हमारे शरीर की हर कोशिका किसी न किसी रूप में लिवर पर निर्भर करती है. यही अंग भोजन से मिलने वाले पोषक तत्वों को ऊर्जा में बदलने, शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने और कई जरूरी जैविक प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने का काम करता है. लेकिन आधुनिक जीवनशैली, अनियमित खानपान, बढ़ता मोटापा, फैटी लिवर और शराब के बढ़ते सेवन ने लिवर संबंधी बीमारियों के मामलों में तेजी से इजाफा किया है. चिंता की बात यह है कि शुरुआती चरण में लिवर की बीमारी अक्सर बिना किसी गंभीर दर्द या स्पष्ट परेशानी के आगे बढ़ती रहती है. हालांकि शरीर, खासकर त्वचा, कई ऐसे संकेत देने लगती है जिन्हें समय रहते पहचान लिया जाए तो गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है.
त्वचा क्यों बताती है लिवर की सेहत का हाल?
लिवर शरीर के अंदर मौजूद विषैले पदार्थों को फिल्टर करने और कई महत्वपूर्ण प्रोटीन व एंजाइम बनाने का काम करता है. जब यह अंग ठीक तरह से काम नहीं कर पाता, तो उसका असर केवल पाचन तंत्र तक सीमित नहीं रहता बल्कि त्वचा, आंखों और पूरे शरीर पर दिखाई देने लगता है. कई बार त्वचा में होने वाले बदलाव ही लिवर की बीमारी का सबसे पहला संकेत बनते हैं. इसी वजह से डॉक्टर सलाह देते हैं कि यदि त्वचा में लंबे समय तक कोई असामान्य परिवर्तन दिखाई दें, तो केवल कॉस्मेटिक समस्या मानकर उन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
त्वचा और आंखों का पीला पड़ना हो सकता है बड़ा संकेत
लिवर खराब होने पर सबसे प्रमुख लक्षणों में पीलिया शामिल है. Mayo Clinic के अनुसार, जब लिवर बिलीरुबिन नामक पदार्थ को सही तरीके से शरीर से बाहर नहीं निकाल पाता, तो इसकी मात्रा रक्त में बढ़ने लगती है. इसका असर सबसे पहले त्वचा और आंखों के सफेद हिस्से पर दिखाई देता है, जो पीले पड़ने लगते हैं. यदि अचानक त्वचा या आंखों का रंग पीला नजर आने लगे, तो इसे सामान्य समस्या समझकर टालना नहीं चाहिए. यह लिवर की गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है और तत्काल चिकित्सकीय जांच जरूरी होती है.
लगातार खुजली भी हो सकती है चेतावनी
त्वचा में लगातार खुजली होना भी लिवर संबंधी समस्याओं का संकेत माना जाता है. कई मरीजों में यह खुजली किसी एलर्जी, संक्रमण या त्वचा रोग के कारण नहीं बल्कि लिवर के ठीक से काम न करने की वजह से होती है. यह खुजली शरीर के किसी एक हिस्से तक सीमित रह सकती है या फिर पूरे शरीर में महसूस हो सकती है. यदि लंबे समय तक खुजली बनी रहे और उसका स्पष्ट कारण न मिले, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर होता है.
हल्की चोट पर भी जल्दी पड़ने लगते हैं नीले निशान
लिवर शरीर में ऐसे प्रोटीन बनाता है जो खून को सामान्य रूप से जमाने में मदद करते हैं. जब लिवर की कार्यक्षमता प्रभावित होती है, तो यह प्रक्रिया भी कमजोर पड़ जाती है. ऐसी स्थिति में मामूली चोट लगने पर भी त्वचा पर आसानी से नीले या काले निशान बनने लगते हैं. यदि बार-बार ऐसा होने लगे, तो इसे केवल कमजोरी मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, बल्कि लिवर की जांच कराने पर विचार करना चाहिए.
त्वचा पर मकड़ी के जाले जैसे लाल निशान दिखना
लिवर की कुछ बीमारियों में त्वचा पर छोटे-छोटे लाल धब्बे या नसों का जाल दिखाई देने लगता है, जिन्हें चिकित्सकीय भाषा में स्पाइडर एंजियोमा कहा जाता है. ये निशान अक्सर चेहरे, गर्दन, कंधों और छाती के आसपास दिखाई देते हैं. हालांकि हर व्यक्ति में यह लक्षण नहीं होता, लेकिन यदि ऐसे बदलाव नजर आएं तो विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी माना जाता है.
सिर्फ त्वचा ही नहीं, शरीर भी देता है कई संकेत
लिवर की बीमारी केवल त्वचा तक सीमित नहीं रहती. इसके साथ-साथ लगातार थकान महसूस होना, भूख कम लगना, मतली या उल्टी आना, पेट में दर्द या सूजन, पैरों और टखनों में सूजन जैसी समस्याएं भी दिखाई दे सकती हैं. इसके अलावा पेशाब का रंग गहरा होना, मल का रंग सामान्य से हल्का होना, अचानक वजन कम होना और कुछ मामलों में भ्रम या मानसिक असमंजस की स्थिति भी विकसित हो सकती है. हालांकि ये लक्षण अन्य बीमारियों में भी देखने को मिल सकते हैं, इसलिए सही कारण जानने के लिए डॉक्टर से जांच कराना आवश्यक होता है.
किन लोगों में अधिक रहता है खतरा?
विशेषज्ञों के अनुसार, अधिक शराब पीने वाले लोग, मोटापे से जूझ रहे व्यक्ति, फैटी लिवर के मरीज, हेपेटाइटिस संक्रमण से प्रभावित लोग और लंबे समय तक बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाओं का सेवन करने वाले लोगों में लिवर संबंधी बीमारियों का जोखिम अधिक होता है. इसके अलावा मधुमेह और हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याएं भी फैटी लिवर की संभावना बढ़ा सकती हैं, जो आगे चलकर गंभीर लिवर रोग का रूप ले सकती हैं.
स्वस्थ लिवर के लिए जीवनशैली में करें जरूरी बदलाव
लिवर को लंबे समय तक स्वस्थ रखने के लिए सबसे जरूरी है कि भोजन संतुलित और पौष्टिक हो. अधिक तली-भुनी, मीठी और प्रोसेस्ड चीजों का सेवन सीमित करना चाहिए. नियमित व्यायाम और स्वस्थ वजन बनाए रखना भी लिवर की कार्यक्षमता को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है. इसके साथ ही शराब से दूरी बनाना, बिना डॉक्टर की सलाह के लंबे समय तक दवाइयों का इस्तेमाल न करना और पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी लिवर की सुरक्षा के लिए जरूरी माना जाता है.
समय पर जांच से टल सकता है बड़ा खतरा
लिवर की अधिकांश बीमारियों का शुरुआती चरण में पता चल जाए तो उनका इलाज अपेक्षाकृत आसान होता है. इसलिए यदि त्वचा या शरीर में ऊपर बताए गए किसी भी बदलाव का अनुभव हो, तो स्वयं इलाज करने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर विकल्प है.
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