ब्रसेल्स/वॉशिंगटन/कीव: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच अलास्का में हाल ही में हुई बैठक से कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया है. इसके तुरंत बाद यूरोपीय देशों ने खुलकर यूक्रेन के पक्ष में अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है. शनिवार, 16 अगस्त 2025 को यूरोपीय संघ के शीर्ष नेताओं ने साफ कह दिया कि रूस को यह अधिकार नहीं है कि वह यह तय करे कि यूक्रेन किस संगठन का हिस्सा बन सकता है और किसका नहीं.
यह कड़ा रुख ऐसे समय पर आया है जब ट्रंप अपनी 'शांति योजना' के जरिए रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन यूरोपीय देशों का कहना है कि यूक्रेन की संप्रभुता और उसका गठबंधन चुनने का अधिकार अडिग और अप्रभावित रहेगा.
रूस को यूरोपीय यूनियन की दो टूक
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज, और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने संयुक्त बयान जारी करते हुए यह स्पष्ट किया कि यूरोप किसी भी हालत में यूक्रेन की स्वतंत्र विदेश नीति का समर्थन करना बंद नहीं करेगा.
बयान में कहा गया, "रूस के पास यह अधिकार नहीं है कि वह यूक्रेन के यूरोपीय संघ या नाटो जैसे अंतरराष्ट्रीय गठबंधनों में शामिल होने के फैसले पर अपनी मंजूरी की मुहर लगाए. यूक्रेन को अपने भविष्य की दिशा चुनने का पूर्ण अधिकार है."
इस तरह के बयान सीधे-सीधे ट्रंप और पुतिन के बीच हुई बातचीत की प्रासंगिकता को चुनौती देते हैं, जिसमें कथित रूप से यूक्रेन को नाटो में शामिल होने से रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं.
रूस पर प्रतिबंध लगाने के लिए EU ने बनाई रणनीति
यूरोपीय यूनियन ने यह भी संकेत दिया है कि वह रूस पर दबाव बनाए रखने की नीति पर कायम है. यूरोपीय विदेश नीति प्रमुख काजा कलास ने ब्रुसेल्स में एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद घोषणा की कि रूस के खिलाफ 19वां प्रतिबंध पैकेज तैयार किया जा रहा है.
उन्होंने कहा, "जब तक रूस बिना शर्त युद्धविराम पर सहमत नहीं होता, तब तक किसी भी तरह की बातचीत का कोई औचित्य नहीं बनता."
साथ ही, यूरोपीय संघ ने यूक्रेन को और अधिक सैन्य सहायता देने की प्रतिबद्धता दोहराई है, और यह भी कहा है कि वह यूक्रेन के ईयू में शामिल होने की प्रक्रिया को तेज करेगा.
हमारी भागीदारी के बिना कोई शांति नहीं- जेलेंस्की
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने यूरोपीय समर्थन के लिए आभार जताते हुए जोर दिया कि रूस की शांति की पेशकश एक छलावा है. उन्होंने अपने टेलीग्राम संदेश में कहा, "हम अपने साझेदारों के साथ मिलकर रूस पर दबाव बढ़ाते रहेंगे. शांति की कोई भी पहल तब तक वास्तविक नहीं हो सकती जब तक उसमें यूक्रेन की भागीदारी अनिवार्य न हो."
जेलेंस्की ने यह भी साफ किया कि यूक्रेन को नाटो या ईयू में शामिल होने से रोकने की रूस की कोशिश उसकी संप्रभुता पर हमला है. उन्होंने कहा कि यूक्रेन का भविष्य केवल यूक्रेनी जनता और सरकार तय करेगी, कोई विदेशी ताकत नहीं.
रूस की मांगें: नाटो को छोड़ो, सेना पीछे हटाओ
वहीं रूस की स्थिति बिल्कुल अलग है. पुतिन की सरकार का कहना है कि यूक्रेन को नाटो में शामिल होने की अपनी योजना को पूर्णतः त्याग देना चाहिए. साथ ही, रूस चाहता है कि यूक्रेनी सेना को डोनेट्स्क, लुहान्स्क, खेरसन और जापोरिजिया जैसे इलाकों से पूरी तरह वापस बुला लिया जाए.
रूस का तर्क है कि इन क्षेत्रों में जनमत संग्रह के जरिए स्थानीय जनता ने रूस में शामिल होने की इच्छा जताई है. हालांकि, अंतरराष्ट्रीय समुदाय और यूक्रेन इस जनमत संग्रह को अवैध और जबरन थोपे गए कहते हैं.
यूक्रेन ने रूस की इन सभी मांगों को खारिज करते हुए कहा है कि ये शर्तें उसकी आंतरिक स्वतंत्रता और संप्रभुता का खुला उल्लंघन हैं.
ट्रंप की कूटनीतिक कोशिशें हो रही नाकाम?
डोनाल्ड ट्रंप ने हाल के महीनों में रूस-यूक्रेन संघर्ष को खत्म करने के लिए कई पहल की हैं. उन्होंने यह दावा भी किया था कि अगर वे फिर से राष्ट्रपति चुने जाते हैं तो वे 24 घंटे में युद्ध रोक देंगे. लेकिन यूरोपीय संघ के इस स्पष्ट रुख के बाद यह साफ होता जा रहा है कि ट्रंप की योजनाएं जमीनी हकीकत से मेल नहीं खा रहीं.
यूरोपीय नेताओं की एकजुटता और रूस के खिलाफ कठोर प्रतिबंधों की प्रतिबद्धता यह दर्शाती है कि ट्रंप का कोई भी सौदा जो यूक्रेन की राजनीतिक स्वतंत्रता को सीमित करता है, स्वीकार्य नहीं होगा.
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