शहीदों के परिवार वालों ने Bharat 24 के मंच पर सुनाई अनसुनी कहानी, जानें क्या कहा

Rising Bharat Leadership Summit 2026: आज राजधानी दिल्ली में Rising Bharat Leadership Summit 2026 का भव्य आयोजन हो रहा है. इस कार्यक्रम में रक्षा, राजनीति और राष्ट्रवाद से जुड़ी जानी-मानी हस्तियों ने शिरकत की. इस बीच कार्यक्रम में दो शहीदों के परिवार वालों ने भी शिरकत की और इस कार्यक्रम में खास बातचीत का हिस्सा बनें. 

family members of the martyrs narrated the unheard story Rising Bharat Leadership Summit 2026
Bharat 24

Rising Bharat Leadership Summit 2026: आज राजधानी दिल्ली में Rising Bharat Leadership Summit 2026 का भव्य आयोजन हो रहा है. इस कार्यक्रम में रक्षा, राजनीति और राष्ट्रवाद से जुड़ी जानी-मानी हस्तियों ने शिरकत की. इस बीच कार्यक्रम में दो शहीदों के परिवार वालों ने भी शिरकत की और इस कार्यक्रम में खास बातचीत का हिस्सा बनें. 

पीढ़ी दर पीढ़ी सेना में भर्ती होने का जज्बा कहां से आता है?

शहीद महेश त्रिखा के पिता जगतराज त्रिखा ने कहा कि जहां तक आपने बोला कि पीढ़ी से पीढ़ी ऐसा कुछ नहीं है. यह बच्चे का अपना प्रेजेंस ऑफ माइंड है. उसकी अपनी प्रेफरेंस है. लेकिन जो हमारे आर्मी टेन्योर के अंदर उसने देखा जैसे आपको मालूम है कि हर दो साल में हमारी पोस्टिंग हो जाया करती थी. चाहे वो यूपी में हो, चाहे वो अरुणाचल में हो, चाहे वो नागालैंड में हो. तो हमारे साथ बच्चे जाते थे. वो बच्चे उस आर्मी लाइफ को देखते थे. तो उनके दिल में एक जज्बा पैदा होता था कि क्यों ना मैं भी ऐसी सर्विस जाइन करूं जिससे मैं देश की सेवा कर सकूं. और मेरा बेटा जब वो 11 साल का था वो दीमापुर में मेरी पोस्टिंग थी और उसने आरआईएमसी अगर आपने सुना होगा राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कॉलेज इसमें एंट्री के लिए यूपीएससी का एग्जाम होता है और यह ऑल इंडिया कंपटीशन होता है जैसे आईएएस का होता है और इसमें बच्चे हर स्टेट से पार्टिसिपेट करते हैं और एक स्टेट से एक बच्चा सिलेक्ट होता है.

जगतराज त्रिखा ने कहा कि आरएमसी में एडमिशन के लिए मेरा बेटा नागालैंड से अपीयर हुआ और उसने उस साल पूरे ऑल इंडिया में टॉप किया. तो मतलब ये है कि उसका जज्बा शुरू से ही था कि वो फौज में जाए. जब वो 11 साल का था तो मैं उसको छोड़ने आरएमसी देहरादून गया तो वहां पर जब कमांड ने अनाउंस किया कि महेश त्रिखा के फादर कौन है? थोड़े खड़े हो जाए तो उसने मुझे सम्मानित किया कि आपके बेटे ने आरआईएमसी यूपीएससी एग्जाम में टॉप किया है. इसके लिए आपको बहुत-बहुत मुबारक हो. तो इसलिए बच्चे का अपना मूड था, अपना वो था, जज्बा था, अपनी लाइकिंग थी जिससे वो फौज में गया. 

ये उनको जो हिम्मत मिली, जो जज्बा जुनून मिला उसमें आपका रोल बहुत जरूर रहा होगा. मैं इस बात को तो लेकर बहुत श्योर हूं. 

