America-Iran Tensions: 7 जनवरी 2026 को ईरान के आर्मी चीफ मेजर जनरल अमीर हातमी ने एक सख्त चेतावनी दी, जिसमें उन्होंने कहा कि कोई भी विदेशी ताकत ईरान को धमकी नहीं दे सकती और अगर हमला किया तो उसका "हाथ काट दिया जाएगा." यह बयान उस समय आया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा था कि अगर ईरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा करता है, तो अमेरिका उन्हें बचाने के लिए तैयार है. इस बयान के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है. अब सवाल उठता है कि अगर इन दोनों देशों के बीच युद्ध होता है तो वह किस तरह का होगा और किसकी ताकत ज्यादा होगी? ग्लोबल फायरपावर की रिपोर्ट पर आधारित इस लेख में हम इन दोनों देशों की सैन्य ताकत की तुलना करेंगे.
अमेरिका और ईरान के सैन्य मुकाबले का क्या हाल है?
ग्लोबल फायरपावर रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका की सैन्य ताकत ईरान से कहीं अधिक है. हालांकि, युद्ध सिर्फ तकनीकी ताकत से नहीं, बल्कि रणनीतिक परिपक्वता और अनौपचारिक युद्ध क्षमता पर भी निर्भर करेगा. अमेरिकी सेना की तकनीकी ताकत काफी मजबूत है, लेकिन ईरान की असिमेट्रिक वॉरफेयर रणनीतियाँ (जैसे कि गुरिल्ला युद्ध, प्रॉक्सी फोर्सेस और मिसाइल हमले) उसे लंबी लड़ाई में सक्षम बनाती हैं. इसलिए यदि दोनों देशों के बीच युद्ध हुआ, तो यह सिर्फ कुछ घंटों में नहीं, बल्कि कई दिनों, हफ्तों या महीनों तक चल सकता है.
सैन्य रैंकिंग और ताकत
ग्लोबल फायरपावर 2025 के अनुसार, अमेरिका दुनिया की नंबर 1 सैन्य ताकत है, जिसका पावर इंडेक्स स्कोर 0.0744 है. वहीं, ईरान इस रैंकिंग में 16वें स्थान पर है और उसका स्कोर 0.3048 है. इसका मतलब यह है कि अमेरिका के पास ज्यादा सैन्य संसाधन, उच्च तकनीकी क्षमता और बड़े बजट हैं, जो उसे युद्ध के दौरान अतिरिक्त लाभ प्रदान करते हैं. अमेरिका का सैन्य बजट 895 बिलियन डॉलर है, जबकि ईरान का बजट केवल 15.45 बिलियन डॉलर है.
कौन है ज्यादा मजबूत?
अमेरिका के पास 15 करोड़ से ज्यादा मैनपावर है, जिसमें से 12.4 करोड़ लोग सैन्य सेवा के लिए फिट हैं. हर साल 44.4 लाख लोग मिलिट्री एज तक पहुंचते हैं. अमेरिका की कुल मिलिट्री पर्सनल संख्या 21.2 लाख है, जिसमें से 13.2 लाख एक्टिव और 7.9 लाख रिजर्व सैनिक हैं. इसके मुकाबले, ईरान के पास 4.94 करोड़ से ज्यादा मैनपावर है, जिसमें से 4.15 करोड़ सैन्य सेवा के लिए फिट हैं. हालांकि, अमेरिका के पास ईरान से चार गुना ज्यादा मैनपावर है, लेकिन ईरान की पैरामिलिट्री ताकत, जैसे कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC), असिमेट्रिक हमलों में विशेष रूप से मजबूत है.
कौन है ज्यादा खतरनाक?
अमेरिका के पास दुनिया की सबसे एडवांस्ड एयरफोर्स है, जिसमें 13,043 एयरक्राफ्ट हैं, जिनमें से 9,782 हमले के लिए तैयार रहते हैं. इसके पास F-35 फाइटर जेट्स और B-2 बॉम्बर्स जैसे अत्याधुनिक हथियार भी हैं. वहीं, ईरान की एयरफोर्स पुरानी है और उसमें ज्यादातर 1970-80 के दशक के अमेरिकी और रूसी विमान शामिल हैं. हालांकि, ईरान ड्रोन और मिसाइल तकनीक में मजबूत है, जो उसे किसी भी टैक्टिकल युद्ध में फायदा दे सकती है.
अमेरिका की सेना के पास 4,640 टैंक हैं, जबकि ईरान के पास 1,713 टैंक हैं. अमेरिका के पास 39,000 से ज्यादा आर्मर्ड व्हीकल्स और 671 सेल्फ-प्रोपेल्ड आर्टिलरी हैं, जबकि ईरान के पास 65,825 आर्मर्ड व्हीकल्स हैं, लेकिन तकनीकी दृष्टि से अमेरिका का आर्मर्ड वेहिकल्स की संख्या ईरान से छह गुना ज्यादा है.
क्या परमाणु युद्ध संभव है?
अमेरिका के पास हजारों न्यूक्लियर वॉरहेड्स हैं, और वह न्यूक्लियर पावर के मामले में पूरी दुनिया में अग्रणी है. ईरान पर न्यूक्लियर हथियार बनाने का शक है, लेकिन वह इसे सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं करता. यदि दोनों देशों के बीच परमाणु युद्ध हुआ, तो स्थिति काफी गंभीर हो सकती है, लेकिन दोनों देशों के द्वारा परमाणु युद्ध को अवॉइड करने के प्रयास किए जाएंगे.
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