Gaza Peace Deal: इज़राइल और हमास के बीच लंबे समय से जारी गाज़ा संघर्ष को थामने की कोशिशें अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच रही हैं. इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ी रणनीतिक बढ़त फिलहाल मिस्र के खाते में जाती दिख रही है. अमेरिका की ओर से प्रस्तावित 20-सूत्रीय गाज़ा शांति योजना में मिस्र को केंद्रीय भूमिका देने का खाका तैयार किया गया है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अगुवाई में बने इस बहुपक्षीय प्रस्ताव में यह साफ तौर पर दर्शाया गया है कि युद्धविराम के बाद गाज़ा पट्टी का सुरक्षा और प्रशासनिक नियंत्रण अस्थायी रूप से मिस्र के जिम्मे होगा. इसके तहत मिस्र लगभग 3,000 प्रशिक्षित सुरक्षाकर्मियों को गाज़ा में तैनात करेगा, जो वहां लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति को सामान्य बनाने का काम करेंगे.
मिस्र को क्यों दी गई ये जिम्मेदारी?
जानकारों के मुताबिक, इस भूमिका के पीछे मिस्र की भौगोलिक स्थिति, क्षेत्रीय प्रभाव और इज़राइल के साथ लंबे समय से जारी कूटनीतिक संबंध एक बड़ी वजह हैं. गाज़ा पट्टी की सीमा मिस्र से भी लगती है, जिससे वह सीमावर्ती सुरक्षा और मानवीय सहायता दोनों में तेजी से दखल दे सकता है.
इसके अलावा, मिस्र का हमास से भी परोक्ष संपर्क नेटवर्क है, जिससे वह संघर्ष विराम के लिए प्रभावशाली मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है. बता दें कि मिस्र पहले भी कतर के साथ मिलकर इज़राइल-हमास शांति वार्ता में सक्रिय भागीदार रहा है.
अरब देशों की भूमिका और निवेश
सूत्रों के अनुसार, अमेरिका की मध्यस्थता में हुए एक महत्वपूर्ण बैठक में अरब देशों ने गाज़ा के पुनर्निर्माण में निवेश की इच्छा जताई थी. इसी बैठक में यह प्रस्ताव भी आया कि जब तक स्थायी प्रशासनिक व्यवस्था नहीं बनती, तब तक मिस्र अस्थायी रूप से गाज़ा का संचालन संभाले.
इस पूरे डील के सफल क्रियान्वयन से मिस्र न सिर्फ क्षेत्रीय राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत करेगा, बल्कि यह उसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक शांति निर्माता (Peace Facilitator) की पहचान भी देगा.
दो साल में थक चुका है गाज़ा
गाज़ा में 7 अक्टूबर 2023 से शुरू हुई जंग ने अब तक 66,000 से अधिक फिलिस्तीनी नागरिकों की जान ले ली है. इज़राइल के अनुसार, हमास के अधिकांश टॉप कमांडर मारे जा चुके हैं और उनके लगभग 90% हथियारों को तबाह किया जा चुका है. हालांकि, जमीनी हालात अब भी सामान्य नहीं हैं.
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