जगतराज त्रिखा ने कहा कि आप बिल्कुल ठीक कह रहे हैं. मेरा रोल केवल इतना था जब वो आरआईएमसी से एनडीए में गया. एनडीए के बाद एएफए में गया एयरफोर्स फ्लाइंग एकेडमी बनेंड हैदराबाद में तो वहां पर जब वो अपनी प्रेफरेंस दे रहा था तब उसने मुझसे पूछा कि पापा मैं प्रेफरेंस क्या दूं? हम एयरफोर्स से मैंने दे दी है क्योंकि आर्मी मैंने आपको देखा है कि हर 2 साल के बाद आपकी ट्रांसफर हो जाती है. हमारे बच्चों आपके बच्चों की एजुकेशन सफर करती है तो मैं आर्मी को प्रेफर नहीं करूंगा. नेवी आई डोंट लाइक बिकॉज़ आई हैव टू यू ऑन द सी. सो ही से दैट इज आउट. सो रेस्ट इज़ एयरफोर्स. 

जगतराज त्रिखा ने कहा कि आई विल प्रेफर टू गो इंटू एयरफोर्स. तो व्हाट डू यू से टू दैट? सो देन आई एज अ फादर. आई टोल्ड हिम बेटे एयर फोर्स के अंदर जो आपका तीन लाइनें हैं फाइटर पायलट ही हैस टू बी वेरी क्विक विथ इन सेकंड्स ही हैज़ टू टेक अ डिसीजन एंड दैट लाइफ इज नॉट सिक्योर एस अ फाइटर पायलट तो आई विल नॉट रेकमेंड यू टू रेकमेंड फॉर दी फाइटर पायलट. सेकंड इज़ ट्रांसपोर्टर दैट टू आई थिंक इज़ लिटिल डेंजरस बट रेस्ट इज़ दी हेलीकॉप्टर पायलट व्हिच इज़ अ वेरी स्लो मूविंग एयरक्राफ्ट यू यू आर ओनली फ्लाई एट द स्पीड ऑफ 400 500 कि.मी. यू ओनली फ्लाई एट द हाइट ऑफ वन और 2 कि.मी. अबव सो आई थिंक दैट इज द मोस्ट सेफेस्ट प्रेफरेंस फॉर यू टू अप्लाई फॉर इट एंड ही प्रेफर्ड टू गेट हेलीकॉप्टर स्ट्रीम. 

उन्होंने कहा कि तो सम टाइम आई फील कि आई एम इंस्ट्रूमेंटल इन हिस लास्ट डेज़ ऑफ हिज़ स्टे इन द हेलीकॉप्टर. इफ ही हैड ऑप्टेड फॉर फाइटर और ट्रांसपोर्टर परहैप्स आई वुड हाव नॉट लॉस्ट हिम. बट देन डेस्टिनी हैज़ टू प्ले अ मेजर रोल. मुझे अभी भी याद है कि उसकी पहली पोस्टिंग जामनगर में हुई थी. सेकंड पोस्टिंग सियाच ग्लेशियर जो कि लेह में यूनिट है 114 हेलीकॉप्टर यूनिट उसमें हुई थी उनकी पोस्टिंग और उसमें हेलीकॉप्टर उसमें हेलीकॉप्टर पायलट्स को वहां पोस्टिंग के लिए वालंटियर करना पड़ता है क्योंकि आपको फ्लाई करना पड़ता है. 21000 22000 हाइट के ऊपर तो उसके लिए उनको पायलट वही चाहिए, जो वालंटियर हो तो उसने वालंटियर किया और वहां पर उसने सियाचीन पाइनियर्स का एंबलम लिया और ताकि वो ही वाज़ ए वेरी फुल्ली फ्लेज्ड पायलट टू परफॉर्म ह ड्यूटीज इन सियाचिन ग्लेशियर.

