F-35, राफेल मुंह ताकते रह जाएंगे, भारत बना लेगा 6th जेनरेशन फाइटर जेट; S-500 डिफेंस सिस्टम होंगे बेकार!

रूस-यूक्रेन युद्ध और इजरायल-गाजा संघर्ष जैसे मौजूदा वैश्विक संकटों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि हर देश को अपनी सुरक्षा के लिए खुद ही पहल करनी होगी.

F35 Rafale India to make 6th generation fighter jet S500
प्रतीकात्मक तस्वीर | Photo: Freepik

नई दिल्लीः दुनिया इस समय युद्ध और संघर्षों के बीच खड़ी है, और हर देश अपनी सुरक्षा के लिए नई तकनीकों की ओर बढ़ रहा है. रूस-यूक्रेन युद्ध और इजरायल-गाजा संघर्ष जैसे मौजूदा वैश्विक संकटों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि हर देश को अपनी सुरक्षा के लिए खुद ही पहल करनी होगी. इस स्थिति में, भारत भी अपनी रक्षा क्षमताओं को और मजबूत करने में जुटा हुआ है, और इसमें प्रमुख भूमिका निभा रही है वायु सेना, जो अत्याधुनिक तकनीक और उपकरणों से लैस हो रही है. भारत ने अपने डिफेंस सेक्टर के लिए जो योजनाएं बनाई हैं, उनका लक्ष्य न केवल अपनी सुरक्षा बढ़ाना है, बल्कि वैश्विक शक्ति के रूप में अपनी स्थिति भी मजबूत करना है.

भारत की रक्षा रणनीति में एक बड़ा कदम उस समय देखने को मिला जब पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया. इस ऑपरेशन ने भारतीय वायु सेना की ताकत को पूरी दुनिया के सामने रखा. एयरफोर्स के पास जिस प्रकार के आधुनिक विमान और तकनीकी संसाधन हैं, उन्होंने यह साबित कर दिया कि भारत अपनी सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है. इसके बाद भारत सरकार ने अपनी वायु सेना को और अधिक मजबूत बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिनमें DRDO (रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन) का योगदान बेहद अहम है.

तेजस से लेकर 6th जनरेशन फाइटर जेट तक

भारत की वायु सेना के लिए सबसे महत्वपूर्ण परियोजना "तेजस" है, जो एक हल्का और अत्याधुनिक लड़ाकू विमान है. लेकिन इसके साथ-साथ भारत अगले चरण में 6th जनरेशन फाइटर जेट की तकनीक पर भी काम कर रहा है. यह फाइटर जेट, जो वर्तमान में दुनिया की सबसे एडवांस्ड तकनीक पर आधारित है, आने वाले समय में भारत की रक्षा को और सशक्त बनाएगा. DRDO और भारतीय वायु सेना मिलकर "एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA)" के तहत 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट को विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं, और इसका प्रोटोटाइप बनाने के लिए 15,000 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है.

लेकिन, भारत की योजना सिर्फ 5वीं पीढ़ी तक सीमित नहीं है. भारतीय वैज्ञानिक अब 6th जनरेशन फाइटर जेट की ओर भी बढ़ रहे हैं. डॉ. कोटा हरिनारायण, जो तेजस के प्रमुख डिजाइनर हैं, ने हाल ही में इस बारे में महत्वपूर्ण बातें साझा कीं. उनके अनुसार, भारत 6th जनरेशन का मानवरहित लड़ाकू विमान बनाने के लिए पूरी तरह से तैयार है. यह विमान फ्लाइंग विंग डिजाइन पर आधारित होगा, जिसका मतलब है कि इसमें कोई पारंपरिक टेल (पृष्ठभाग) नहीं होगा, जो इसे अधिक स्टील्थ और रडार से बचने में सक्षम बनाएगा.

6th जनरेशन फाइटर जेट की विशेषताएं

6th जनरेशन फाइटर जेट के बारे में कुछ नई और अत्याधुनिक विशेषताएं सामने आई हैं. सबसे पहले तो यह जेट पूरी तरह से मानवरहित होगा, लेकिन इसमें ऐसी क्षमता होगी कि यह पायलट के साथ भी मूव कर सकेगा. इसकी फ्लाइंग विंग डिजाइन इसे और भी अद्वितीय बनाएगी. इसमें वर्टिकल या हॉरिजेंटल स्टैबिलाइजर की जगह रडार से बचने के लिए स्टील्थ तकनीक को ज्यादा महत्व दिया जाएगा. इसका उद्देश्य यह होगा कि यह विमान रडार की पकड़ से बाहर रहे और दुश्मन के लिए एक अप्रत्याशित खतरा बन जाए. इसके अलावा, यह विमान एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और ड्रोन के साथ मिलकर काम करने में सक्षम होगा, जिससे इसकी मारक क्षमता और भी बढ़ जाएगी.

भारत की "घातक" परियोजना

भारत की "घातक" परियोजना, जिसे DRDO और एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी मिलकर विकसित कर रही है, 6th जनरेशन की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है. यह स्टील्थ तकनीक और फ्लाइंग विंग डिजाइन पर आधारित पहला भारतीय कॉम्बैट प्लेटफॉर्म हो सकता है. यह भारत की रक्षा क्षमता को एक नया आयाम देने की क्षमता रखता है. इस परियोजना में कावेरी ड्राई इंजन का इस्तेमाल किया जाएगा, जो इसे और भी प्रभावी बनाएगा.

इसके अलावा, इस फाइटर जेट में Directed Energy Weapons (DEWs) का इस्तेमाल भी किया जा सकता है, जो इसे और भी घातक और आधुनिक बना देगा. यह तकनीक, जो राडार से बचने और सटीक निशाना साधने में मदद करेगी, भारत को एक प्रमुख वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.

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