गुजरात में सुशासन के चार वर्ष, कक्षा से भविष्य तक बदलाव की कहानी

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के चार वर्षों के कार्यकाल में शिक्षा को सुशासन की मजबूत नींव के रूप में स्थापित किया गया है. लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने से लेकर अत्याधुनिक डिजिटल निगरानी तक, गुजरात की शिक्षा प्रणाली ने उनके नेतृत्व में उल्लेखनीय प्रगति की है.

Four years of good governance in Gujarat Education Model
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अहमदाबाद: मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के चार वर्षों के कार्यकाल में शिक्षा को सुशासन की मजबूत नींव के रूप में स्थापित किया गया है. लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने से लेकर अत्याधुनिक डिजिटल निगरानी तक, गुजरात की शिक्षा प्रणाली ने उनके नेतृत्व में उल्लेखनीय प्रगति की है. नमो लक्ष्मी योजना के तहत कक्षा 9 से 12 की छात्राओं को ₹50,000 तक की आर्थिक सहायता दी जाती है, जिससे वे आर्थिक बाधाओं के बिना अपनी पढ़ाई जारी रख सकें. वहीं, नमो सरस्वती साधना सहायता योजना विज्ञान विषय के विद्यार्थियों को ₹25,000 तक की छात्रवृत्ति प्रदान करती है, ताकि प्रतिभाशाली छात्र पैसों की कमी के कारण पढ़ाई छोड़ने को मजबूर न हों. 

दो साल में लाखों छात्र निजी स्कूल छोड़ सरकारी में आए

गांधीनगर में स्थित विद्या समीक्षा केंद्र इस शैक्षिक क्रांति का केंद्रबिंदु है. यह आधुनिक डेटा केंद्र गुजरात के 1.25 करोड़ से अधिक विद्यार्थियों की शैक्षणिक गतिविधियों पर सतत निगरानी रखता है. रियल-टाइम विश्लेषण की मदद से यह शिक्षकों को सटीक मार्गदर्शन प्रदान करता है और छात्रों की सीखने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावशाली और परिणाममुखी बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देता है. गुजरात के शिक्षा मंत्री प्रफुल्ल पानसेरिया ने कहा कि सरकार के प्रयासों का सकारात्मक परिणाम सामने आया है. महज दो साल में 1.2 लाख छात्र निजी स्कूलों से निकलकर सरकारी स्कूलों में दाखिला ले चुके हैं. नमो लक्ष्मी और नमो सरस्वती योजना बेहद सफल रही हैं.

गुजरात शिक्षा मॉडल पर अभिभावकों का रिएक्शन

इसके साथ ही हजारों डिजिटल क्लासरूम और कौशल आधारित लर्निंग मॉड्यूल शुरू किए गए हैं, ताकि बच्चे भविष्य की तकनीकी दुनिया के लिए तैयार हो सकें. गुजरात के शिक्षा मॉडल पर अभिभावकों ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है. एक ने कहा कि अब यहां ऐसी कोई सुविधा नहीं है जो निजी स्कूलों में हो और सरकारी स्कूलों में न हो. यहां स्मार्ट बोर्ड हैं और बहुत ही अच्छा शिक्षण वातावरण है. पहले मुझे भी लगता था कि निजी स्कूल सरकारी स्कूलों से बेहतर होते हैं, लेकिन अब मुझे विश्वास है कि सरकारी स्कूल अधिक प्रभावशाली हैं. अगर आप चाहें तो मैं इसे किसी रिपोर्ट या वीडियो स्क्रिप्ट के लिए और भी सटीक बना सकता हूं

वहीं एक अन्य ने कहा कि जब से भूपेंद्र भाई आए हैं, तब से बदलाव आया है. अब ऐसा कोई स्कूल नहीं है जहां शिक्षकों की कमी हो. अगर किसी स्कूल में छात्रों के दाखिले बढ़ रहे हैं, तो वहाँ शिक्षक भी आसानी से उपलब्ध हैं. आपको बता दें कि इन चार सालों की सुधारों से गुजरात की कक्षाएं अब और स्मार्ट, समावेशी (inclusive) और भविष्य के लिए तैयार हो गई हैं. मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के लिए शिक्षा ही अच्छे शासन की नींव और गुजरात की तरक्की की बुनियाद है.

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