"मां मेरा कल स्पेशल मिशन है"

जगतराज त्रिखा कहा कि लेकिन 16th अगस्त 2002 दैट वाज़ दी लास्ट डे एंड आई स्टिल रिमेंबर ऑन 15th अगस्त 2002 व्हेन देयर वाज़ नो मोबाइल फोन इट वाज़ डिफिकल्ट टू कम्युनिकेट एक्सेप्ट फॉर दी लैंडलाइन ऑन 15th अगस्त ही स्पोक टू अस ही स्पोक टू ह मदर फॉर वन आवर एंड मदर टोल्ड हिम यू हैव स्पेंड सिक्स इयर्स इन द इंडियन एयरफोर्स प्लीज टेक सम लीव एंड कम होम ही सेज मां मेरा कल स्पेशल मिशन है आई एम गोइंग टू ड्रॉप ए साइंटिस्ट एस सियाच इन ग्लेशियर उसके बाद जब मैं वापस यूनिट में आऊंगा तो मैं लीव के लिए अप्लाई करूंगा और एक महीने की छुट्टी आऊंगा. यह बात उसने अपनी मां को बताई 15 अगस्त को शाम को जब उनसे बात कर रहा था लेकिन 16 अगस्त को जब मैं उसकी मां को कोई मैसेज आया ले से कि मैडम घर में कोई आदमी है क्या? जी तो मैडम ने कहा नहीं बताओ क्या बात है?

उन्होंने कहा कि मैं भी आदमी की तरह हूं. मैं भी मिज रेखा हूं. कहता है नहीं मैम ये कह के उसने टेलीफोन ड्रॉप कर दिया. और उस टाइम में मैं कॉरपोरेट वर्ल्ड में था. गुड़गांवा में काम कर रहा था. तो उसमें मेरी वाइफ ने मुझे बोला शी वाज़ ए बिग एक्सपोर्टर ऑफ हर टाइम शी वाज़ एक्सपोर्टर शी यूज्ड टू एक्सपोर्ट लेडी मेड हैंडमेड गारमेंट्स टू दी फॉरेन कंट्रीज शी गव मी अ रिंग कि मुझे टेलीफोन आया है. लेह से कि घर में पूछ रहा है कोई आदमी है कि नहीं है और मेरी वाइफ की आंखों में आंस आंसू की आवाज थी भारी वॉइस थी मैंने कहा, कोई बात नहीं तुम अभी कहां पर हो. बोली मैं मार्केट जा रही हूं, शॉपिंग के लिए अपने एक्सपोर्ट हाउस के लिए. मैंने कहा अभी तुम मत जाना मैं पहले टेलीफोन करता हूं, पता करता हूं कि क्या बात है. 

जगतराज त्रिखा ने आगे कहा कि  एंड बिलीव यू मी व्हेन आई रेंग अप इन द फर्स्ट शॉट आई गॉट ए कॉल एंड देन आई वास टोल्ड बाय द कमांडिंग ऑफिसर ऑफ़ 114 हेलीकॉप्टर यूनिट कि सर योर सन आवर बिलवर्ड महेश इज नो मोर. सो दैट वाज़ द टाइम व्हेन वी फेल्ट कि दे आवर सन हैज़ बीन टेकन बाय द डेस्टिनी. एंड आई थिंक सिंस देन वी हैव बीन कैरीफ़ोन विथ आवर लाइफ. आई विश माय वाइफ वास् हियर बिकॉज़ शी टेक्स प्राइड इन बीइंग नोन एस ए शहीद की मां. शी डॉट वांट टू बी नोन एस मिस त्रिखा. शी वांट्स टू बी नोन शहीद की मां बट सिंस शी वाज़ अनवेल शी कुड नॉट कम हियर. 

आपकी आखिरी क्या बात हुई?

