राजस्थान में विधायकों को कितनी मिलती है पेंशन? पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने किया अप्लाई

पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, जो हाल ही में उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के बाद सुर्खियों में थे, एक बार फिर चर्चा का विषय बने हुए हैं. खबरों के मुताबिक, उन्होंने अब राजस्थान विधानसभा से पेंशन के लिए आवेदन किया है.

Former Vice President Jagdeep Dhankhar applied for pension in Rajasthan Assembly
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जयपुर: पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, जो हाल ही में उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के बाद सुर्खियों में थे, एक बार फिर चर्चा का विषय बने हुए हैं. खबरों के मुताबिक, उन्होंने अब राजस्थान विधानसभा से पेंशन के लिए आवेदन किया है. यह कदम उनके राजनीतिक सफर और सामाजिक सेवा के कारण एक नया मोड़ लेता है.

पेंशन के लिए आवेदन

जगदीप धनखड़ ने 1993 में कांग्रेस के टिकट पर अजमेर के किशनगढ़ विधानसभा क्षेत्र से विधायक के रूप में अपनी पहली राजनीतिक सफलता हासिल की थी. इसके पहले, वे 1989-91 के दौरान राजस्थान के झुंझुनू लोकसभा क्षेत्र से जनता दल के टिकट पर सांसद चुने गए थे. उनके राजनीतिक करियर में कई महत्वपूर्ण मील के पत्थर रहे हैं, जिनमें चंद्रशेखर की सरकार में संसदीय कार्य मंत्री के रूप में उनकी भूमिका भी शामिल है. इसके बाद, 2019 में उन्हें पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया गया.

पेंशन का अधिकार

राजस्थान विधानसभा के नियमों के अनुसार, किसी भी विधायक को विधानसभा में उनकी सेवा के लिए पेंशन मिलनी चाहिए. चूंकि जगदीप धनखड़ ने किशनगढ़ विधानसभा से विधायक रहते हुए इस सेवा को अंजाम दिया था, वह पेंशन के हकदार हैं. इस बारे में राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने पुष्टि की है कि धनखड़ के आवेदन पर प्रक्रिया जारी है.

कितनी पेंशन मिलेगी? दोहरी पेंशन का प्रावधान

संसदीय और विधायकी दोनों पदों का अनुभव रखने के कारण, जगदीप धनखड़ को राजस्थान विधानसभा से लगभग 42 हजार रुपये मासिक पेंशन मिल सकती है. इसके अलावा, राजस्थान में नेताओं के लिए एक अनोखा प्रावधान है, जिसमें दोहरी और तिहरी पेंशन का प्रावधान है. इसका मतलब यह है कि यदि कोई व्यक्ति विधायक और सांसद दोनों रह चुका है, तो उसे दोनों पदों की पेंशन मिल सकती है.

उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा

जुलाई 2023 में उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के बाद से जगदीप धनखड़ ने सार्वजनिक रूप से कोई बयान नहीं दिया है. उनका इस्तीफा अचानक ही सामने आया था, और उन्होंने इसे अपने खराब स्वास्थ्य के कारण दिया था. इसके बाद, विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधते हुए कई सवाल उठाए थे. हालाँकि, इस्तीफा देने के बाद से वह किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में नज़र नहीं आए हैं, जिससे उनकी चुप्पी और भी चर्चा का कारण बनी है.

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