ट्रंप का पाक प्रेम! लादेन को छुपाने वालों पर अमेरिकी राष्ट्रपति लुटा रहे प्यार, स्टूडेंट वीजा को लेकर दिख रहा दोहरापन

US Student Visa Update: अमेरिका और भारत के संबंधों में हाल के वर्षों में भले ही रणनीतिक साझेदारी की बातें होती रही हों, लेकिन ग्राउंड रियलिटी कुछ और ही कहानी बयां कर रही है.

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US Student Visa Update: अमेरिका और भारत के संबंधों में हाल के वर्षों में भले ही रणनीतिक साझेदारी की बातें होती रही हों, लेकिन ग्राउंड रियलिटी कुछ और ही कहानी बयां कर रही है.

ताजा आंकड़ों पर नजर डालें तो अमेरिका ने वित्तीय वर्ष 2024 में भारतीय छात्रों को मिलने वाले F-1 (स्टूडेंट) वीजा में 34% की गिरावट दर्ज की है. वहीं, 2025 के शुरुआती महीनों (जनवरी से मई) के दौरान यह गिरावट और भी तेज हुई, करीब 29% कम वीजा भारतीय छात्रों को दिए गए हैं.

भारतीय छात्रों को मिलने वाले वीजा में भारी गिरावट

अमेरिकी विदेश मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, FY 2024 में भारत के छात्रों को 86,067 F-1 वीजा जारी किए गए, जो FY 2023 की तुलना में लगभग एक तिहाई कम है. अगर हम सिर्फ 2025 के शुरुआती महीनों (जनवरी–मई) की बात करें, तो भारतीयों को केवल 11,484 वीजा मिले, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह संख्या 16,105 थी.

पाकिस्तान को मिल रहा विशेष सहयोग

एक तरफ भारतीय छात्रों के लिए वीजा की राह कठिन होती जा रही है, वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान के साथ अमेरिका की नजदीकियां बढ़ती दिखाई दे रही हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और पाकिस्तान के बीच तेल निकालने के लिए एक संयुक्त समझौता हुआ है. साथ ही, पाकिस्तान के छात्रों को बड़ी संख्या में स्टूडेंट वीजा भी जारी किए जा रहे हैं.

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वापसी के साथ ही यह बदलाव और अधिक स्पष्ट हो गया है, उनकी नीतियों के तहत भारत को झटका और पाकिस्तान को राहत मिलती दिखाई दे रही है.

क्या कहते हैं आंकड़े?

वर्ष                      भारतीय छात्रों को F-1 वीजा
FY 2023 (जन–मई)    16,105 वीजा
FY 2025 (जन–मई)    11,484 वीजा

गिरावट       लगभग 29%

ट्रंप की वापसी और बदलती वीजा नीति

डोनाल्ड ट्रंप की सत्ता में वापसी के बाद से वीजा पॉलिसी में बदलाव साफ तौर पर दिख रहा है. भारतीयों के लिए वीजा की प्रक्रिया कठिन होती जा रही है, जबकि पाकिस्तान के साथ नए आर्थिक और शैक्षणिक रिश्ते उभर रहे हैं. हालांकि अमेरिका ने आधिकारिक रूप से ऐसी किसी पक्षपाती नीति की पुष्टि नहीं की है, लेकिन डेटा खुद बोल रहा है — और वह भी काफी स्पष्ट रूप से.

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