Cabinet Meeting Decisions: देश में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और पूर्वोत्तर भारत की कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने के लिए केंद्र सरकार ने दो बड़े फैसलों पर मुहर लगा दी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में एक ओर जहां 23,731 करोड़ रुपये की गोबरधन (नेशनल सर्कुलर बायोएनर्जी) योजना को मंजूरी दी गई, वहीं दूसरी ओर असम में बाईहाटा चारियाली से तेजपुर तक अत्याधुनिक चार लेन एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे के निर्माण को भी स्वीकृति मिल गई. सरकार का मानना है कि ये दोनों परियोजनाएं न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ताकत देंगी बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा और पूर्वोत्तर के विकास को भी नई दिशा प्रदान करेंगी.
गोबरधन योजना से बदलेगी गांवों की तस्वीर
नई गोबरधन योजना का उद्देश्य देशभर में उपलब्ध जैविक संसाधनों का बेहतर उपयोग करना है. गोबर, कृषि अवशेष, गन्ना मिलों से निकलने वाला प्रेसमड, नगर निकायों का जैविक कचरा और अन्य बायोमास अब बेकार नहीं जाएगा, बल्कि इन्हें स्वच्छ ईंधन में बदला जाएगा. सरकार ने इस योजना को वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक लागू करने का फैसला किया है. इसके जरिए संपीड़ित बायोगैस (सीबीजी) के उत्पादन को बड़े स्तर पर बढ़ाने की रणनीति तैयार की गई है.
किसानों की आय बढ़ाने पर रहेगा खास फोकस
सरकार का मानना है कि इस योजना का सबसे बड़ा लाभ किसानों को मिलेगा. सीबीजी संयंत्रों के लिए गोबर और कृषि अवशेषों की खरीद होने से किसानों को अपनी फसल के अवशेषों और अन्य जैविक सामग्री से अतिरिक्त आय प्राप्त होगी. इससे खेतों में पराली जलाने जैसी समस्याओं में भी कमी आने की उम्मीद है. ग्रामीण क्षेत्रों में नए उद्योग विकसित होंगे और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे.
स्वच्छ ऊर्जा के साथ मजबूत होगी देश की ऊर्जा सुरक्षा
सरकार ने इस योजना के माध्यम से घरेलू स्तर पर सीबीजी उत्पादन को लगभग दस गुना तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है. यदि यह लक्ष्य हासिल होता है तो आयातित जीवाश्म ईंधन पर देश की निर्भरता कम होगी. साथ ही पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा क्योंकि जैविक कचरे का वैज्ञानिक तरीके से उपयोग होने से ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी आएगी और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को नई गति मिलेगी.
निवेशकों और उद्योगों के लिए भी तैयार किया गया मजबूत ढांचा
गोबरधन योजना केवल किसानों तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि निजी निवेशकों और उद्योगों को भी आकर्षित करने का प्रयास करेगी. सरकार ने सीबीजी उत्पादकों के लिए सुनिश्चित खरीद व्यवस्था तैयार करने का निर्णय लिया है ताकि उन्हें स्थायी बाजार मिल सके. इसके अलावा प्रशासनिक मूल्य प्रणाली के तहत सीबीजी की कीमत 2,110 रुपये प्रति एमएमबीटीयू तय करने का ढांचा बनाया गया है, जिससे निवेशकों को आय का भरोसा मिल सके.
नई परियोजनाओं को मिलेगा वित्तीय सहयोग
सरकार पात्र नई परियोजनाओं को उनकी क्षमता के आधार पर पूंजी सहायता भी उपलब्ध कराएगी. प्रति टन प्रतिदिन क्षमता पर अधिकतम दो करोड़ रुपये तक की सहायता देने का प्रावधान किया गया है. इसके अलावा एमएसएमई और अन्य परियोजनाओं को आसान वित्त उपलब्ध कराने के लिए क्रेडिट गारंटी की सुविधा भी दी जाएगी. सरकार का उद्देश्य है कि वित्तीय बाधाओं के कारण कोई भी व्यवहारिक परियोजना प्रभावित न हो.
गैस नेटवर्क से जुड़ेंगे सीबीजी संयंत्र
योजना के तहत देशभर में स्थापित होने वाले सीबीजी संयंत्रों को गैस पाइपलाइन और सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क से जोड़ने की व्यवस्था भी विकसित की जाएगी. इससे उत्पादित गैस की आपूर्ति आसान होगी और बाजार तक उसकी पहुंच मजबूत बनेगी. साथ ही जिला स्तर पर तकनीक, फीडस्टॉक प्रबंधन और जागरूकता बढ़ाने के लिए विशेष सीबीजी इकोसिस्टम चैलेंज फंड भी बनाया जाएगा.
असम को मिलेगा आधुनिक एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे
कैबिनेट ने असम में राष्ट्रीय राजमार्ग-15 पर बाईहाटा चारियाली से तेजपुर तक 135.871 किलोमीटर लंबे चार लेन एक्सेस कंट्रोल्ड कॉरिडोर को भी मंजूरी दे दी है. करीब 8,970.20 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना बिल्ट-ऑपरेट-ट्रांसफर (बीओटी) टोल मॉडल पर विकसित की जाएगी. सरकार का कहना है कि यह सड़क परियोजना पूर्वोत्तर भारत की कनेक्टिविटी को नई मजबूती देगी और क्षेत्र के आर्थिक विकास में अहम भूमिका निभाएगी.
हाईवे पर बनेगी एयरफोर्स के लिए इमरजेंसी लैंडिंग सुविधा
इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता तेजपुर बाईपास पर बनाई जाने वाली 4.9 किलोमीटर लंबी इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी होगी. भारतीय वायुसेना के समन्वय से तैयार होने वाली यह सुविधा किसी भी आपात स्थिति में लड़ाकू विमानों और अन्य सैन्य विमानों की सुरक्षित लैंडिंग के लिए इस्तेमाल की जा सकेगी. इससे राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी यह परियोजना काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
पूर्वोत्तर की अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई रफ्तार
सरकार का मानना है कि नया हाईवे असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच यात्रा को पहले से अधिक तेज और सुविधाजनक बनाएगा. सड़क संपर्क बेहतर होने से उद्योगों, व्यापार, पर्यटन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को सीधा लाभ मिलेगा. माल ढुलाई का समय कम होगा और परिवहन लागत घटने से क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद है.
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