खत्म हो रहा अमेरिका का डर! भारत-ईरान-आर्मेनिया ने मिलकर बनाया बड़ा प्लान, चीन की उड़ जाएगी नींद!

भारत, ईरान और आर्मेनिया के बीच एक नया त्रिपक्षीय सहयोग उभरता दिख रहा है, जो क्षेत्रीय व्यापार और संपर्क को नया स्वरूप देने की दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकता है.

India-Iran-Armenia made a big plan together
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नई दिल्ली: भारत, ईरान और आर्मेनिया के बीच एक नया त्रिपक्षीय सहयोग उभरता दिख रहा है, जो क्षेत्रीय व्यापार और संपर्क को नया स्वरूप देने की दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकता है. इन तीनों देशों ने एक संयुक्त परिवहन नेटवर्क विकसित करने की योजना पर काम तेज कर दिया है, जिससे आर्थिक, रणनीतिक और कूटनीतिक लाभों के नए रास्ते खुल सकते हैं.

तेहरान में हुई बैठक, व्यापारिक गलियारे पर चर्चा

सितंबर 2025 में तेहरान में आयोजित बैठक में भारत, ईरान और आर्मेनिया के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया. यह तीसरा त्रिपक्षीय संवाद था, जिसका उद्देश्य व्यापार, परिवहन और आपसी सहयोग को मजबूती देना था. इसमें विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (INSTC) और आर्मेनिया की "शांति का चौराहा" परियोजना को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया.

INSTC एक महत्त्वाकांक्षी परियोजना है, जो भारत को ईरान के रास्ते रूस और यूरोप से जोड़ती है. वहीं, आर्मेनिया का प्रस्तावित 'क्रॉसरोड ऑफ पीस' प्रोजेक्ट क्षेत्रीय सहयोग के लिए एक अहम मंच बन सकता है.

भूराजनीतिक पृष्ठभूमि में हुई महत्वपूर्ण वार्ता

यह बैठक ऐसे समय पर हुई है, जब कुछ ही महीने पहले ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच तनावपूर्ण हालात बने थे. इस पृष्ठभूमि में भारत, ईरान और आर्मेनिया का यह समन्वय सिर्फ पारंपरिक कूटनीति नहीं, बल्कि एक सशक्त रणनीतिक पहल का संकेत देता है.

बैठक में ईरान के बंदरगाह, रेलवे, केंद्रीय बैंक और कृषि मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल थे. तीनों देशों ने आगामी वर्षों में आपसी सहयोग के ठोस फ्रेमवर्क पर काम करने की प्रतिबद्धता जताई.

चीन की बेल्ट एंड रोड पहल को मिलेगी चुनौती

अगर यह त्रिपक्षीय नेटवर्क सफल होता है, तो यह चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के प्रभाव को संतुलित करने का एक मजबूत माध्यम बन सकता है. भारत को इस सहयोग से काकेशस क्षेत्र होते हुए यूरोप तक पहुंचने का एक वैकल्पिक मार्ग मिलेगा, जो उसे अधिक रणनीतिक लचीलापन प्रदान करेगा.

2026 में अगला दौर, रणनीतिक फायदे की उम्मीद

तीनों देशों ने यह भी तय किया है कि इस त्रिपक्षीय वार्ता का अगला चरण 2026 में आयोजित किया जाएगा. विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि यह साझेदारी व्यावहारिक रूप लेती है, तो इससे व्यापारिक मार्गों में विविधता, नई आर्थिक संभावनाएं, और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा मिल सकता है.

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