सिपाही बबलू सिंह के भाई सतीश  ने कहा कि जी मेरे भाई 30 जुलाई 2016 को शहीद हुए थे और जून में ही वह अपनी आखिरी छुट्टी काट के गए थे तो मैं उन्हें जब स्टेशन छोड़ने गया तो एक फौजी परिवार के लिए उसके भाई के लिए उसकी पत्नी के लिए उसकी मां के लिए जब स्टेशन पर अपने भाई पति को जाना एक जो अलविदा कहना होता है वो आंखों में उसके लिए या तो भाव मान लीजिए या गर्व मान लीजिए वो एक बहुत ही भारीपन होता है. तो मेरे भाई से मेरी मुलाकात जब लास्ट टाइम जब बात हुई थी तो उन्होंने मेरे से यह कहा था कि एक बहुत बड़ा ऑपरेशन हो सकता है और शायद मैं उसमें जा सकता हूं और उस टाइम पर उनकी यूनिट वो जाट रेजीमेंट से थी 18 जाट में उनकी यूनिट थी.

सतीश  ने आगे कहा कि नौगांव कुपवाड़ा में उनकी पोस्टिंग थी जैसा कि हमारा आर्मी परिवार तो जानता है कि एडवांस पार्टी मेयर के लिए निकल आई थी और वो पहले वो स्पोर्ट्स कोटे में थे तो वो एडवांस पार्टी में शामिल ना होके अपनी यूनिट के साथ ही उन्होंने रहना उचित समझा और शायद वो उनका फैसला नहीं था वो ऊपर वाले का फैसला था. नहीं तो एडवांस पार्टी में भी आ सकते थे. 29 और 30 जुलाई की वो काली अंधेरी घनी जो रात थी. जैसा कि देखते हैं कि नौगांव कुब्बा में इतने बड़े घने जंगल हैं कि वहां से सूरज की रोशनी भी पृथ्वी तक नहीं आती और रात को किसी ऑपरेशन को अंजाम देना एक भारतीय सेना के लिए बहुत बड़ी बात होती है और जब वो अंजाम दिया जाता है तो एक परिवार के प्रति उस सैनिक की कोई जिम्मेदारी ना रह के एक देश के प्रति उसकी जिम्मेदारी रहती है कि उसे देश के लिए क्या करना है. 

"सैनिक हमेशा दो मोर्चों पर लड़ता है"

उन्होंने आगे कहा कि एक सैनिक हमेशा लड़ाई जो लड़ता है वो दो मोर्चों पर लड़ता है. एक अपने देश को देखता है कि उसे देश के लिए क्या करना है और दूसरा अपने परिवार को देखता है. तो जब भी कोई भी सैनिक फौज में जाता है तो उसके पीछे उसके परिवार की एक हिम्मत रहती है. उसे पता है कि उसका परिवार मेरे जाने के बाद मेरे परिवार को संभाल लेगा. ऐसा ही भाई के अंदर जज्बा था. ऑपरेशन चल रहा था. तभी सीमा पार से आए हुए दुश्मनों ने उनको ललकारा. तो एक घात लगाए हुए जब बैठे रहते हैं सैनिक तो वहां पर एक सैनिक हमारे शहीद हो गए थे जिनको गोली लगी थी तो वो उनको लेकर आ रहे थे और रास्ते में 15 मीटर की दूरी से एक आतंकवादी मिलिटेंस काली अंधेरी गंड में छुपा हुआ बैठा था तो दोनों की आमने-सामने से 15 मीटर की दूरी से आमनासामना हुआ. उन्होंने उसको वहीं उसको मार गिराया और उनको भी ब्रस्ट फायर जब लगे करीब सात गोलियां जो क्योंकि एक गोली जो थी उनके सीधे होठों को चीरते हुए वो पीछे से निकल गई थी और वो वहीं पर अपनी अंतिम सांस लेते हुए देश के लिए सर्वोच्च वरदान उन्होंने दिया. 

