Ganesh Chaturthi 2026: गणेश महोत्सव के दौरान भक्त बप्पा को प्रसन्न करने के लिए उनकी पसंदीदा चीजों का भोग लगाते हैं और पूजा में दूर्वा, मोदक, लड्डू व लाल फूल अर्पित करते हैं. लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि भगवान गणेश की पूजा में तुलसी दल का इस्तेमाल क्यों नहीं किया जाता? वैसे तो हिंदू धर्म में तुलसी को बेहद पवित्र और पूजनीय माना गया है, लेकिन गणपति पूजा में तुलसी चढ़ाना वर्जित बताया गया है. इसके पीछे एक दिलचस्प पौराणिक कथा जुड़ी हुई है.
तुलसी ने गणेश जी को दिया था विवाह का प्रस्ताव
पौराणिक मान्यता के अनुसार, एक बार भगवान गणेश गंगा नदी के किनारे तपस्या में लीन थे. इसी दौरान तुलसी जी वहां से गुजरीं और उनकी नजर तपस्या कर रहे भगवान गणेश पर पड़ी. उनके दिव्य स्वरूप को देखकर तुलसी आकर्षित हो गईं और उनके मन में गणेश जी से विवाह करने की इच्छा जाग उठी. इसी इच्छा के चलते उन्होंने गणपति की तपस्या भंग कर दी.
तपस्या से बाहर आने के बाद भगवान गणेश ने तुलसी को समझाया कि किसी की तपस्या में बाधा डालना उचित नहीं है. इसके बाद उन्होंने स्वयं को ब्रह्मचारी बताते हुए तुलसी के विवाह प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया.
क्रोधित तुलसी ने दिया गणेश जी को श्राप
भगवान गणेश के इनकार से तुलसी क्रोधित हो गईं. उन्होंने गणेश जी को श्राप दिया कि उनका विवाह दो बार होगा. तुलसी के इस श्राप से गणपति भी नाराज हो गए और उन्होंने तुलसी को श्राप दिया कि उनका विवाह एक असुर से होगा और उन्हें राक्षस की पत्नी बनना पड़ेगा.
अपनी गलती का एहसास होने पर तुलसी ने भगवान गणेश से क्षमा मांगी. तब गणेश जी ने कहा कि वह अपना श्राप वापस नहीं ले सकते, लेकिन तुलसी को वरदान दिया कि आगे चलकर वह भगवान विष्णु को प्रिय होंगी और उनके माध्यम से उनका उद्धार होगा. साथ ही गणेश जी ने कहा कि उनकी पूजा में तुलसी का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा. मान्यता है कि तभी से गणपति पूजा में तुलसी दल चढ़ाने की परंपरा नहीं है.
गणपति को सबसे प्रिय है दूर्वा
भगवान गणेश की पूजा में तुलसी की जगह दूर्वा का विशेष महत्व माना जाता है. मान्यता है कि दूर्वा गणपति को बेहद प्रिय है, इसलिए भक्त उन्हें श्रद्धा से दूर्वा अर्पित करते हैं. इसके अलावा बप्पा को मोदक, लड्डू, जामुन और गुड़-चने का भोग भी लगाया जाता है. केला, नारियल और श्रीफल भी भगवान गणेश को अर्पित किए जा सकते हैं. गणेशोत्सव के इन पावन दिनों में भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार बप्पा की पूजा करते हैं और उन्हें प्रिय चीजों का भोग लगाकर सुख-समृद्धि और मंगल की कामना करते हैं.
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