पिछले एक महीने में बांग्लादेश में राजनीतिक हलचल के बीच अमेरिका की सक्रियता काफी तेज़ हो गई है. रिपोर्टों के अनुसार, शेख हसीना के तख्तापलट के बाद जब अंतरिम सरकार का गठन हुआ और इसकी बागडोर प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस को सौंपी गई, तभी से वॉशिंगटन की गतिविधियाँ बढ़ गई हैं. हालांकि अमेरिका पहले भी राजनीतिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए था, लेकिन बीते कुछ हफ्तों में उसकी सक्रियता और गहराई से महसूस की जा रही है.
विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे ही अमेरिका ने अपनी रुचि दिखाई, वैसे ही विपक्षी दल BNP ने भी अपनी कूटनीतिक कोशिशों को तेज कर दिया. दोनों पक्ष राजनीतिक मोर्चे पर अपने हित साधने में व्यस्त हैं.
अमेरिका की बैठकों में उठाए गए मुद्दे
अमेरिका की राजदूत ने बांग्लादेश में अपनी कई बैठकों में चुनाव प्रक्रिया, राजनीतिक सुधार, मानवाधिकार, क़ानून का शासन और न्यायिक सहयोग जैसे अहम विषयों पर चर्चा की. विश्लेषकों का कहना है कि यह अमेरिकी दखल इस बात का संकेत है कि वॉशिंगटन बांग्लादेश की सरकार और चुनाव आयोग पर दबाव डालना चाहता है ताकि चुनाव समावेशी, पारदर्शी और शांतिपूर्ण हों. इसके जरिए अमेरिका अपनी राजनीतिक पसंद के उम्मीदवारों को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है.
बांग्लादेश में अमेरिका की रुचि क्यों?
भू-राजनीतिक परिदृश्य, इंडो-पैसिफ़िक रणनीति और भारत-चीन-रूस के नए समीकरणों को देखते हुए अमेरिका बांग्लादेश में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है. इस वजह से उसने BNP को संभावित नई सरकार मानकर उनसे बातचीत शुरू की है. विशेषज्ञों का कहना है कि बांग्लादेश में अंतरराष्ट्रीय दिलचस्पी कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस बार का समय और हाल की गतिविधियाँ विशेष महत्व रखती हैं. इस तरह, बांग्लादेश में राजनीतिक परिदृश्य पर अमेरिका की सक्रियता और BNP की कूटनीतिक कोशिशें आने वाले चुनावों और क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित कर सकती हैं.
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