करना है, ताकि वे भविष्य में बढ़ती वित्तीय जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा कर सकें.
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