DRDO ने फिर किया कमाल, एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल का सफल परीक्षण; दुश्मनों को लिए बनेगी काल

    DRDO MPATGM Test: सोमवार का दिन भारत के विज्ञान और रक्षा क्षेत्र के लिए भावनाओं से भरा रहा. एक ओर सुबह-सुबह अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़ी उम्मीदों को झटका लगा, तो दूसरी ओर दिन ढलते-ढलते देश की सुरक्षा को मजबूत करने वाली एक बड़ी सफलता की खबर ने चेहरों पर मुस्कान लौटा दी.

    DRDO again did wonders successfully tested anti-tank guided missile Kaal will be made for enemies
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    DRDO MPATGM Test: सोमवार का दिन भारत के विज्ञान और रक्षा क्षेत्र के लिए भावनाओं से भरा रहा. एक ओर सुबह-सुबह अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़ी उम्मीदों को झटका लगा, तो दूसरी ओर दिन ढलते-ढलते देश की सुरक्षा को मजबूत करने वाली एक बड़ी सफलता की खबर ने चेहरों पर मुस्कान लौटा दी. यह दिन याद दिलाता है कि वैज्ञानिक यात्रा में असफलता और सफलता, दोनों साथ-साथ चलती हैं.

    जहां भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का एक महत्वाकांक्षी मिशन तकनीकी कारणों से अधूरा रह गया, वहीं रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने दुश्मन के लिए खौफ पैदा करने वाली एक अत्याधुनिक मिसाइल का सफल परीक्षण कर देशवासियों को गर्व का मौका दिया.

    ISRO से टूटी उम्मीद, मिशन जो इतिहास बना सकता था

    सोमवार की सुबह ISRO ने PSLV-C62 रॉकेट के जरिए EOS-N1 सैटेलाइट को अंतरिक्ष में स्थापित करने की कोशिश की. यह मिशन तकनीकी और रणनीतिक दोनों ही लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा था. अगर यह प्रक्षेपण सफल होता, तो पृथ्वी अवलोकन (Earth Observation) के क्षेत्र में भारत की क्षमताओं में बड़ा इजाफा होता.

    हालांकि, लॉन्च के कुछ ही मिनटों बाद PSLV-C62 अपने तय मार्ग से भटक गया. इस वजह से मिशन को आगे बढ़ाया नहीं जा सका और अंततः इसे असफल घोषित करना पड़ा. इसरो ने स्पष्ट किया है कि सभी ग्राउंड स्टेशनों से प्राप्त डेटा का गहराई से विश्लेषण किया जाएगा ताकि यह समझा जा सके कि तकनीकी चूक कहां हुई.

    यह झटका जरूर निराशाजनक है, लेकिन ISRO के इतिहास को देखें तो हर असफलता के बाद संगठन पहले से ज्यादा मजबूती के साथ वापस लौटा है. वैज्ञानिकों का यही आत्मविश्वास आने वाले मिशनों की नींव बनेगा.

    DRDO की बड़ी कामयाबी, दुश्मन को दौड़ा-दौड़ाकर मारने वाली मिसाइल

    ISRO से मिली मायूसी के कुछ ही घंटों बाद रक्षा क्षेत्र से एक बेहद उत्साहजनक खबर सामने आई. DRDO ने मैन पोर्टेबल एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल (MPATGM) का सफल परीक्षण किया है. हालांकि यह परीक्षण रविवार को किया गया था, लेकिन इसकी आधिकारिक जानकारी सोमवार को सार्वजनिक की गई.

    इस मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह मूविंग टार्गेट यानी चलते हुए दुश्मन के टैंक या बख्तरबंद वाहन को भी बेहद सटीकता से निशाना बना सकती है. आसान शब्दों में कहें तो यह मिसाइल दुश्मन को "दौड़ा-दौड़ाकर" मारने में सक्षम है.

    क्या बनाता है MPATGM को इतना खास?

    MPATGM एक तीसरी पीढ़ी की ‘फायर एंड फॉरगेट’ मिसाइल है. इसका मतलब है कि एक बार लॉन्च करने के बाद इसे गाइड करने की जरूरत नहीं होती. यह खुद ही अपने लक्ष्य तक पहुंच जाती है.

    हालिया परीक्षणों में इस मिसाइल ने अपनी टॉप अटैक कैपेबिलिटी का शानदार प्रदर्शन किया. इस मोड में मिसाइल टैंक पर ऊपर से हमला करती है, जहां उसकी सुरक्षा सबसे कमजोर होती है. आधुनिक टैंकों में लगी एक्सप्लोसिव रिएक्टिव आर्मर (ERA) को यह आसानी से बायपास कर लेती है.

    पोखरण में हुआ सफल परीक्षण

    सूत्रों के अनुसार, यह परीक्षण राजस्थान के पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में किया गया. परीक्षण के दौरान एक चलते हुए डमी टैंक को लक्ष्य बनाया गया, जिसे MPATGM ने पूरी सटीकता के साथ तबाह कर दिया. यह सफलता भारतीय सेना के लिए बेहद अहम है, क्योंकि इससे युद्ध के मैदान में पैदल सैनिकों की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी.

    तकनीकी खूबियों पर एक नजर

    MPATGM सिर्फ ताकतवर ही नहीं, बल्कि बेहद आधुनिक भी है:

    वजन: मात्र 14–15 किलोग्राम, जिसे सैनिक कंधे पर आसानी से ले जा सकते हैं

    रेंज: 2.5 किलोमीटर तक

    तकनीक: इमेजिंग इन्फ्रारेड (IIR) सीकर

    क्षमता: डे-नाइट और हर मौसम में ऑपरेशन

    वॉरहेड: टैंडम वॉरहेड, जो आधुनिक मेन बैटल टैंकों (MBT) को भेदने में सक्षम

    MPATGM सिस्टम में मिसाइल के साथ-साथ लॉन्चर, टारगेट एक्विजिशन सिस्टम और फायर कंट्रोल यूनिट भी शामिल हैं, जो इसे एक पूरी तरह से स्वदेशी और आत्मनिर्भर हथियार प्रणाली बनाते हैं.

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