पाकिस्तान में फिर हुआ ड्रोन हमला, वॉलीबॉल मैदान पर अटैक; इलाके में दहशत का माहौल

पाकिस्तान के अशांत खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में खेल का मैदान ही आतंक का केंद्र बन गया. बुधवार को एक वॉलीबॉल ग्राउंड पर हुए संदिग्ध ड्रोन हमले ने न केवल खेल को रोका.

Drone attack in Pakistan attack on volleyball ground
प्रतीकात्मक तस्वीर | Photo: Freepik

खैबर पख्तूनख्वा: जहां एक तरफ लोग खेल और मनोरंजन के जरिए राहत की सांस लेने की कोशिश कर रहे थे, वहीं पाकिस्तान के अशांत खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में खेल का मैदान ही आतंक का केंद्र बन गया. बुधवार को एक वॉलीबॉल ग्राउंड पर हुए संदिग्ध ड्रोन हमले ने न केवल खेल को रोका, बल्कि लोगों की ज़िंदगी को भी दहशत में डाल दिया.

वॉलीबॉल मैच के बीच धमाका, 22 घायल

घटना बर्मल तहसील के आज़म वारसक क्षेत्र में स्थित करमज़ी स्टॉप के पास हुई, जब स्थानीय लोग वॉलीबॉल मैच का आनंद ले रहे थे. तभी अचानक एक ज़ोरदार विस्फोट हुआ जिससे मैदान में अफरा-तफरी मच गई. लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर दौड़ पड़े.

इस हमले में कम से कम 22 लोग घायल हो गए, जिनमें 7 बच्चे भी शामिल हैं. घायलों को वाना के जिला मुख्यालय अस्पताल में भर्ती कराया गया है. अस्पताल सूत्रों के अनुसार, कुछ की हालत बेहद नाज़ुक है, जिनमें एक 13 वर्षीय बालक और एक युवक गंभीर रूप से घायल हैं.

कई की हालत गंभीर, मासूम भी चपेट में

अस्पताल में भर्ती युवाओं में से 15, 18 और 19 साल के तीन युवकों को ‘मेजर इंजरी’ हुई है. वहीं बाकी घायलों को हल्की चोटें आई हैं, जिनमें से दो को प्राथमिक इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई. स्थानीय प्रशासन और सुरक्षाकर्मी घटनास्थल पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया.

राजनीतिक प्रतिक्रिया और गोलीबारी का माहौल

इस हमले की नेशनल असेंबली के सदस्य ज़ुबैर खान ने कड़ी निंदा की. उन्होंने इसे “बर्बरता की हद” बताते हुए कहा कि धमाके के तुरंत बाद इलाके में भीषण गोलीबारी शुरू हो गई, जिससे भगदड़ मच गई और लोग ज़मीन पर गिर पड़े.

पहले भी हो चुका है हमला, माहौल तनावपूर्ण

इस घटना ने इलाके के लोगों की पहले से मौजूद असुरक्षा की भावना को और गहरा कर दिया है. महज़ दो हफ्ते पहले 19 मई को उत्तर वजीरिस्तान के मीर अली क्षेत्र में भी एक संदिग्ध ड्रोन हमला हुआ था जिसमें एक ही परिवार के चार बच्चों की मौत हो गई थी और कई घायल हुए थे.

इस दर्दनाक घटना के बाद स्थानीय लोगों ने इंसाफ की मांग करते हुए धरना भी दिया था. हालांकि पाकिस्तान सेना ने बाद में ISPR के माध्यम से इन आरोपों को खारिज कर दिया था, और कहा था कि मीर अली की घटना को गलत तरीके से सुरक्षा बलों से जोड़ा गया है.

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