भारत के बाद जापान में भी हुई अमेरिका की थू-थू! F-35B फाइटर जहाज फिर हुआ खराब; एक हफ्ते बाद भी...

ब्रिटिश रॉयल एयर फोर्स के F-35B स्टील्थ फाइटर को पिछले सप्ताह जापान में आपात लैंडिंग करनी पड़ी थी. हालांकि, एक सप्ताह बाद भी यह विमान उड़ान भरने में असमर्थ है. यह हाल के हफ्तों में दूसरा F-35B लड़ाकू विमान है.

F-35B Fighter jet emergency land in japan due to technical problem from one week
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ब्रिटिश रॉयल एयर फोर्स के F-35B स्टील्थ फाइटर को पिछले सप्ताह जापान में आपात लैंडिंग करनी पड़ी थी. हालांकि, एक सप्ताह बाद भी यह विमान उड़ान भरने में असमर्थ है. यह हाल के हफ्तों में दूसरा F-35B लड़ाकू विमान है, जिसे तकनीकी खराबी के कारण आपात लैंडिंग करनी पड़ी है. इससे अमेरिकी निर्मित इस स्टील्थ फाइटर की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं.

रिपोर्ट के अनुसार, रॉयल नेवी के विमान वाहक पोत HMS प्रिंस ऑफ वेल्स से उड़ान भरने वाला यह F-35B विमान 10 अगस्त को सुबह लगभग 11:30 बजे किरिशिमा शहर के हवाई अड्डे पर उतरा. उड़ान के दौरान आई तकनीकी खराबी के कारण पायलट को सुरक्षित तरीके से लैंड करना पड़ा. पायलट पूरी तरह सुरक्षित हैं, लेकिन इस वजह से कागोशिमा के लिए निर्धारित छह उड़ानों में देरी हुई. विमान को रनवे से हटाकर टैक्सीवे पर खड़ा कर दिया गया है.

जापान में विमान की स्थिति

ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय ने बताया कि विमान अभी भी जापान में खड़ा है और इसकी मरम्मत के लिए इंतजार चल रहा है. हालांकि, मंत्रालय ने तकनीकी खराबी के विवरण को साझा नहीं किया. यह स्पष्ट किया गया कि यह समस्या पहले भारत में आपात लैंडिंग करने वाले F-35B से अलग है.

मरम्मत के लिए पुर्जों का इंतजार

रॉयल नेवी और रॉयल एयर फोर्स के इंजीनियरों ने विमान की जांच पूरी कर ली है, लेकिन अब आवश्यक पार्ट्स की डिलीवरी का इंतजार किया जा रहा है. इसके बिना विमान की मरम्मत संभव नहीं है. F-35B के पुर्जों की वैश्विक आपूर्ति शृंखला पहले भी समस्याग्रस्त रही है.

वैश्विक उपयोग और सवाल

ब्रिटेन के अलावा अमेरिकी मरीन कॉर्प्स और जापान के पास भी F-35B फाइटर हैं. हाल ही में दो F-35B की आपात लैंडिंग ने इस विमान की तकनीकी क्षमता और परिचालन विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. विशेषज्ञ मानते हैं कि इन घटनाओं से स्टील्थ फाइटर के ऑपरेशनल विश्वसनीयता और पुर्जों की उपलब्धता को लेकर रणनीतिक चिंताएं बढ़ सकती हैं. इस घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि अत्याधुनिक लड़ाकू विमान भी तकनीकी खामियों के कारण परिचालन में अस्थिर हो सकते हैं, और उनकी मरम्मत और पुर्जों की उपलब्धता पर वैश्विक निर्भरता बनी रहती है.

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