Global Air Powers Ranking 2026: दुनिया की सबसे ताकतवर वायुसेनाओं की नई रैंकिंग जारी हुई है. वर्ल्ड डायरेक्टरी ऑफ मॉडर्न मिलिट्री एयरक्राफ्ट (WDMMA) की रिपोर्ट में भारतीय वायुसेना को दुनिया की छठी सबसे ताकतवर वायुसेना बताया गया है. इस सूची में भारत, चीन से एक स्थान आगे है.
WDMMA ने 103 देशों की 129 सैन्य वायु इकाइयों और 48 हजार से ज्यादा सैन्य विमानों का अध्ययन करने के बाद यह रैंकिंग तैयार की है.
कई मानकों पर हुई रैंकिंग
इस रैंकिंग में केवल लड़ाकू विमानों की संख्या को आधार नहीं बनाया गया. WDMMA ने तकनीकी आधुनिकीकरण, ऑपरेशनल क्षमता, लॉजिस्टिक सपोर्ट, हमला और रक्षा की क्षमता, पायलटों का अनुभव और पूरे बेड़े के संतुलन जैसे कई पहलुओं का आकलन किया.
इन सभी मानकों के आधार पर प्रत्येक वायुसेना को TVR (True Value Rating) स्कोर दिया गया.
दुनिया की टॉप-10 वायुसेनाएं
WDMMA की रैंकिंग के अनुसार दुनिया की 10 सबसे ताकतवर वायुसेनाएं इस प्रकार हैं.
इस सूची में पाकिस्तान की वायुसेना को टॉप-10 में जगह नहीं मिली है.
भारत को चीन से आगे क्यों रखा गया?
रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय वायुसेना को उसकी ऑपरेशनल क्षमता, आधुनिकीकरण, लड़ाकू तैयारी, पायलटों के अनुभव, बेड़े के संतुलन और स्वदेशीकरण की दिशा में प्रयासों के आधार पर चीन से ऊपर रखा गया है.
हालांकि विमानों की संख्या के मामले में चीन भारत से काफी आगे है.
चीन के पास ज्यादा विमान
चीन के पास 3,500 से अधिक सक्रिय सैन्य विमान हैं. उसके बेड़े में J-20 और J-35 जैसे पांचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ लड़ाकू विमान भी शामिल हैं. इसके अलावा उसके पास H-6 जैसे रणनीतिक बॉम्बर भी हैं.
वहीं भारतीय वायुसेना के पास करीब 1,700 से 2,000 सैन्य विमान हैं. भारत के पास फिलहाल पांचवीं पीढ़ी का स्टेल्थ लड़ाकू विमान नहीं है, लेकिन उसके बेड़े में राफेल, Su-30MKI और मिराज-2000 जैसे आधुनिक लड़ाकू विमान शामिल हैं.
भारत को मिलता है भौगोलिक फायदा
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत की भौगोलिक स्थिति वायुसेना के लिए एक बड़ा फायदा है.
चीन के कई एयरबेस तिब्बत के ऊंचे पठारी इलाकों में हैं, जहां कम वायु दबाव के कारण लड़ाकू विमान पूरी क्षमता के साथ उड़ान भरने में कठिनाई का सामना करते हैं.
इसके मुकाबले भारत के एयरबेस मैदानी और कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में स्थित हैं. इससे भारतीय लड़ाकू विमान अधिक ईंधन, हथियार और मिसाइलों के साथ पूरी क्षमता में उड़ान भर सकते हैं.
WDMMA का मानना है कि यही ऑपरेशनल और रणनीतिक फायदे भारतीय वायुसेना को चीन से आगे रखते हैं.
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