सतीश  ने कहा कि उसके बाद मुझे फोन आया मथुरा एडमम कमांडेंट के द्वारा कि आप कौन बात कर रहे हैं? जैसा कि अभी सर ने बताया कि मैडम के पास फोन आया था. तो उन्होंने मेरे से पूछा कि आप कौन बात कर रहे हैं? मैंने कहा कि सर मैं बबलू सिंह जी का छोटा भाई बात कर रहा हूं. कि आपको पता है कि कुछ क्या हुआ है मैंने सर? मुझे नहीं पता. मैं अभिनक था उस टाइम क्योंकि कोई कॉल या मैसेज नहीं आया था उससे पहले पहले तो उन्होंने बताया कि आपने भाई ने बहुत ही बड़ा काम किया. बहुत ही सर्वोच्च काम किया है. बहुत ही बड़ा परिवार का गांव का नाम रोशन किया है. मैं सर क्या किया है? तो बोले कि आपके भाई ने दुश्मनों से लड़ाई लड़ी है और वह गंभीर रूप से घायल हो गए हैं. ऐसा उन्होंने मुझे बताया पर यह नहीं बताया कि उन्होंने अपना सर्वोच्च वरदान सैक्रिफाइस देश के लिए दे चुके हैं. 

जब यूनिट से कॉल आया

सतीश  ने आगे बताया कि उसके बाद उनका कॉल कट गया. बाद में फिर यूनिट से कॉल आया. मेरी बात हुई. मैंने ये वाली बात छत पर जाकर की. मेरी भाभी जी जो सामने बैठी हुई है वो नीचे थी. हम 29 जुलाई को ये ऑपरेशन हुआ था. 1 अगस्त को भाई की पार्थिव शरीर तिरंगे के साथ आया. हमने एक तारीख की सुबह 3:00 बजे भाभी जी को बताया. पूरा टीवी बंद कर दिया. न्यूज़ पेपर बंद कर दिया. कुछ भी उनको पता नहीं चलने दिया. वो बिल्कुल अनिभिज्ञ थी, इस चीज से कि उनके साथ क्या हुआ है क्या नहीं हुआ है. जी तो सुबह फिर हम उन्हें जहां शहर में हम रहते हैं वहां से अपने गांव 20 कि.मी. दूर लेके गए. वहां उनका सलामी के साथ और जो भी होता है अपना सेना का सम्मान सर्वोच्च सम्मान वो इनको दिया गया और भारतीय सेना के द्वारा भारत सरकार के द्वारा उन्हें सेना मेडल से सम्मानित किया गया. 

उन्होंने आगे कहा कि सेना में कोई भी मेडल पाना इतना आसान नहीं रहता है. मैं कहता हूं पद्म श्री पद्म विभूषण आप पा सकते हो पर एक छोटा सा छोटा सेना मेडल भी पाना हर व्यक्ति के हर भारतवासी की बात नहीं है. बहुत दूसरी एक चीज और मैं कहना चाहूंगा क्योंकि आज का देश हमारा युवाओं का देश है. हमारी तीनों सेनाएं जैसा कि अभी लास्ट टाइम ऑपरेशन सिंदूर में देखा है. यह उसके लिए मुझे कहने की कोई आवश्यकता नहीं है. सेनाएं तो अपना बेखूबी काम कर रही हैं और निभा रही हैं. अपना निर्व पूरा कर रही हैं. आज हमें अपने दुश्मन को देश के भीतर पहचानना है. यदि हम आज देश के दुश्मन को भीतर पहचान पाए तो हमें आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता. हमारा देश सोने की चिड़िया था और रहेगा. इसके लिए हमें किसी की जरूरत नहीं है. जय हिंद. जय भारत.

ये भी पढ़ें- पहली बार गणतंत्र दिवस के परेड में दिखेगी ये हाइपरसोनिक मिसाइल, खासियत जान दुश्मनों की उड़ जाएगी