Poland Needs Atom Bomb: रूस के पड़ोसी देश पोलैंड ने परमाणु हथियार विकसित करने की संभावना पर खुलकर बयान दिया है. यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब रूस की परमाणु नीति में हाल में बदलाव हुए हैं और NATO के साथ उसका तनाव बढ़ा हुआ है. पोलैंड के इस रुख से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चर्चा शुरू हो गई है.
पोलैंड के राष्ट्रपति कैरोल नावरोकी ने ‘रूसी खतरे’ का हवाला देते हुए कहा कि देश को अपना परमाणु हथियार कार्यक्रम शुरू करने पर विचार करना चाहिए. उन्होंने पोलसैट न्यूज़ से बातचीत में कहा कि वह पोलैंड के न्यूक्लियर प्रोजेक्ट में शामिल होने के पक्के समर्थक हैं. हालांकि उन्होंने यह भी माना कि अभी यह साफ नहीं है कि वारसॉ इस दिशा में ठोस कदम उठाएगा या नहीं. पोलैंड, रूस का पड़ोसी देश है और इतिहास में लंबे समय तक मॉस्को के प्रभाव क्षेत्र में रहा है.
रूस और पोलैंड के बीच बढ़ता तनाव
पोलैंड और रूस के संबंध काफी समय से तनावपूर्ण हैं. यूक्रेन युद्ध के बाद हालात और बिगड़ गए हैं. दोनों देशों के बीच कूटनीतिक रिश्ते न्यूनतम स्तर पर पहुंच चुके हैं. पोलैंड ने 2025 के अंत में रूस के आखिरी वाणिज्य दूतावास को बंद कर दिया था, जिसके जवाब में रूस ने भी पोलैंड के कुछ दूतावास बंद कर दिए.
पोलैंड रूस पर तोड़फोड़, साइबर हमले और ड्रोन घुसपैठ जैसे आरोप लगाता है. रूस इन आरोपों को खारिज करता है और पोलैंड को “रूसोफोबिक” बताता है. वहीं रूस का कहना है कि NATO देश रूस के खतरे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहे हैं, जिसे मॉस्को “बेबुनियाद” और “डर फैलाने वाला” बताता है.
NPT की सदस्यता और कानूनी स्थिति
पोलैंड न्यूक्लियर नॉन-प्रोलिफरेशन ट्रीटी (NPT) का सदस्य है. इस संधि के तहत सिर्फ पांच देशों को आधिकारिक परमाणु शक्ति माना गया है, रूस, अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और चीन. ऐसे में पोलैंड का संभावित परमाणु कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत जटिल मुद्दा बन सकता है.
इससे पहले ईरान के एक पूर्व कमांडर ने दावा किया था कि सऊदी अरब ने भी परमाणु बम बना लिया है. हालांकि सऊदी अरब भी NPT का सदस्य है, लेकिन उसकी परमाणु महत्वाकांक्षा पर पहले भी चर्चा होती रही है.
जर्मनी में भी बढ़ी चर्चा
रिपोर्ट्स के मुताबिक जर्मनी में भी परमाणु हथियारों पर बहस तेज हो गई है. कहा जा रहा है कि इस विषय पर अब खुलकर चर्चा हो रही है और कुछ नेता, सांसद, सैन्य अधिकारी और विशेषज्ञ इसका समर्थन कर रहे हैं. बर्लिन में रूस के राजदूत सर्गेई नेचाएव ने इस रुझान को चिंताजनक बताया. वहीं जर्मनी की राइट-विंग पार्टी एएफडी के सांसद रुएडिगर लुकास गॉटशॉक ने हाल ही में कहा था कि जर्मनी को परमाणु हथियारों की जरूरत है.
उनका तर्क था कि यूरोपीय देश अब अमेरिकी सुरक्षा गारंटी पर पूरी तरह निर्भर नहीं रह सकते. पिछली जुलाई में इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने कहा था कि जर्मनी तकनीकी रूप से कुछ ही महीनों में परमाणु बम बना सकता है, लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह सिर्फ एक काल्पनिक स्थिति है.
जापान में भी उठी आवाज
दिसंबर में जापानी मीडिया में यह खबर आई थी कि प्रधानमंत्री साने ताकाइची के एक वरिष्ठ सलाहकार ने देश को अपना परमाणु प्रतिरोधक (डिटरेंट) विकसित करने पर विचार करने की बात कही थी. इस पर चीन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी.
यूरोप में नई बहस
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोप में सुरक्षा को लेकर नई बहस शुरू हो गई है. कई देश अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने की बात कर रहे हैं. पोलैंड का ताजा बयान इसी बदलते माहौल का हिस्सा माना जा रहा है. आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि क्या यह बयान सिर्फ राजनीतिक संदेश है या फिर कोई ठोस कदम भी उठाया जाता है.
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